मंगलवार, 30 अगस्त 2011

आया खुशियों का पैगाम -ईद मुबारक



आज ही क्या पिछले कई दिनों से बाज़ार हमारे मुसलमान भाई-बहनों से
भरे पड़े हैं और हों  भी क्यों न साल भर में एक बार आने वाली ईद-उल-फितर इस्लाम धर्मावलम्बियों के लिए खास महत्व रखती है.बचपन से हम देखते हैं कि सभी रोज़ेदार इस कोशिश में लगे रहते हैं कि दूज का चाँद दिखाई दे जाये और   
२९ दिन के रोज़े रखने के बाद ही ईद हो जाये हम कहते ऐसा क्यों ?बाद में हमें हमारे पापा के एक मित्र से ये  पता लगा ''कि भले ही इस समय हम एक रोज़े के करने से बच जाएँ किन्तु   बाद में हमें ये रोज़ा रखना होता है.इस्लाम धर्म में ईद एक तोहफे का सामान है ये कहना है आज के हिंदुस्तान  दैनिक में प्रकाशित एक आलेख के लेखक''फ़िरोज़ बख्त अहमद''जी का .वे कहते हैं-
''ईद की शुरुआत तो ईद से एक रोज़ पहले मगरिब की नमाज़ के बाद चाँद देखने के साथ ही हो जाती है.ईद का यह चाँद महीन होने के साथ ही थोड़ी ही देर के लिए दिखाई देता है. ईद का चाँद देखते ही मुस्लिम लोग खुदा से अमन-शान्ति की दुआ करते  हैं.''
फ़िरोज़  जी आगे कहते हैं कि ईद का अर्थ समझें तो अरबी में किसी भी चीज़ के बार-बार आने को ''ऊद''कहा जाता है इसका अर्थ है कि जिसने रोज़े रखें हैं उसके लिए ईद बार-बार आएगी.
फ़िरोज़ जी ही बताते हैं कि इस पर्व का नाम ईद-उल-फितर क्यों पड़ा ?ईद के दिन ईद की नमाज़ से पूर्व सभी मुसलमान फितरा अदा करते हैं . फितरा  का अर्थ है कि दान-दीन धर्म-भावना के तहत सुबह सवेरे निर्धन एवं फ़कीर लोगों को पैसे की शक्ल में फितरे की रकम देना.''
ईद को फिरोज जी एक और तरह से भी समझाते हैं .वे कहते हैं हमें पैगम्बर हज़रत मुहम्मद  [सल.]इसका तत्त्व  समझना  चाहिए -''हज़रत मुहम्मद बहुत सादगी के साथ ईद मनाया करते थे .एक बार हज़रत मुहम्मद ईद के दिन सुबह सवेरे फज्र की नमाज़ के बाद बाज़ार गए .रास्ते में आपको एक छोटा सा यतीम बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया हज़रत मुहम्मद पास गए और कारण पूछा बच्चे ने बताया कि आज ईद का दिन है और उसके पास नए कपडे ,जूते और पैसे नहीं हैं .हज़रत मुहम्मद ने उसे पुचकारा और घर ले आये .बच्चे से कहा -''उनकी पत्नी हज़रत आयशा उस बच्चे की माँ हैं ,बेटी फातिमा उसकी बहन है और हसनैन उसके भाई हैं इस अनाथ बच्चे को नए कपडे पहनाये गए उसे पकवान पेश किये गए ताकि उसे अपने अकेलेपन का आभास न हो इस सबसे बच्चा इतना प्रभावित हुआ कि वह मक्का की गलियों में गीत गाता रहा -आज ईद का दिन है और वह अत्यंत प्रसन्न है .आयशा उसकी माँ है और फातिमा उसकी बहन है और हसनैन उसका भाई है .ईद की वास्तविक भावना यही होती है .ईद के बारे में एक शायर ने कहा है -''एक ही सफ़ में खड़े हो गए महमूद-ओ -आयाज़
न कोई बन्दा रहा न बन्दा-नवाज़.''
यही हम अपने आस पास बरसों से देखते आ रहे हैं और खुदा करे कि यही देखते रहें .ईद सामूहिक प्रसन्नता का दिवस है इस दिन गले मिलना लोगों से सलाम  दुआ करने का ही चलन हमने देखा है और दुआ करते है कि यही चलन रहे.किसी ने खूब कहा है-   
''हिलाल-ए-ईद जो देखा तो ये ख्याल हुआ,
उन्हें गले लगाये  एक साल हुआ.''
  ईद की आप सभी को बहुत बहुत मुबारकबाद.

              शालिनी कौशिक



11 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत बहुत मुबारकबाद.....

Vikas Garg ने कहा…

Eid Mubark

vikasgarg23.blogspot.com

चैतन्य शर्मा ने कहा…

ईद के त्योंहार की हार्दिक शुभकामनायें.... हैप्पी ईद :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर।
--
भाईचारे के मुकद्दस त्यौहार पर सभी देशवासियों को ईद की दिली मुबारकवाद।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबको शुभकामनायें।

Jyoti Mishra ने कहा…

Eid mubarak to u too :)

Khushdeep Sehgal ने कहा…

ईद की दिली मुबारकबाद...

जय हिंद...

रविकर ने कहा…

हार्दिक शुभकामनायें ||

बहुत सुन्दर --
प्रस्तुति |
बधाई |

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

उम्दा प्रस्तुती!

ईद मुबारक आप एवं आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.एक ब्लॉग सबका

ईद पर विशेष अनमोल वचन

Shah Nawaz ने कहा…

आपको भी ईद-उल-फ़ित्र की बहुत-बहुत मुबारकबाद!

Anita ने कहा…

ईद की महत्ता बताता और विशेष जानकारी देता सुंदर लेख !

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