शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

स्वास्थ्य सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा बदहाल‏

 




Last page

जन्म से एक साल तक के बच्चों की मौत के मामले में देश के 284 सबसे पिछड़े जिलों में उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती सबसे ऊपर है। इसी तरह प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की होने वाली मौत के मामले में भी यूपी का फैजाबाद मंडल सबसे पिछड़ा साबित हुआ है। यहां तक कि परिवार नियोजन के मामले में भी यहां सबसे कम दिलचस्पी दिखाई गई है, जबकि इसी से अलग हुए उत्तराखंड ने अधिकांश मामलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। यही नहीं यूपी में मृत्यु दर, नवजात शिशुओं और बच्चों की मृत्यु दर सबसे ज्यादा है, तथा यहां के 70 में से 34 जिलों में मातृ मृत्यु अनुपात और लिंगानुपात भी बहुत ज्यादा है। देश के नौ सबसे पिछड़े राज्यों में पहली बार जिला स्तर पर हुए स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नतीजे बुधवार को सार्वजनिक किए गए। पैदा होने के बाद से एक साल की उम्र के दौरान मृत्यु का शिकार हो जाने वाले बच्चों (नवजात शिशु मृत्यु दर) के मामले में उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला प्रति हजार जन्म में 19 मौत के अनुपात के साथ सबसे अच्छी स्थिति में रहा, जबकि इस मामले में श्रावस्ती 103 मौत के साथ सबसे बुरी स्थिति में पाया गया। वर्ष 2015 तक नवजात शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय स्तर पर 28 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूमि और धनबाद व उत्तराखंड के चमौली, रुद्रप्रयाग, पिथौड़ागढ़ और अल्मौड़ा जिलों ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया है। प्रसव के दौरान माताओं की मौत के मामलों में इन राज्यों में जिले की बजाय मंडल स्तर पर अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि उत्तराखंड में जहां प्रति लाख प्रसव में 183 महिलाओं की मौत वहीं यूपी के फैजाबाद मंडल में यह सबसे ज्यादा 451 महिलाओं की मौत होती है। प्रति हजार लड़कों के मुकाबले पैदा होने वाली लड़कियों (जन्म के समय लिंगानुपात) के मामले में यूपी का मुरादाबाद अध्ययन में शामिल पिछड़े जिलों में सबसे बेहतर स्थिति में रहा। यहां प्रत्येक हजार लड़कों के मुकाबले 1030 लड़कियां पैदा हुई जबकि सबसे पीछे उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला है, जहां हजार लड़कों के मुकाबले सिर्फ 764 लड़कियां पैदा हुई। इस चरण में शामिल किए गए राज्य हैं बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और असम। इसी तरह परिवार नियोजन के उपायों का सबसे कम असर यूपी में दिखा। झारखंड में प्रति हजार आबादी के अनुपात में सबसे कम जन्म हो रहे हैं। जिलेवार देखा जाए तो उत्तराखंड का बागेश्वर जिला सबसे कम जन्म दर वाला जिला साबित हुआ, जबकि श्रावस्ती 40.9 के साथ सबसे ज्यादा जन्म दर वाला जिला रहा।
ये    आलेख   मुझे   खुशी  जी ने  भेजा  है आप यदि इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना चाहें तो आप उनके इस इ-मेल आई.डी. पर प्रेषित कर सकते हैं
आलेख-खुशी गोयल
प्रस्तुति-शालिनी कौशिक  


11 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post .

kumar ने कहा…

जानकारी से भरपूर पोस्ट से रूबरू कराने के लिए शुक्रिया...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सर्वेक्षण अच्छा लगा!

शिखा कौशिक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति .आभार
BLOG PAHELI NO.1

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Afsosjank hain aise Ankde....

anshumala ने कहा…

टीवी पर देखा की सरकारी अस्पताल के कर्मचारी पैसे के लिए झूठे रिकार्ड बना रहे थे एक ही महिला को एक ही साल में कई बच्चे पैदा करवा दिया यहाँ तक की पुरुषो को भी गर्भवती बनवा दिया | जब सरकारी अस्पतालों की ये हालत होगी तो बच्चो और गर्भवती महिलाओ की स्थिति इतनी ही ख़राब होगी |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबको स्वास्थ्य का लक्ष्य कहाँ से पूरा होगा तब?

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

यह तो चिन्तनीय स्थिति है...
बहुत संवेदनशील चिंतन.

Jyoti Mishra ने कहा…

Basic health facilities must be accessible to every human being but the reality speaks with lil difference.
nice read !!

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छी जानकारी है।
शुभकामनाएं

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छी जानकारी है।
शुभकामनाएं

''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

   '' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट  गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारी...