मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

आगे बढ़कर हाथ मिला ....

पाकिस्तान के रहमान मालिक आये और भारत में नयी आग लगा गए .पुराना  काम है पाकिस्तानी नेताओं का यहाँ आकर आग लगाने का ऐसे में जो मन में उद्गार भरे थे कुछ यूँ प्रकट  हो गए.
 

आ रहे हैं तेरे दर पर ,आगे बढ़कर हाथ मिला .
दिल मिले भले न हमसे ,आगे बढ़कर हाथ मिला .


 घर तेरे आकर भले हम खून रिश्तों का करें ,
भूल जा तू ये नज़ारे ,आगे बढ़कर हाथ मिला .

जाहिरा तुझसे गले मिल भीतर चलायें हम छुरियां ,
क्या करेगा देखकर ये,आगे बढ़कर हाथ मिला .

हम सदा से ही निभाते दोस्त बनकर दुश्मनी ,
तू मगर है दोस्त अपना,आगे बढ़कर हाथ मिला .

घर तेरा गिरने के दुःख में आंसू  मगरमच्छी बहें,
पर दुखी न दिल हमारा,आगे बढ़कर हाथ मिला .

आग की लपटों से घिरकर तेरे अरमां यूँ  जलें ,
मिल गयी ठंडक हमें ,अब आगे बढ़कर हाथ मिला .


 जिंदगी में तेरी हमने क्या न किया ''शालिनी '',
भूल शहादत को अपनी, आगे बढ़कर हाथ मिला .
                      शालिनी कौशिक
                                 [कौशल ]


6 टिप्‍पणियां:

Rohitas ghorela ने कहा…

वाह बहुत खूब !!

पूरण खंडेलवाल ने कहा…

जो नहीं सुधरने वाले है वो नहीं सुधरेंगे चाहे जितनी कोशिश क्यों ना कर ले ...........अच्छी रचना !!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हाथ मिलाना सीख लिया,
हाथ झटकना सीखो यारों।

कालीपद प्रसाद ने कहा…

व्यंगात्मक सटीक सुन्दर रचना

liveaaryaavart.com ने कहा…

बेहतर लेखन !!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

आ रहे हैं तेरे दर पर ,आगे बढ़कर हाथ मिला .
दिल मिले भले न हमसे ,आगे बढ़कर हाथ मिला .

वाह वाह,,,गजल के माध्यम से करारा व्यंग,,,

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