मोहन -मो/संस्कार -सौदा /.क्या एक कहे जा सकते हैं भागवत जी?


    Marriage is a social contract : mohan bhagwat
इंदौर [जागरण न्यूज नेटवर्क]। हाल ही में दुष्कर्म की घटनाओं पर विवादास्पद बयान देकर आलोचना का शिकार हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक और विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा कि शादी एक कान्ट्रैक्ट यानी सौदा है और इस सौदे के तहत एक महिला पति की देखभाल के लिए बंधी है। उनके इस बयान पर भी लोगों की तीखी प्रक्रिया सामने आई है।
भागवत ने इंदौर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की रैली के दौरान कहा, 'वैवाहिक संस्कार के तहत महिला और पुरुष एक सौदे से बंधे हैं, जिसके तहत पुरुष कहता है कि तुम्हें मेरे घर की देखभाल करनी चाहिए और तुम्हारी जरूरतों का ध्यान रखूंगा। इसलिए जब तक महिला इस कान्ट्रैक्ट को निभाती है, पुरुष को भी निभाना चाहिए। जब वह इसका उल्लंघन करे तो पुरुष उसे बेदखल कर सकता है। यदि पुरुष इस सौदे का उल्लंघन करता है तो महिला को भी इसे तोड़ देना चाहिए। सब कुछ कान्ट्रैक्ट पर आधारित है।'
भागवत के मुताबिक, सफल वैवाहिक जीवन के लिए महिला का पत्नी बनकर घर पर रहना और पुरुष का उपार्जन के लिए बाहर निकलने के नियम का पालन किया जाना चाहिए। महिला और पुरुष में एक दूसरे का ख्याल रखने का कांट्रैक्ट होता है। अगर महिला इसका उल्लंघन करती है तो उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।''

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@मोहन भागवत जी-अब और बंटवारा नहीं .

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Hindu_wedding : CHENNAI, INDIA - AUGUST 29: Indian (Tamil) Traditional Wedding Ceremony on August 29, 2010 in Chennai, Tamil Nadu, India Stock Photo

  
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Hindu_wedding : Happy indian adult people couple
ये है भारतीय विवाह का सुखद स्वरुप 

                     शालिनी कौशिक 
                        ^ कौशल *
                      

टिप्पणियाँ

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

सेहतनामा

(1)थकान उतारने में चाय और कोफी से ज्यादा कारगर सिद्ध होती है

एक्सरसाइज़ ,कसरत ,व्यायाम और कुछ विशेष नहीं तो तेज़ कदम से

चलना ,तेज़ कदमी .

(2)कच्ची या फिर अध-पकाई प्याज और लहसुन खाते रहिये इसमें होतें हैं

जीवाणु और विषाणुनाशक गुण .हमारे रोग रोधी जन्मना तंत्र को ताकत

देती

हैं ये चीज़ें .

(3)कब्ज़ से राहत के लिए ताम्बे के पात्र में लोटे या सुराही या फिर तांबे के

ग्लास में रात को ताज़ा

पानी रख दीजिए .सुबह इसे थोड़ा गुनगुना गर्म करके पीजिये .देखिए 15

दिन करके .

(4)गुड़ इलाज़ है खून की कमी का (लौह तत्वों से भर पूर है जैगरी

,jaggery),खून को साफ़ करता कील मुंहासों से बचाता है .

(5)साइंसदानों ने जिनमें एक भारतीय मूल के विज्ञानी भी शामिल हैं उस

ख़ास प्रोटीन का पता लगा लिया है जिसके ठीक से काम न करने पर

एक प्रकार का चर्म रोग हो जाता है जिसमें त्वचा लाल एवं शुष्क हो जाती

है और उसमें खारिश भी होती है .इस चर्म रोग को पामा या छाजन

(एकसिमा )कहा जाता है .इसमें चमड़ी से काफी तरल निकलके उड़ जाता है

तथा तरह तरह के एलर्जी पैदा करने वाले तत्व इस सुरक्षा कवच में सैंध

लगाके अन्दर देखिल होने लगते हैं .

Researchers found that the protein Ctip2 that controls body fats that

keep skin healthy and hydrated ,can cause atopic dermatitis , a

common type of eczema if it is not performing properly.

(6)एक्सिमा के समाधान के लिए दिन में तीन मर्तबा उलोंग चाय पीजिए

.यह एक गहरी रंगत वाली चीनी चाय है जिसे थोड़ा खमीरा उठाने के बाद

ही सुखाया जाता है .

(7)तुलसी की पत्तियों का सेवन स्ट्रेस होरमोन कोर्टीसाल के प्रबंधन में

मददगार रहता है . चित्त को उत्फुल्ल बनाए रहता है .

(8)निम्न रक्त चाप के समाधान ,प्रबंधन के लिए सुबह सवेरे तीन काली

मिर्च खाएं .(बताशे या आधी चम्मच चीनी ,गुड़ की डली किसी के भी साथ

ले सकते हैं ,शहद के भी ).

(9)To warm up cold feet ,sprinkle a bit of cayenne pepper into your

socks

Cayenne :एक प्रकार की सुस्वादु तेज़ लाल मिर्च ही है यह जो खाने को

चटपटा बनाने में काम में ली जाती है .

(10)दही और ढोकला जैसे खमीरा उठाए हुए (किन्वित )खाद्य ऐसे

जीवाणुओं से लबालब रहतें हैं जो हमारे कुदरती रोग रोधी तंत्र को मजबूती

प्रदान करते हैं .

(11)टॉयलिट् सीट पे ढक्कन इसी लिए लगा है उसे फ्लश करते वक्त बंद

कर लिया जाए खुला रखने पर हवा में तैरते मल एवं अन्य रोग पैदा करने

वाले कण टूथ ब्रश पर भी जाके

पसर सकतें हैं ब-शर्ते उसे छ :फीट से ज्यादा दूर रखा गया हो .

(12)SLEEP APNEA MAY OFFER PROTECTION TO HEART

PATIENTS

People who suffer from breathing disorders like sleep apnea are usually at higher risk for cardiovascular disease ,but researchers found that for some heart attack patients the disorder can boost the numbers of rare cells that repair and build new blood cells .

(13)दिल के लिए टमाटर पिल

साइंसदानों ने टमाटर की खाने वाली गोलियां तैयार कर लीं हैं .समझा

जाता है मात्र एक गोली रोजाना खाते रहने से न सिर्फ दिल को खून की

आपूर्ति बढ़ती है धमनियों की लोच भी 50%तक बढ़ जाती है .

समझा जाता है इस गोली के जादू का राज जिसे Ateronon capsule कहा

गया है ,इसमें मौजूद रासायनिक तत्व लाइकोपीन (Lycopene)में छिपा है

जिसकी वजह से टमाटर का रंग सुर्ख लाल होता है .यही वह तत्व है जो

धमनियों में ज़मा वसा को विखंडित कर देता है साधारण तत्वों में तोड़ देता

है .अलावा इसके इस गोली से जोड़ों के दर्द और मधुमेह के मरीजों को भी

फायदा पहुँच सकता है .

कैंसर गांठ (ट्यूमर बनने की रफ़्तार )भी कम हो सकती है .
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
आधा सच है दोनों ओर

शालिनी जी कौशिक ,आशा राम बापू जी हों ,या मोहन भागवत जी ,इसी विचार धारा के अन्य लोग हों जो ये सब लोग कह रहें हैं

उसके

निहितार्थ को समझना होगा :

भारत की त्रासदी है यह या परम्परा फैसला आप खुद करें हम निर्णायक की भूमिका में नहीं आ सकते ,औरत को सम्बन्ध की सीखचों में

आबद्ध करके ही देखा जाता है .उसे आदर देने के योग्य इसी

सम्बन्ध नेट वर्क में देखा जाता है .इससे इतर जब उसकी शख्शियत की बात आती है ,हम बगलें झाँकने लगते हैं या फिर पश्चिम की ओर

निहारते हैं .जहां औरत के अलंघ्य अधिकार भी हैं

शख्शियत

भी है ,सम्बन्ध सापेक्ष .भारत की त्रासदी यह है भारत ने जो कुछ पश्चिम की इस निरपेक्ष शख्शियत के नाम पर विकृत चैनल शैली में

,इंटरनेट पे परोसा जा रहा है उसे ही सच मान लिया है औरत के चुनिन्दा अंगों को ही हमने औरत मान समझ लिया है ,जब कि

वह

विकृति है व्यक्ति विशेष की .पश्चिम की अधिकार प्राप्त शख्शियत नहीं है वह .जैसा चैनलों और फिल्मों, नेट की कई वेब साइटों पर

दिखाया जा रहा है .विज्ञापन के रुपहले संसार में दिखाया जा रहा है .(हाँ विज्ञापन और मोडलिंग उसका पेशा भी है ).हम औरत के अंगों

को ही क्यों देखते हैं ?वह तो उसके अंग है वह औरत नहीं है .

उसकी भी एक शख्शियत है एनाटमी से परे .



औरत मन बहलाव का ज़रिया नहीं है .वह सम्बन्ध से निरपेक्ष एक शख्शियत के रूप में भी है और बाकायदा है .मोहन भागवत जी हों या

आशाराम बापू वह इस फर्क को समझ नहीं पा रहें हैं .परम्परा

के

चश्मे से आधुनिक औरत को देख रहें हैं .यह एक अ -यौनिक चश्मा है ,अ -सेक्स्युअल आदर भाव है औरत के प्रति ,दूसरे छोर पर

पश्चिम

की आड़ में विकृत चीज़ें परोसी जा रहीं है वह दूसरा छोर है

जहां औरत को एक अम्यूजमेंट पार्क समझा जाता है .खिलवाड़ की भोग की वस्तु समझा जाता है .जबकि सुनीता विलियम्स भी वही है

,कैट वाल्क भी वही करती है .मोहिनी भी

वही है आइटम सोंग करने वाली भी वही है .हवाई जहाज भी वाही उडाती है कई मर्तबा पूरा क्रू किसी किसी फ्लाईट सिर्फ महिलाओं का

ही होता है .

एक आयामीय नहीं है नारी

विविध

रूपा, विविध आयामीय है .

शालिनी जी आधा सच है दोनों ओर .

एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
आधा सच है दोनों ओर

शालिनी जी कौशिक ,आशा राम बापू जी हों ,या मोहन भागवत जी ,इसी विचार धारा के अन्य लोग हों जो ये सब लोग कह रहें हैं

उसके

निहितार्थ को समझना होगा :

भारत की त्रासदी है यह या परम्परा फैसला आप खुद करें हम निर्णायक की भूमिका में नहीं आ सकते ,औरत को सम्बन्ध की सीखचों में

आबद्ध करके ही देखा जाता है .उसे आदर देने के योग्य इसी

सम्बन्ध नेट वर्क में देखा जाता है .इससे इतर जब उसकी शख्शियत की बात आती है ,हम बगलें झाँकने लगते हैं या फिर पश्चिम की ओर

निहारते हैं .जहां औरत के अलंघ्य अधिकार भी हैं

शख्शियत

भी है ,सम्बन्ध सापेक्ष .भारत की त्रासदी यह है भारत ने जो कुछ पश्चिम की इस निरपेक्ष शख्शियत के नाम पर विकृत चैनल शैली में

,इंटरनेट पे परोसा जा रहा है उसे ही सच मान लिया है औरत के चुनिन्दा अंगों को ही हमने औरत मान समझ लिया है ,जब कि

वह

विकृति है व्यक्ति विशेष की .पश्चिम की अधिकार प्राप्त शख्शियत नहीं है वह .जैसा चैनलों और फिल्मों, नेट की कई वेब साइटों पर

दिखाया जा रहा है .विज्ञापन के रुपहले संसार में दिखाया जा रहा है .(हाँ विज्ञापन और मोडलिंग उसका पेशा भी है ).हम औरत के अंगों

को ही क्यों देखते हैं ?वह तो उसके अंग है वह औरत नहीं है .

उसकी भी एक शख्शियत है एनाटमी से परे .



औरत मन बहलाव का ज़रिया नहीं है .वह सम्बन्ध से निरपेक्ष एक शख्शियत के रूप में भी है और बाकायदा है .मोहन भागवत जी हों या

आशाराम बापू वह इस फर्क को समझ नहीं पा रहें हैं .परम्परा

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चश्मे से आधुनिक औरत को देख रहें हैं .यह एक अ -यौनिक चश्मा है ,अ -सेक्स्युअल आदर भाव है औरत के प्रति ,दूसरे छोर पर

पश्चिम

की आड़ में विकृत चीज़ें परोसी जा रहीं है वह दूसरा छोर है

जहां औरत को एक अम्यूजमेंट पार्क समझा जाता है .खिलवाड़ की भोग की वस्तु समझा जाता है .जबकि सुनीता विलियम्स भी वही है

,कैट वाल्क भी वही करती है .मोहिनी भी

वही है आइटम सोंग करने वाली भी वही है .हवाई जहाज भी वाही उडाती है कई मर्तबा पूरा क्रू किसी किसी फ्लाईट सिर्फ महिलाओं का

ही होता है .

एक आयामीय नहीं है नारी

विविध

रूपा, विविध आयामीय है .

शालिनी जी आधा सच है दोनों ओर .

एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :
सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
Gajadhar Dwivedi ने कहा…
शादी सौदा या समझौता तो पश्चिम में है, भारत में और खासकर हिन्‍दू धर्म में इसे सात जन्‍मों का बंधन कहा जाता है और सात जन्‍मों तक साथ निभाने के लिए सात फेरे लिए जाते हैंा हम बात हिन्‍दू धर्म की कर रहे हैं मोहन भागवत की नहींा
शर्मा जी ..आप जाने कहाँ कहाँ भटक रहे हैं व विषय को भी भटका रहे हैं...आपके पूरे कथा-पुराण का एक भी शब्द संगती में व स्पश्य नहीं है कि आप क्या कहना चाहते हैं.....शायद आपकी विचार धारा स्पष्ट नहीं है...
-------मोहन भागवत ने एक दम सही कहा है....आप हिन्दू-धर्म की व्याख्याएं एवं विवाह के समय के सात बचन ( यदि किसी ने ध्यान से सुने व रिपीट किये हों ) पढ़िए ...निश्चय ही हिन्दू -विवाह एक समझौता है जिसे आजन्म निभाने एवं सात जन्मों तक बंधन का वादा किया जाता है...यही इस विवाह -बंधन -समझौते--सौदे की विशेषता है अन्य देशों..समाजों--सभ्यताओं संस्कृतियों से ....
---पश्चिम में तो व्यापारिक सौदा है एवं कुछ धर्मों में पैसे/ मूल्य का पहले से ही निर्धारित सौदा ---
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
शालिनी जी पाकिस्तान एक विखंडित राज्य है .जिसे खुद पे भरोसा नहीं है उस राष्ट्र राज्य पे भारत क्यों भरोसा करे .एक के बदले दो सिर चाहिए हमें भी .आस्तीनों के साँपों से कैसी यारी ?

आपकी मोहन भागवत जी पर पोस्ट हमारी प्रेरणा का सबब बनी .सईस आप थीं .शुक्रिया .आपने हमसे भी लिखवा लिया उस मुद्दे पे जो आज सबकी जुबां पर है .
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
आपकी मोहन भागवत जी पर पोस्ट हमारी प्रेरणा का सबब बनी .सईस आप थीं .शुक्रिया .आपने हमसे भी लिखवा लिया उस मुद्दे पे जो आज सबकी जुबां पर है .

डॉ श्याम गुप्त जी ,प्रतिबद्ध होने से कौन इनकार करेगा .असल मुद्दा है क्या आप आधी आबादी को घर की चारदीवारी में महफूज़ रखियेगा ?आपके पास संशाधन हैं? एक पुरुष पूरे कुनबे का निर्वाह

करे

सबको शिक्षा सेहत मयस्सर करवाए .?क्या आज के सन्दर्भ में यह मुमकिन है
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
शालिनी जी पाकिस्तान एक विखंडित राज्य है .जिसे खुद पे भरोसा नहीं है उस राष्ट्र राज्य पे भारत क्यों भरोसा करे .एक के बदले दो सिर चाहिए हमें भी .आस्तीनों के साँपों से कैसी यारी ?

आपकी मोहन भागवत जी पर पोस्ट हमारी प्रेरणा का सबब बनी .सईस आप थीं .शुक्रिया .आपने हमसे भी लिखवा लिया उस मुद्दे पे जो आज सबकी जुबां पर है .
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
डॉ श्याम गुप्त जी ,प्रतिबद्ध होने से कौन इनकार करेगा .असल मुद्दा है क्या आप आधी आबादी को घर की चारदीवारी में महफूज़ रखियेगा ?आपके पास संशाधन हैं? एक पुरुष पूरे कुनबे का निर्वाह

करे

सबको शिक्षा सेहत मयस्सर करवाए .?क्या आज के सन्दर्भ में यह मुमकिन है .?
DR. ANWER JAMAL ने कहा…
हम आपकी भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन आपका लेख पढ़कर लगा कि आप कन्फ़्यूज़ हैं। एक तरफ़ तो आप औरत के अधिकारों की वकालत करती हैं और दूसरी तरफ़ आप विवाह को संस्कार मानने पर बल देती हैं, जो कि उनसे तलाक़ और पुनर्विवाह का हक़ छीन लेता है। भाई गजधर द्विवेदी भी इसे 7 जन्मों तक चलने वाला संबंध बता रहे है.

हिंदू धर्म में विवाह एक संस्कार है जबकि इसलाम में निकाह एक क़रार है।
क़रार होने के कारण निकाह का संबंध तलाक़ या मौत से टूट जाता है। औरत को अपने पति से अपने हक़ पूरे न होने की शिकायत हो तो वह इसलामी रीति से उससे संबंध तोड़ सकती है और पुनः अपनी पसंद के मर्द से निकाह कर सकती है।
हिंदू विवाह के संस्कार होने के कारण औरत तलाक़ का हक़ नहीं रखती लेकिन उसका पति उसका परित्याग कर सकता है। हिंदू विवाह के संस्कार होने के कारण विधवा नारी पति की मौत के बाद भी उसी की पत्नी रहती है। उसे पुनर्विवाह का अधिकार नहीं है। वैदिक विद्वान इस पर एकमत हैं। जबकि पति अपनी पत्नी के जीते जी भी किसी से विवाह कर सकता है और उसकी मौत के बाद भी।
हिंदू विवाह के संस्कार होने से विधवा नारी के दोबारा विवाह करने पर पाबंदी लाज़िम आयी और शास्त्रों ने बताया कि उसका पति के साथ सती होना उत्तम है या फिर वह सफ़ेद कपड़े पहनकर भूमि पर शयन करे और एक समय बिना नमक-मसाले का भोजन करे और मासिक धर्म के दिनों में एक समय का भोजन भी मना है। विवाह आदि शुभ अवसरों पर वह सामने न पड़े। इस तरह जो औरतें सती होने से बच भी जाती थी तो वे कुपोषण और डिप्रेशन का शिकार होकर तड़प तड़प कर मर जाती थीं। मरने के बाद भी दुदर्शा उनका पीछा नहीं छोड़ती।
पति के मरने के बाद हिंदू संस्कारों का पालन करने वाली विधवा की दुर्दशा को जानने देखिए ये पोस्ट्स-

1. कब होता है विधवा विलाप ?

2. कैसे होता है विधवा विलाप ?

3. ऐसे भी होता है विधवा का अंतिम संस्कार

भारत में इसलाम आया तो औरत के लिए जीने के रास्ते खुले। उसे अपना हक़ अदा न करने वाले पति से छुटकारे के लिए तलाक़ का हक़ मिला। तलाक़शुदा औरतों और विधवाओं को पुनर्विवाह का हक़ मिला।
यह सब इसलाम के प्रभाव से हुआ। जिन हिंदू समाज सुधारकों ने औरतों के लिए इसलाम जैसे अधिकारों की वकालत की। उनका एकमात्र विरोध संस्कृति और संस्कार की रक्षा करने वालों ने ही किया।
आज किसी में हिम्मत नहीं है कि वह औरत के तलाक़ पाने के हक़ का या उसके दोबारा विवाह करने के हक़ का विरोध कर सके।
विवाह बहुत पहले कभी संस्कार हुआ करता था, अब नहीं है। वे दिन गए। अब यह एक क़रार है। कोर्ट में तलाक़ और पुनर्विवाह के लिए आने वाली औरतें इसका सुबूत हैं।
जब औरतें ही विवाह को संस्कार मानने से इन्कार कर दें तो फिर कोई क्या कर सकता है ?
जिन शास्त्रों से आपने हिंदू विवाह को संस्कार बताने संबंधी श्लोक दिए हैं, उन्हीं शास्त्रों में यह बताया गया है कि विधवाओं को कैसे रहना चाहिए ?
क्या विधवाएं आज उस ज़ुल्म को बर्दाश्त करना गवारा करेंगी ?
अगर नहीं तो फिर ज़ुल्म की हिमायत क्यों और किसके लिए जब कोई उसे गवारा करना ही नहीं चाहता।

रही मोहन भागवत जी की बात तो वह अपने कथन में केवल मर्द के अधिकार की बात कर रहे हैं। इसी अधिकार को वह औरत के लिए नहीं मानेंगे कि अगर पति उसका भरण-पोषण न कर पाए या उसकी रक्षा न करे तो वह भी अपने पति को छोड़ सकती है। इसी से पता चलता है कि वह संस्कार ही की बात कर रहे हैं न कि वह हिंदू विवाह को क़रार ठहरा रहे हैं।

आप एक लड़की भी हैं और एक वकील भी। आप औरतों के हित में क्या चीज़ पाती हैं ?
1. क्या औरत विवाह को एक संस्कार मानकर उसकी पाबंदियों को पूरा करे जैसा कि शास्त्रों में बताया गया है ?
या कि
2. औरत उसे संस्कार न माने और पति से निर्वाह न होने पर तलाक़ ले और चाहे तो फिर से विवाह करके अपने जीवन को सुखी बनाए ?
पहली बात हिंदू धर्म की है और दूसरी बात इसलाम की है।
आप क्या मानना चाहेंगी ?,
यह देखने के साथ यह भी देखें कि सारी दुनिया आज क्या मान रही है ?

क्या यह हक़ीक़त नहीं है कि इसलाम आ चुका है आपके जीवन में धीरे से ?
See this post on my blog "Vedquran"
http://vedquran.blogspot.in/2013/01/blog-post.html

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