बुधवार, 19 जून 2013

यू.पी.की डबल ग्रुप बिजली

Birds On The Wire Stock Photo - 1293150Birds On The Wire Stock Photography - 1293152 
लगे हुए थे एक माह से ,हिन्दू मुस्लिम भाई ,
थम गया था जीवन सारा ,चौपट हुई कमाई .


मना रहे थे अफसरों को ,देकर दूध मलाई ,
नेताओं ने भी आकर ,पीठ थी थपथपाई .


बिलबिलाते गर्मी से ,छत पर खाट जमाई,
पंखा झलते-झलते रहते ,नींद न फिर भी आई .


धरने करते नारे गाते ,बिछा के जब चटाई,
सीधी बातों से न माने ,तब की खूब पिटाई .


लातों के इन भूतों के ,तब बात समझ में आई ,
बिजली आने की परमिशन ,ऊपर से दिलवाई .


बजे नगाड़े ढोल तमाशे ,सबने खाई मिठाई ,
गले मिले और हाथ मिलकर ,दी गयी खूब बधाई .


डबल ग्रुप से ऐसी बिजली,देख के शामत आई ,
न चमकी दिन में आकर,न रात को पड़ी दिखाई .


                 शालिनी कौशिक 
                          [कौशल]

6 टिप्‍पणियां:

Bhola-Krishna ने कहा…

शालिनी बेटा! ये 'डबल ग्रुप' क्या है ? यहाँ भारत के प्रादेशिक समाचार नहीं मिलते ! वैसे हम झेल चुके हैं १९९३ तक कामपुर की ऎसी गरमी !
हम तो पांचो बच्चों के साथ आंगन में चटाई बिछा कर बैठ जाते थे और "पवन पूत हनुमान" का आवाहन करते थे और ठंडी हवा चंलने लगती थी ! हमने अपनी रचना
"अंजनी सूत हे पवन दुलारे ,
हनुमत लाल राम के प्यारे"
ऐसे ही माहौल में बनाई थी !-
यू ट्यूब के 'भोला कृष्णा चेनेल' में सुन सकती हैं - अंकल आंटी [भोला-कृष्णा [

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहसपति (20-06-2013) को बारिश का कहर ( चर्चा - 1281 ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सटीक !!

Ankur Jain ने कहा…

बेहद सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति.....

shikha kaushik ने कहा…

interesting and real expression of life .thanks

premkephool.blogspot.com ने कहा…

बेहद सुंदर