शुक्रवार, 21 जून 2013

कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

orange rosesbouquet of spring roses 1


   न बदल पायेगा तकदीर तेरी कोई और ,
      तेरे हाथों में ही बसती है तेरी किस्मत की डोर ,
   अगर चाहेगा तो पहुंचेगा तू बुलंदी पर 
      तेरे जीवन में भी आएगा तरक्की का एक दौर .


तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने ,
    दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी .
 जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत ,
      कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .


तकदीर बनाने के लिए सुनले मेहरबां,
     दिल में जीतने का हमें जज्बा चाहिए .
छूनी है अगर आगे बढ़के तुझको बुलंदी 
      क़दमों में तेरे जोश और उल्लास चाहिए .



मायूस होके रुकने से कुछ होगा न हासिल ,
    उम्मीद के चिराग दिल में जलने चाहियें .
चूमेगी कामयाबी आके माथे को तेरे 
     बस इंतजार करने का कुछ सब्र चाहिए .


क्या देखता है बार-बार हाथों को तू अपने ,
   रेखाओं में नहीं बसती है तकदीर किसी की .
गर करनी है हासिल तुझे जीवन में बुलंदी 
   मज़बूत इरादों को बना पथ का तू साथी .

             शालिनी कौशिक 

                    [कौशल]

6 टिप्‍पणियां:

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

क्या देखता है बार-बार हाथों को तू अपने ,
रेखाओं में नहीं बसती है तकदीर किसी की .
गर करनी है हासिल तुझे जीवन में बुलंदी
मज़बूत इरादों को बना पथ का तू साथी .

बहुत सुन्दर रचना पहले मजबूत इरादा बढ़िया सोच फिर बढ़िया कर्म और उसकी छाया सा ही बढ़िया नतीजा .ॐ शान्ति .

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत खुबसूरत और प्रेरणा दायक रचना
latest post परिणय की ४0 वीं वर्षगाँठ !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वाह, बहुत खूब..

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत शानदार | जय हो

Archu Mishra ने कहा…

bahut khoob shalini ji

Darshan Jangara ने कहा…

बहुत खूब..