बुधवार, 7 अगस्त 2013

अखिलेश स्वयं के प्रति ही विरोधाभासी -आश्चर्य

अखिलेश स्वयं के प्रति ही विरोधाभासी -आश्चर्य

जब से यू पी ए सरकार ने आंध्र से तेलंगाना को अलग करने का फैसला किया है तबसे न केवल अन्य दलों में बल्कि खुद यू पी ए के प्रमुख घटक दल कांग्रेस में भी सियासी भूचाल सा आ गया है। आज बहुत से राज्य बँटने की कगार पर खड़े हैं और इनमे प्रमुख राज्य है ''उत्तर प्रदेश ''सर्वाधिक लोकसभा सीट  रखने वाले उत्तर प्रदेश का भारतीय राजनीति में अपना ही दबदबा है। एक बरगी तो देश की सत्ता रहती ही यू पी वालों के हाथों में है फिर भला इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कैसे चुप रहते वे भी इस मुद्दे पर बोले और खूब बोले किन्तु स्वयं ही स्वयं के प्रति विरोधाभासी ,यह आश्चर्य की बात रही।
  अखिलेश यादव कहते हैं कि ''देश बाँटने की साजिश है राज्यों का बंटवारा ''तो क्या वे यह कटा क्ष हमारे संविधान पर नहीं कर रहे हैं ? जिसमें  नए राज्यों के निर्माण के  लिए संविधान के अनुच्छेद ३ में आरम्भ से ही व्यवस्था की गयी है।  अनुच्छेद ३ संसद को नए राज्यों के निर्माण के लिए एवं वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों व् सीमाओं या नामों के बदलने की शक्ति देता है .हमारा संविधान संघात्मक है किन्तु इसके साथ साथ एकात्मक भी .आइवर जनिंग्स ने कहा है -''a faderation with strong centralising tendency .''अर्थात एक ऐसा संघ जिसमे केन्द्रीयकरण की सशक्त प्रवर्ति है ऐसे में ये कहना कि नए राज्यों का निर्माण देश बाँटने की साजिश है स्वीकार करने योग्य कथन नहीं है क्योंकि बरसों गुलामी के बाद हमारे देश को पुनर्स्थापना हेतु सकारात्मक कदम एकदम नहीं उठाये जा सकते थे  .वे कदम उठाने के लिए हमारे देश का विकास की ओर अग्रसर होना आवश्यक था ,मुख्यमंत्री यूरोप आदि का जिक्र करते हैं किन्तु यह जिक्र यहाँ विचारणीय नहीं माना जा सकता क्योंकि वे हमसे सभी परिस्थितयों में पृथक हैं और उन्होंने वह गुलामी का दंश नहीं झेला है जो हमने झेला है .हम आज अपने मेहनतों से तरक्की की ओर बढ़ रहे हैं और ऐसे में हम धीरे धीरे ही वे कदम उठा सकते हैं जिनसे हम देश की तरक्की में चार चाँद लगा सकते हैं .
  छोटे राज्य को हमें छोटे परिवार की तरह ही मानना होगा .जिस तरह छोटे परिवार की ज़रूरतों को समझना व् उन्हें पूरी करना आसान होता है उसी तरह छोटे राज्य में भी आवश्यकताओं की पूर्ति ,कुशल प्रशासन ,अपराधों पर नियंत्रण आसानी से लगाया जा सकता है .
वे कहते हैं कि बेहतर शिक्षा से ही हर चुनौती का सामना किया जा सकता है फिर भला वे  राज्य में बाँटने को साजिश कैसे कह सकते हैं ?उन्हें तो पता ही होगा कि आज परिवार नियोजन के प्रचार प्रसार का एक प्रमुख कारण अधिकाधिक बच्चों को शिक्षा की उपलब्धता से है और यह उपलब्धता छोटे परिवार में ही संभव है .आज बड़ा राज्य होने  के कारण ही पश्चिमी यू पी वाले  न्याय से विमुख हैं .सर्वाधिक राजस्व देकर भी पश्चिमी यूपी वाले बिजली पानी को तरस रहे हैं .अपराध में यू पी विश्व में नाम कमा रहा है ,ये सब क्यूं इसलिए तो कि ये राज्य बड़ा है और सब तरफ लखनऊ बैठकर ध्यान नहीं दिया जा सकता .
   यू पी में लैपटॉप बांटे जा रहे हैं ऑनलाइन परीक्षा  फार्म भरे जा रहे हैं किन्तु बुनियादी रूप से उनकी सही शिक्षा की व्यवस्था नही है जिसके लिए राज्य का बंटना वैसे ही ज़रूरी  है  जैसे छोटा परिवार सुखी परिवार कथन का सत्य होना क्योंकि छोटे राज्य होने पर संसाधनों की अनुपलब्धता का रोना नहीं रोया जा सकता ,प्रशासन की अकुशलता नज़रों से छिपी नहीं रह सकती ,लोगों को न्याय पाने के  लिए अपने घरों को चोरों के लिए खाली नहीं छोड़ना पड़ता और ऐसे में सरकार के प्रति विश्वसनीयता भी बढती है .
      हाँ इतना नुकसान अवश्य है कि छोटा राज्य होने पर उसकी लोकसभा सीट कम हो सकती हैं और सत्ताधारी दल का कुछ दबदबा भी कम हो सकता है इसलिए ऐसे में सत्ताधारी दल ऐसे निरर्थक विरोधाभासी कथन ही करेगा .
          शालिनी कौशिक
                     [कौशल ]

3 टिप्‍पणियां:

ajay yadav ने कहा…

सहमत हूँ |

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

विकास के लिए छोटे राज्यों का बनना जरूरी है ,,,

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प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश के लिये एक ही नीति हो, सबको अपने क्षेत्र विकसित करने की तीव्र उत्कण्ठा है।