गुरुवार, 29 अगस्त 2013

माफ़ न करना अपनी माँ को ,आना गर्भ में कभी नहीं .


Mother_and_daughter : mother and baby hands at homeMother_and_daughter : Mother and baby Stock PhotoMother_and_daughter : Sketch of little girl having fun with her beautiful mother. Vector illustration Stock Photo

बेटी मेरी तेरी दुश्मन ,तेरी माँ है कभी नहीं ,
तुझको खो दूँ ऐसी इच्छा ,मेरी न है कभी नहीं .
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नौ महीने कोख में रखा ,सपने देखे रोज़ नए ,
तुझको लेकर मेरे मन में ,भेद नहीं है कभी नहीं .
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माँ बनने पर पूर्ण शख्सियत ,होती है हर नारी की ,
बेटे या बेटी को लेकर ,पैदा प्रश्न है कभी नहीं .
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माँ के मन की कोमलता ही ,बेटी से उसको जोड़े ,
नन्ही-नन्ही अठखेली से ,मुहं मोड़ा है कभी नहीं .
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सबकी नफरत झेल के बेटी ,लड़ने को तैयार हूँ,
पर सब खो देने का साहस ,मुझमे न है कभी नहीं .
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कुल का दीप जलाने को ,बेटा ही सबकी चाहत ,
बड़े-बुज़ुर्गों  की आँखों का ,तू तारा है कभी नहीं .
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बेटे का ब्याह रचाने को ,बहु चाहिए सबको ही ,
बेटी होने पर ब्याहने का ,इनमे साहस है कभी नहीं .
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अपने जीवन ,घर की खातिर ,पाप कर रही आज यही ,
माफ़ न करना अपनी माँ को ,आना गर्भ में कभी नहीं .
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रो-रोकर माँ कहे ''शालिनी ''वसुंधरा भी सदा दुखी ,
बेटी के आंसू बहने से ,माँ रोक सकी है कभी नहीं .
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     शालिनी कौशिक 
            [कौशल ]

18 टिप्‍पणियां:

shikha kaushik ने कहा…

bahut sahi likha hai aapne .aabhar

अजय कुमार झा ने कहा…

आज के हालातों में बेटी का दर्द उडेलती हुई बेहतरीन पंक्तियां शिखा जी । सच में आज विकट परिस्थितियां हो गई हैं

शकुन्‍तला शर्मा ने कहा…

" धन पराया हूँ फिर भी मैं ही तो वल्लरी वंश की बढाती हूँ । जन्म लेने दो मुझको मत मारो कल के वैभव की नई थाती हूँ ।मैं हूँ नारी मैं मॉ हूँ बेटी हूँ प्रेम शावक को मैं ही सेती हूँ । मेरी ऑखों में प्रेम पलता है पीर लेती हूँ सुख मैं देती हूँ ।" सुंदर रचना बधाई ।

रविकर ने कहा…

बढ़िया -
सटीक प्रस्तुति
शुभकामनायें आदरणीया -

माफ़ी माता से मिले, पर माता का कृत्य |
माफ़ी के लायक नहीं, करती नंगा नृत्य |
करती नंगा नृत्य, भ्रूण में खुद को मारे |
दे दुष्टों का साथ, हमेशा बिना विचारे |
नरक वास हित मान, पाप तेरा यह काफी |
खोती खुद सम्मान, मिले किस्से अब माफ़ी ??

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सुन्दर रचना !!

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

nice.

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
कभी यहाँ भी पधारें
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/

shorya Malik ने कहा…

वाह , किया बात है, बेहद सुंदर , बेहद मर्मस्पर्शी

Devdutta Prasoon ने कहा…

कृष्ण-जन्माष्टमी की कोटि कोटि वधाइयां !
नारी वंश नाश पर बहुत सटीक और गंभीर प्रतिक्रया ,सराहनीय !!

Devdutta Prasoon ने कहा…

बहुत ही सम्वेदना पूर्ण नारी व्न्श्ह्रास पर बात है !

Devdutta Prasoon ने कहा…

बहुत ही संवेदना पूर्ण नारी ह्रास पर सटीक बात !

Devdutta Prasoon ने कहा…

बहुत ही स्म्वादाना पूर्ण नारी वंश-नाश पर सटीक बात !!

ARUN SATHI ने कहा…

मार्मिक पर यथार्थ

ARUN SATHI ने कहा…

मार्मिक पर यथार्थ

Lalit Chahar ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
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हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} (01-09-2013) को हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |
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सादर ....ललित चाहार

babanpandey ने कहा…

सुन्दर रचना !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

यथार्थ ओर तीखापन लिए ... पर सत्य ...

.............तभी कम्बख्त ससुराली ,

थी कातिल में कहाँ हिम्मत  ,मुझे वो क़त्ल कर देता  ,         अगर  मैं  अपने  हाथों  से  ,न  खंजर  उसको  दे  देता  . .....................