कॉंग्रेस का नहीं सही का समर्थन तो करो .

कॉंग्रेस का नहीं सही का समर्थन तो करो .
एक कहावत है शायद सभी ने सुनी होगी -
''देर आयद दुरुस्त आयद ''
और चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के मामले में कॉंग्रेस द्वारा इस पर रोक लगाये जाने का प्रस्ताव रखना एक ऐसा ही काम है किन्तु हमारे यहाँ एक परिपाटी बन गयी है कि जिसका विरोध करना है उसका विरोध ही करना है भले ही वह सही बात पर भी हो किन्तु देखा जाये तो ये एक गलत परंपरा है क्योंकि यदि हम सभी इन सर्वेक्षणों की गहराई में जाएँ तो ये आम भारतीय जनता का सही व् पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करते जिसके लिए आज हम सभी लड़ रहे हैं .हम सभी चाहते हैं कि सत्ता में वह दल हो जिसे हमारा पूर्ण समर्थन हो किन्तु अपने इस मत के लिए हम आज सही बात पर बोलने वाली कॉंग्रेस को ये कहकर कि उसे अपनी हार का डर है इसलिए वह इन पर रोक लगाने की बात कर रही है जबकि ये कहकर हम स्वयं सत्य से मुंह मोड़ रहे हैं .हम सभी जानते हैं कि इन सर्वेक्षणों में सम्बंधित क्षेत्र के पूरे/आधे तो क्या चौथाई प्रतिनिधियों का मत भी सम्मिलित नहीं होता .यदि इसमें चुनाव में बहती हवा का २५% भी शामिल हो तो इस पर विचार किया जा सकता है किन्तु ये भी तब जब भारत की जनता पूर्ण साक्षर हो .एक ऐसे देश में जहाँ जनता में अशिक्षा का अंधकार फैला है वहाँ इस तरह के सर्वेक्षण,मात्र १ या २ प्रतिशत का मत लिए जाने का सर्वेक्षण इतने जोर-शोर से प्रचारित किये जाते हैं जिससे समस्त वोटरों पर एक ऐसा हौव्वा बैठता है कि वे उसी तरह जैसे ''आसमान गिर रहा है ,आसमान गिर रहा है ''कहानी में लोग फंस गए थे ,फंस जाते हैं और ''पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर क्यूँ करे ''सोचकर झूठी जीतने वाली पार्टी को वोट देने चल देते हैं .अगर अगर ऐसी जीत की चाह रखने वाले दलों का हम समर्थन करते हैं तो हम क्या हुए ?क्या हम सच्चाई का समर्थन करने वाले हुए ?मैं नहीं कहती कि कॉंग्रेस का समर्थन करो या भाजपा का किन्तु अपने दिमाग का समर्थन तो करो जो ये कहता है कि इस वक्त कॉंग्रेस सही कह रही है भले ही अपने भविष्य़ के मद्देनज़र कह रही हो या देश के भविष्य़ के मद्देनज़र और कहा भी गया है कि
'' सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते ''
फिर हम क्यूँ ये भूल कर रहे हैं कॉंग्रेस सही कह रही है ये मानने से हम उसका नहीं बल्कि देश में सही कदम का समर्थन कर सकते हैं और अन्य दलों के साथ ही सपा का समर्थन भी यही साबित करता है .
More parties support ban on opinion polls
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

टिप्पणियाँ

Ramakant Singh ने कहा…
सच जिसे माने
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण की विश्वसनीयता सदा सवालों के घेरे में रहती है
विचारणीय विषय ,,,,,,

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