शनिवार, 3 अक्तूबर 2015

बैंकों व् डाकघरों को कबाड़घर बनाया इंटरनेट ने


बैंक और डाकघर भारतीय नागरिक के लिए आज एक आवश्यकता बन चुके हैं और भारतीय सरकार ने इनके सञ्चालन में पूरी ईमानदारी बरतते हुए अपनी जिम्मेदारी को निभाया है .आइये पहले नज़र डालें भारत में अब तक की बैंकिंग व् डाकघरों की व्यवस्था पर संक्षेप में -


भारत में बैंकिंग

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भारत की बैंकिंग-संरचना
भारत में आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का इतिहास दो सौ वर्ष पुराना है।
भारत के आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत ब्रिटिश राज में में हुई। १९वीं शताब्दी के आरंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ३ बैंकों की शुरुआत की - बैंक आफ बंगाल १८०९ में,बैंक ओफ़ बॉम्बे १८४० में और बैंक ओफ़ मद्रास १८४३ में। लेकिन बाद में इन तीनों बैंको का विलय एक नये बैंक 'इंपीरियल बैंक' में कर दिया गया जिसे सन १९५५ में 'भारतीय स्टेट बैंक' में विलय कर दिया गया। इलाहबाद बैंक भारत का पहला निजी बैंक था।भारतीय रिजर्व बैंक सन १९३५ में स्थापित किया गया था और बाद में पंजाब नेशनल बैंकबैंक ऑफ़ इंडियाकेनरा बैंक और इंडियन बैंक स्थापित हुए।
प्रारम्भ में बैंकों की शाखायें और उनका कारोबार वाणिज्यिक केन्द्रों तक ही सीमित होती थी। बैंक अपनी सेवायें केवल वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को ही उपलब्ध कराते थे। स्वतन्त्रता से पूर्व देश के केन्द्रीय बैंक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक ही सक्रिय था। जबकि सबसे प्रमुख बैंक इम्पीरियल बैंक आफ इण्डिया था। उस समय भारत में तीन तरह के बैंक कार्यरत थे - भारतीय अनुसूचित बैंक, गैर अनुसूचित बैंक और विदेशी अनुसूचित बैंक।
स्वतन्त्रता के उपरान्त भारतीय रिजर्व बैंक को केन्द्रीय बैंक का दर्जा बरकरार रखा गया। उसे बैंकों का बैंक भी घोषित किया गया। सभी प्रकार की मौद्रिक नीतियों को तय करने और उसे अन्य बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा लागू कराने का दायित्व भी उसे सौंपा गया। इस कार्य में भारतीय रिजर्व बैंक की नियंत्रण तथा नियमन शक्तियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
ये तो रही है आज तक की बैंकिंग व्यस्था, पर आज इंटरनेट का युग है और अब हो रही है शुरुआत इंटरनेट बैंकिंग की जिसका विवरण संक्षेप में इस प्रकार है -
ऑनलाइन बैंकिंग

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चित्र:Internet Banking no name.JPG
सुरक्षा टोकन उपकरण
नेट बैंकिग जिसे ऑनलाइन बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग भी कहते हैं, के माध्यम से बैंक-ग्राहक अपने कंप्यूटरद्वारा अपने बैंक नेटवर्क और वेबसाइट का प्रचालन कर सकते है। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ है कि कोई भी व्यक्ति घर या कार्यालय या कहीं से भी से बैंक सुविधा का लाभ उठा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवर्क्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही खरीददारी, पैसे का स्थानांतरण के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है।[1] भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किये गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार अप्रैल २००८ से जनवरी २००९ तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ५५.८५८५ करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया।[2]किन्तु इस लाभ पर प्रश्वनिह्न भी लग जाता है, जब आजकल फिशिंग द्वारा तकनीक के दुरुपयोग से इंटरनेट के जालसाज लोगों के खातों को हैक कर उन्हें हानि पहुंचा रहे हैं।[3] ऐसे में आवश्यक है कि नेट बैंकिंग के प्रयोग में अत्यंत सावधानियां बरती जाएं। नेट बैंकिंग का प्रयोग करते हुए उपयोक्ता को यूआरएल की जांच कर लेनी चाहिये। कई रिपोर्ट द्वारा ये पुष्टि होती है, कि प्रयोग की जाने वाली ५० प्रतिशत वेबसाइट असुरक्षित होती हैं। ऐसे में नेट सर्फिंग करने वाले व्यक्ति के लिये से यह अत्यंत आवश्यक है कि वह पूरी जाँच के उपरांत ही वेबसाइट खोले। किसी भी साइट के यूआरएल पते और डोमेन जांच करें और देखें कि यह उसी बैंक के यूआरएल और डोमेन की तरह हो, ऐसे में यह संभावना काफी हद तक प्रबल हो जाती है कि उपयोक्ता सुरक्षित वेबसाइट का प्रयोग कर रहे हैं। नेट बैंकिंग सेवा का प्रयोग करने वालों को इसे प्रत्येक तीन दिनों में जांचते रहना चाहिये।
ऑनलाइन बैंकिंग में क्रेडिट कार्ड का भी प्रयोग किया जा सकता है
इसके साथ ही उपयोक्ता को चाहिये कि वे इस सेवा का बाहर प्रयोग न करें। नेट बैंकिंग के लिए इंटरनेट कैफे और सांझे कंप्यूटर का प्रयोग इस सुविधा हेतु कम करें और यदि कैफे या सांझे कंप्यूटर से प्रयोग करते भी हैं, तो अपना पासवर्ड नियमित रूप से बदलते रहें। यह सुरक्षित तरीका रहेगा। उपयोक्ता अपने कंप्यूटर सिस्टम को सीधे बंद न करें।[3] प्रायः लोग ब्राउजर बंद कर कंप्यूटर सीधे बंद कर देते हैं जो असुरक्षित हो सकता है। हमेशा कंप्यूटर सिस्टम ठीक से लॉग ऑफ करें।[1] इसके अलावा अपने पासवर्ड का पूरा एवं उचित व सुरक्षित उपयोग करें। अपने पासवर्ड को किसी कागज पर न लिखें। इसे सरलता से हैक किया जा सकता है। अपनी मशीन में पावर ऑन पासवर्ड डाल दें ताकि उनके अलावा कोई और उनकी मशीन न खोल सके। सिस्टम पर स्क्रीनसेवर पासवर्ड डाल दें ताकि कोई और सिस्टम का प्रयोग न कर सके। इन कुछ बातों का ध्यान रखकर नेट बैंकिंग सुविधा का पूरा एवं सुरक्षित लाभ उठाया जा सकता है।
अब करते हैं बात डाकघरों की ,जो आम आदमी से उनके घर की ही तरह जुड़े हैं और इनसे जुड़ते हुए आदमी को यह संकोच नहीं होता कि वह कहीं गैर बिरादरी में जुड़ रहा है .अपने घर का सा वातावरण मिलता है डाकघर से और यही वजह है इस व्यवस्था की सफलता की .आइये जाने एक बार इस व्यवस्था के बारे में -

भारतीय डाक

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भारतीय डाक सेवा का पोस्ट बॉक्स
भारतीय डाक सेवा (अंग्रेज़ीIndia Postभारत सरकार द्वारा संचालित डाकसेवा है जो ब्रांड नाम के तौर पर इंडिया पोस्ट या भारतीय डाक के नाम से काम करती है।

सैकड़ों साल से जारी सफर[संपादित करें]

भारतीय डाक प्रणाली का जो उन्नत और परिष्कृत स्वरूप आज हमारे सामने है, वह हजारों सालों के लंबे सफर की देन है। अंग्रेजों ने डेढ़ सौ साल पहले अलग-अलग हिस्सों में अपने तरीके से चल रही डाक व्यवस्था को एक सूत्र में पिरोने की जो पहल की, उसने भारतीय डाक को एक नया रूप और रंग दिया। पर अंग्रेजों की डाक प्रणाली उनके सामरिक और व्यापारिक हितों पर केंद्रित थी। भारत की आजादी के बाद हमारी डाक प्रणाली को आम आदमी की जरूरतों को केंद्र में रख कर विकसित करने का नया दौर शुरू हुआ। नियोजित विकास प्रक्रिया ने ही भारतीय डाक को दुनिया की सबसे बड़ी और बेहतरीन डाक प्रणाली बनाया है। राष्ट्र निर्माण में भी डाक विभाग ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और इसकी उपयोगिता लगातार बनी हुई है। आम आदमी डाकघरों और पोस्टमैन पर अगाध भरोसा करता है। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद इतना जन विश्वास कोई और संस्था नहीं अर्जित कर सकी है। यह स्थिति कुछ सालों में नहीं बनी है। इसके पीछे बरसों का श्रम और सेवा छिपी है।

और अब इसे भी जोड़ा गया है इंटरनेट से ,जो स्थिति ये है -

ePayment

ePayment
e-Payment is a smart option for businesses and organizations to collect their bills or other payments through Post Office network. When businesses require collection of bills and other payments from customers across the country, Post Office offers them a simple and convenient solution in the form of e-Payment.
e-Payment is a many-to-one solution which allows collection of money (telephone bills, electricity bills, examination fee, taxes, university fee, school fee etc.) on behalf of any organization. The collection is consolidated electronically using web based software and payment is made centrally through cheque from a specifed Post Office of biller's choice.
The information and MIS regarding the payment can be had by the biller online. The MIS will contain the five fields of biller's choice like name, telephone number, application number etc. The service is currently available through more than 14,000 Post Offices across the country.
There is no agency in the market today with a large reach and established trust as the Post Office where the public can comfortably deposit all their bills in their neighbourhood.
और इससे क्या स्थिति बनी जरा वह भी देखी जाये -

ePOST: Bridging the Digital Divide

In the recent past, Internet and e-mail have revolutionized the world of communications. At the same time, accessibility to email continuous to be a major problem for many people, especially in the rural areas. In its endeavor to make the benefits of e-mail available to everyone and to bridge the digital divide, Department of Posts has introduced ePOST service.
Through ePOST, customers can send their messages to any address in India with a combination of electronic transmission and physical delivery through a network of more than 1,55,000 Post Offices. ePOST sends messages as a soft copy through internet and at the destination it will be delivered to the addressee in the form of hard copy. ePOST costs just Rs. 10 per page of A4 size.
ePOST can also be availed by the corporate customers, by having a business agreement with India Post. Corporate customers will get special ePOST rates and other value additions.
For Business Contact-
B D & M Directorate,Department of Posts, MOC & IT, New Delhi - 110001
Ph. 91-11-23096148,23096152, e-mail: epost[at]indiapost[dot]gov[dot]in

     और जनकल्याण हेतु की गयी ये व्यवस्था आज जन-जन की परेशानी का कारण बन चुकी है .घंटो घंटो बैंकों और डाकघरों में लोग लाइन बनकर खड़े रहते हैं और देरी का कारण पूछे जाने पर पता चलता है कि सर्वर धीरे काम कर रहा है चलिए काम तो कर रहा है ये सोच लोग कभी पसीना पोछ तो आपस में बातचीत कर हंसी मजाक कर समय काट लेते हैं किन्तु जब पता चलता है कि सर्वर काम ही नहीं कर रहा है तो उनकी समझ में ये नहीं आता कि अब क्या करें क्योंकि अपना सारा वक्त और कामों से निकालकर वे वहां पहुँचते हैं और उनके मन में ये ही आता है कि कर्मचारी काम से बचने के लिए ये झूठ बोल रहा है जबकि वास्तव में कर्मचारी की भी कोई गलती नहीं होती लेकिन ये निश्चित है कि एक दिन ये सर्वर कर्मचारियों को पिटवाएगा और बैंको व् डाकघरों में हड़ताल करवाएगा .बैंक के कर्मचारी तो फिर भी पीटने से बच जायेंगे क्योंकि उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई है बेचारे डाककर्मियों का क्या होगा भविष्य पर ही निर्भर है .अभी निश्चित रूप में कहा जा सकता है कि भारत में अभी इंटरनेट बैंकिंग व् पोस्ट सर्विस के लिए उपयुक्त परिस्थितियां नहीं हैं .सरकार को इंटरनेट सर्विस की अनुपलब्धता की स्थिति में हाथों से काम करने की आदेश जारी करने होंगे नहीं तो स्थितियां बिगड़ते देर नहीं लगेगी .
शालिनी कौशिक 
 [कौशल ]


2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (05-10-2015) को "ममता के बदलते अर्थ" (चर्चा अंक-2119) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Madan Mohan Saxena ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको . कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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