शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2015

इंदिरा गांधी :भारत का वास्तविक शक्तिपुंज और ध्रुवतारा


Image result for indira gandhi free imagesImage result for indira gandhi free images

जब ये शीर्षक मेरे मन में आया तो मन का एक कोना जो सम्पूर्ण विश्व में पुरुष सत्ता के अस्तित्व को महसूस करता है कह उठा कि यह उक्ति  तो किसी पुरुष विभूति को ही प्राप्त हो सकती है  किन्तु तभी आँखों के समक्ष प्रस्तुत हुआ वह व्यक्तित्व जिसने समस्त  विश्व में पुरुष वर्चस्व को अपनी दूरदर्शिता व् सूक्ष्म सूझ बूझ से चुनौती दे सिर झुकाने को विवश किया है .वंश बेल को बढ़ाने ,कुल का नाम रोशन करने आदि न जाने कितने ही अरमानों को पूरा करने के लिए पुत्र की ही कामना की जाती है किन्तु इंदिरा जी ऐसी पुत्री साबित हुई जिनसे न केवल एक परिवार बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र गौरवान्वित अनुभव करता है  और  इसी कारण मेरा मन उन्हें ध्रुवतारा की उपाधि से नवाज़ने का हो गया और मैंने इस पोस्ट का ये शीर्षक बना दिया क्योंकि जैसे संसार के आकाश पर ध्रुवतारा सदा चमकता रहेगा वैसे ही इंदिरा प्रियदर्शिनी  ऐसा  ध्रुवतारा थी जिनकी यशोगाथा से हमारा भारतीय आकाश सदैव दैदीप्यमान  रहेगा।
१९ नवम्बर १९१७ को इलाहाबाद के आनंद भवन में जन्म लेने वाली इंदिरा जी के लिए श्रीमती सरोजनी नायडू जी ने एक तार भेजकर कहा था -''वह भारत की नई आत्मा है .''
गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर ने उनकी शिक्षा प्राप्ति के पश्चात् शांति निकेतन से विदाई के समय नेहरु जी को पत्र में लिखा था -''हमने भारी मन से इंदिरा को  विदा  किया है .वह इस स्थान की शोभा थी  .मैंने उसे निकट से देखा है  और आपने जिस प्रकार उसका लालन पालन किया है उसकी प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जा सकता .''   सन १९६२ में चीन ने विश्वासघात करके भारत  पर आक्रमण किया था तब देश  के कर्णधारों की स्वर्णदान की पुकार पर वह प्रथम भारतीय महिला थी जिन्होंने अपने समस्त पैतृक  आभूषणों को देश की बलिवेदी पर चढ़ा दिया था इन आभूषणों में न जाने कितनी ही जीवन की मधुरिम स्मृतियाँ  जुडी हुई थी और इन्हें संजोये इंदिरा जी कभी कभी प्रसन्न हो उठती थी .पाकिस्तान युद्ध के समय भी वे सैनिकों के उत्साहवर्धन हेतु युद्ध के अंतिम मोर्चों तक निर्भीक होकर गयी .
आज देश अग्नि -५ के संरक्षण  में अपने को सुरक्षित महसूस कर रहा है इसकी नीव में भी इंदिरा जी की भूमिका को हम सच्चे भारतीय ही महसूस कर सकते हैं .भूतपूर्व राष्ट्रपति और भारत में मिसाइल कार्यक्रम  के जनक डॉ.ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम ने बताया था  -''१९८३ में केबिनेट ने ४०० करोड़ की लगत वाला एकीकृत मिसाइल कार्यक्रम स्वीकृत किया .इसके बाद १९८४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी डी.आर.डी एल .लैब  हैदराबाद में आई .हम उन्हें प्रैजन्टेशन दे रहे थे.सामने विश्व का मैप टंगा था .इंदिरा जी ने बीच में प्रेजेंटेशन रोक दिया और कहा -''कलाम !पूरब की तरफ का यह स्थान देखो .उन्होंने एक जगह पर हाथ रखा ,यहाँ तक पहुँचने वाली मिसाइल कब बना सकते हैं ?"जिस स्थान पर उन्होंने हाथ रखा था वह भारतीय सीमा से ५००० किलोमीटर दूर था .
इस तरह की इंदिरा जी की देश प्रेम से ओत-प्रोत घटनाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है और हम आज देश की सरजमीं पर उनके प्रयत्नों से किये गए सुधारों को स्वयं अनुभव करते है,उनके खून की एक एक बूँद हमारे देश को नित नई ऊँचाइयों पर पहुंचा रही है और आगे भी पहुंचाती रहेगी.
इंदिरा जी ने देशहित में बहुत से ऐसे फैसले लिए जो स्वयं उनके लिए घातक रहे किन्तु देश हित में कोई भी बड़ा फैसला लेने से वे कभी भी नहीं हिचकिचाई। आज  एक संगठन  देशहित के नाम पर कभी गृहस्थ जीवन से दूर रहने की सलाह देता  तो कभी दस दस बच्चे पैदा करने की किन्तु इंदिरा जी ने गृहस्थ धर्म से भी  नाता  नहीं तोडा और राष्ट्रधर्म का भी बखूबी पालन किया जिसका पहला परिणाम तो उन्हें अपने ही सुरक्षाकर्मी के हाथों जान गंवाकर चुकाना पड़ा और दूसरा परिणाम उसी संगठन के हाथों और उन्हें न जानने वालों द्वारा अनर्गल प्रलाप द्वारा आज देश को उनके जैसे व्यक्तित्व की ही आवश्यकता है और इस बात को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बखूबी जानते हैं और इसीलिए वे अपनी कार्यशैली में इंदिरा जी का ही अनुसरण करने का अथक प्रयास कर रहे हैं।
हम सब  जानते हैं कि इस दुनिया में जो आया है वह एक दिन अवश्य जायेगा और हम कितने ही प्रयास करलें उसे वापस नहीं ला सकते किन्तु हम उसके कार्यों का उसकी शिक्षाओं का अनुसरण कर उसे अपने साथ जीवित रख सकते हैं और यही प्रयास हमें इंदिरा जी के कार्यों  याद कर व् उनका अनुसरण कर करना चाहिए। यही हमारी इंदिरा जी को उनकी पुण्यतिथि पर सच्ची श्रद्धांजलि होगी जो कि हमें देनी भी चाहिए क्योंकि ये एक शाश्वत सत्य है कि इंदिरा जैसे शक्ति का दोबारा जन्म इस भारतभूमि पर तब तक नामुमकिन है जब तक ऊपर से इंदिरा को निंदनीय बताने वाले और अंदर से उससे भयभीत रहने वाले सत्ता में आसीन हैं क्योंकि कोई भी श्रेष्ठ आत्मा सम्मान चाहती है स्वयं के लिए भय या दिखावा नहीं।
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (31-10-2015) को "चाँद का तिलिस्म" (चर्चा अंक-2146) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat ने कहा…

निसंदेह इंदिरा जी भारत का वास्तविक शक्तिपुंज और ध्रुवतारा है ..,,
इंदिरा जी को नमन...
सार्थक सामयिक प्रस्तुति हेतु आपका आभार!

कानून पर कामुकता हावी

१६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आंदोल...