ज़रा आये ठहरे चले फिर गए, हमारे दिलों में जगह कर गए. न कह पाए मन की न सुन पाए उनकी , बस देखते आना जाना रह गए. बिछाए हुए थे उनकी राहों में पलकें, नयन भी हमारे खुले रह गए. न रुकना था उनको नहीं था ठहरना , फिर आयेंगे कहकर चले वो गए. न मिलने की चाहत न रुकने की हसरत, फिर आने का वादा क्यों कर गए. हमें लौट कर फिर जीना था वैसे , वो जैसे भंवर में फंसा कर गए. शालिनी कौशिक
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