मंगलवार, 9 नवंबर 2010

prasannta

वो एक हंसी पल जब तुम्हे नज़दीक पाया था,
उमड़ आयी थी चेहरे पर हंसी,
सिमट आयी थी करीब जिंदगी मेरी;
मेरे अधरों पर हलकी सी हुई थी कम्पन;
मेरी आँखों में तेज़ी से हुई थी हलचल;
मेरा रोम-रोम घबराने लगा था;
मेरा मन भी भरमाने   लगा था;
तभी किसी ने धीरे से ये कहा था ;
पहचाना मैं हूँ वह कली   ,
जो है तेरी बगिया में खिली;
और प्रसन्नता जिसको कहते  हैं  सभी .महिला अधिकारों व अन्य कानूनी अधिकारों के विषय में मेरे कानूनी ज्ञान ब्लॉग को देखें.

1 टिप्पणी:

एस.एम.मासूम ने कहा…

तभी किसी ने धीरे से ये कहा था ;
पहचाना मैं हूँ वह कली ,
जो है तेरी बगिया में खिली;
अति सुंदर .

''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

   '' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट  गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारी...