बुधवार, 10 नवंबर 2010

phool

फूल कितना प्यारा व सुन्दर होता है
   मगर उसके साथ भी एक गम है;
वह बहुत कोमल होता है
    और इसी कारण उसकी आँखें नम है.
कांटे से सब दूर भागते
     मगर उसे एक ख़ुशी है;
जो भी चाहे उसे नष्ट करना
     उसके उसकी नोक चुभी है.
फूल के ही सम्बन्ध में एक कविता जो एक अन्य कवियत्री की है मुझे अच्छी लगी है आप भी पढ़ें और बताएं....पुष्प   अच्छा अब फिर कुछ और लिखूंगी और आपके समक्ष प्रस्तुत karoongi.

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

भाव भरी सुन्दर रचना को प्रस्तुत करने के लिए बधाई!
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कृपया शब्द पुष्टिकरण हटा दीजिए!
इससे कमेट करने मे बहुत उलझन लगती है!

Rajnish tripathi ने कहा…

आप की कविता प्रंशसनीय है जो कविताओ में भाव भंगिमा होनी चाहिए वो सब है। कभी मेरे ब्लॉग पर दस्तखत करिए अच्छा लगेगा।

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