शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

नारी का ये भी रूप -लघु कथा

नारी का ये भी रूप -लघु कथा 
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 दृश्य -१ 
''.....मम्मी -मम्मी  जल्दी करो  ब्रेकफास्ट देने में ,मेरे स्कूल की बस आने वाली है ,कहीं आज फिर से न छूट जाये .''   बेटा ! फ्रिज में ब्रैड रखी है और दूध भी ,तुम इतनी बड़ी हो कि खुद ले सकती हो ,मुझे बार बार परेशान मत किया करो ,आज मेरे क्लब में पार्टी है और मैंने फेसमास्क लगा रखा है इसलिए यहाँ से हिल भी नहीं सकती'',   अनीता ने अपनी दस वर्षीय बेटी हिना  को झिड़कते हुए कहा .

दृश्य-दो
''.......अनीता आज हमें अभी तो डाक्टर के यहाँ जाना है इसलिए अभी कुछ मत बनाना ,दिन के लिए खिचड़ी भिगो देना बस यही बन जाएगी ,...''भाड़ में जाये खाना ''मेरा तो आज व्रत  है आप अपना खुद देखना ,दूसरे शहर से आई जिठानी पर भड़कते हुए अनीता ने अपनी पड़ोसन को आवाज लगाई और अपने बच्चों को बुलाकर खाने खिलने को कहकर अपना पर्स लटकाकर बाहर चली गयी .


 दृश्य-तीन
''....बेटी रोज तो मैं घर का काम किसी तरह कर लेती हूँ पर आजकल जरा हाथ पैर काम नहीं करते, कुछ दिन घर का काम तो कर ले जब मेरी तबियत ठीक हो जाएगी तो मैं फिर से कर लूंगी .......आप को मैं खाली दिखती हूँ ,भैया के यहाँ आपका गुजारा नहीं था इसलिए ही मैंने आपको यहाँ ये सोचकर रख लिया कि चलो घर में कोई अपना रहेगा इससे घर की सुरक्षा भी हो जाएगी और घर का काम भी सही तरह से हो जायेगा .......पिता जी की पेंशन के पैसे तो आपको मिलते ही हैं एक कामवाली रख लेते हैं आधे आधे पैसे दे दिया करेंगे .क्यूं ठीक है न ?अपनी ७० वर्षीय माँ से पूछते हुए अनीता ने अपने सिर से काम का बोझ उतारते हुए कहा .


दृश्य-४
बड़े जेठ का निधन ......बड़ी जिठानी की पहले ही मृत्यु .....और दोनों बड़ी जिठानियों का वहां कोई दखल नहीं .....एकाएक अनीता का चेहरा दमक उठा .....चलो सांत्वना दे ही आऊं और दुखी परिवार को सहानभूति के जरिये अपने से जोड़ लूंगी इस तरह दूसरे जेठ का जो मकान हमने कब्जाया हुआ है उस में हमारा पक्ष और भी मजबूत हो जायेगा .सोचकर परिवार सहित वहां पहुंची अनीता बड़े जेठ के बच्चों की सबसे बड़ी हमदर्द बन गयी और सारा काम अपने हाथों में ले लिया .......अरे भाई ....शाम हो रही है .....चाय का टाइम हो रहा है....कोई चाय पिला सकता है क्या ?पत्नी के वहां होते हुए भी अनीता के पति ने सभी लोगों से प्रश्न किया किन्तु ये क्या अनीता उठ खड़ी हुई और चाय बनाने चली कि तभी उसकी सबसे छोटी बेटी हिना एकदम बोल उठी .....''आप बनाओगी चाय ''''हाँ'' '''और ये कहकर उसके मुहं पर जोर का थप्पड़ मारकर कुटिल हंसी मुहं पर लिए अनीता चाय बनाने चल दी .


 शालिनी कौशिक
   [कौशल]



4 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

लेकिन ऐसी महिलाएं जल्दी ही अवसाद की शिकार हो जाती हैं..

Kailash Sharma ने कहा…

बिल्कुल सच..एक रूप यह भी होता है..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हर तरह के लोग हैं समाज में ... ओर समाज फिर भी चलता है इसी सहारे ..

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

sahi baat

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...