गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

औरत की नज़र में हर मर्द है बेकार .


  Thai Massage
फरमाबरदार बनूँ औलाद या शौहर वफादार ,
औरत की नज़र में हर मर्द है बेकार .

करता अदा हर फ़र्ज़ हूँ मक़बूलियत  के साथ ,
माँ की करूँ सेवा टहल ,बेगम को दे पगार .


मनसबी रखी रहे बाहर मेरे घर से ,
चौखट पे कदम रखते ही इनकी करो मनुहार .


फैयाज़ी मेरे खून में ,फरहत है फैमिली ,
फरमाइशें पूरी करूँ ,ये फिर भी हैं बेजार .

हमको नवाज़ी ख़ुदा ने मकसूम शख्सियत ,
नादानी करें औरतें ,देती हमें दुत्कार .


माँ का करूँ तो बीवी को बर्दाश्त नहीं है ,
मिलती हैं लानतें अगर बेगम से करूँ प्यार .

बन्दर बना हूँ ''शालिनी ''इन बिल्लियों के बीच ,
फ़रजानगी फंसने में नहीं ,यूँ होता हूँ फरार .




     शालिनी कौशिक
           [WOMAN ABOUT MAN]
 

शब्दार्थ :फरमाबरदार -आज्ञाकारी ,बेजार-नाराज ,मक़बूलियत -कबूल किये जाने का भाव ,मनुहार-खुशामद,मनसबी-औह्देदारी ,फरहत-ख़ुशी ,फैयाजी-उदारता मकसूम -बंटा हुआ .फर्ज़ंगी -बुद्धिमानी .

11 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर गजल ,,,
RECENT POST : प्यार में दर्द है,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज शुक्रवार (19-04-2013) के   धरा खून से लाल, लाल पी एम् बनवाओ- चर्चा मंच 1219 (मयंक का कोना)  पर भी होगी!
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
माँ दुर्गा आप सबका कल्याण करें!
सूचनार्थ...सादर!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

लगता है कि ये बेचारा कहीं का नहीं

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब..

राकेश कौशिक ने कहा…

बन्दर और बिल्ली - बहुत खूब

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

हाहाह..बढिया है

Aziz Jaunpuri ने कहा…

umda

Ankur Jain ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति।।।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

फरमाइशें पूरी करूँ ,ये फिर भी हैं बेजार .

nice.

Dr. Ayaz Ahmad ने कहा…

त्योहार पर शुभकामनायें.

Amrita Rai ने कहा…

bahut he khubsurat abhivakti...

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...