मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

 
इम्तिहान
एक दौर
चलता है जीवन भर !
सफलता
पाता है कोई
कभी थम जाये सफ़र !
कमजोर
का साथ
देना सीखा,
ज़रुरत
 मदद की
उसे ही रहती .
सदा साथ
नर का
देती रही ,
साया बन
संग उसके
खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी
आये पुरुष की
नारी बन सहायक
सफलता दिलाती ,
मगर नारी
चले मंजिल की ओर
पीछे उसके दूर दूर तक
वीराना रहे ,
और अकेली
वह इम्तिहान में
सफलता पाती !
फिर कौन मजबूत?
कौन कमजोर ?
दुनिया क्यों समझ न पाती ?




    शालिनी कौशिक 

12 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Sahi Aur Vicharniy Baat

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (17-04-2013) के चर्चामंच - बुधवारीय चर्चा ---- ( 1217 साहित्य दर्पण ) (मयंक का कोना) पर भी होगी!
नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
सूचनार्थ...सादर!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

वह इम्तिहान में
सफलता पाती !
फिर कौन मजबूत?
कौन कमजोर ?
दुनिया क्यों समझ न पाती ?

बेहतरीन रचना,आभार,
RECENT POST : क्यूँ चुप हो कुछ बोलो श्वेता.

Yashwant Mathur ने कहा…

बहुत ही बढ़िया


सादर

शारदा अरोरा ने कहा…

bahut badhiya...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

पुरुष प्रधान समाज जब इओन बातों पे ध्यान देना शुरू करेगा तभी उन्नति करेगा ...

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
latest post"मेरे विचार मेरी अनुभूति " ब्लॉग की वर्षगांठ

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सशक्त रचना..

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बढ़िया रचना कविता | आभार

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Anita ने कहा…

सही कहा है..

Bhola-Krishna ने कहा…

शालिनी जी , दुनिया न समझेगी तो भुगतेगी उसका परिणाम !अभिचान जारी रखिये ! शुभकामनाएं !

मनोज बिजनौरी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

... पता ही नहीं चला.

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