सोमवार, 5 मई 2014

मोदी जी नरसिंह जयंती करीब ही है .


भारत जैसे देश में कभी न ऐसा देखा है और न ही कभी ऐसा देखने की हम कामना करेंगे कि देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री के पद के लिए जो उम्मीदवार आधिकारिक रूप से खड़ा है वह ही कानून की निरंतर अवहेलना करता रहे .
आज देश अपने लिए नयी सरकार के चयन में व्यस्त है और ऐसे में वह अपने नेताओं से उनके वोटर के नाते जुड़ रहा है और उन्हें अपने रोज बहुत ही करीब देख रहा है और नेतागण भी इस अवसर को सुअवसर समझकर जनता को लुभाने में अपनी सारी ताकत से जुटे हैं ऐसा अवसर लगभग हर पांच साल बाद आता है और कभी कभी इस मध्य में भी आ जाता है और इस मौके पर हर नेता अपने विपक्षी नेता पर जमकर छींटाकशी करते हैं और उसे अपनी तरफ से पूरी तरह से जनता का दुश्मन दिखाने की कोशिश करते हैं किन्तु ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ कि चुनाव को संचालित करने वाली सांविधानिक संस्था को ही नकारते हुए उसे नीचे दिखाने की मशक्कत की जाये किंतु आज ऐसा हो रहा है और एकमात्र प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार द्वारा हुआ है सबसे पहले तो मोदी के निर्देश पर भाजपा का चुनाव घोषणा पत्र उसकी घोषणा के लिए प्रतिबंधित दिवस अर्थात चुनाव के दिन घोषित किया गया ,दूसरे मोदी ने अपना नामांकन करने के दिन वाराणसी में जबरदस्त रोड शो के जरिये भरा उसमे कोई बात नहीं थी किन्तु यह भी उन्होंने उस दिन किया जिस दिन अन्य जगह पर चुनाव थे और उन्होंने जनता का ध्यान खींचने को एक सड़कछाप की भांति मोबाईल से अपना व् चुनाव चिन्ह का फोटो खींचा और उसका इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रचार किया .चुनाव आयोग द्वारा इस गतिवधि के कारण वे कानून के जिस शिकंजे में कसते जा रहे हैं उससे उनका दिमागी संतुलन इस कदर गड़बड़ा गया कि अब वे देश की इस संवैधानिक संस्था को खुलेआम धमकी देने पर आ गए हैं और बिलकुल ऐसे दिखा रहे हैं कि चुनाव आयोग उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता वह चाहे तो और भी मामले दर्ज कर ले उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है .जबकि अभी तक चुनाव आयोग ने उनपर और अन्य भी जिन उम्मीदवारों पर कानून की अवहेलना की कार्यवाही की है उसमे कहीं भी द्वेष की कोई बू नहीं है फिर देश में संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण पद के लिए दावेदारी करने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव आयोग पर इस तरह की छींटाकशी किया जाना साफ तौर पर दिखाता है कि उनके मन में देश के कानून के प्रति क्या सम्मान है ?
     और अपनी सभाओं में भले ही उन्हें अपने रहस्यमय अंदाज़ पर भले ही श्रोताओं की सीटियां किसी थर्ड ग्रेड फिल्म की भांति सुनने को मिलती हों किन्तु देश की जनता अपने देश में कानून का सम्मान स्वयं भी करती है और उसे ही अपना आदर्श मानती है जो उसी की तरह देश के कानून को अपना कानून मानता हो न कि अपने कानून को देश का कानून और इतना तो मोदी जी को समझ ही लेना चाहिए कि ये देश भक्त प्रह्लाद का है न कि हिरण्यकश्यप का और अगर वे यहाँ फिर से हिरण्यकश्यप की भांति अपना कानून चलाने की कोशिश में हैं तो नरसिंह जयंती करीब ही है . 

शालिनी कौशिक
   [कौशल ]
      

2 टिप्‍पणियां:

abhishek shukla ने कहा…

मोदी जी मेँ एक हजार अच्छाईयाँ है पर सबसे बड़ी बुराई ये है कि फेँकते बहुत है। भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले हैँ कम से कम अपनी छवि राष्ट्रीय स्तर की करेँ॥ सहमत हूँ आपसे।

Neetu Singhal ने कहा…

हमारा एक पड़ोसी भगवान बनने वाला था, भगवान ने उसे 'रावण' बना दिया.....

कहीं कोई एक डाकू-लुटेरा था, श्री रामायण ने उसे वाल्मीकि बना दिया.....