बुधवार, 28 मई 2014

पराया घर गन्दा कहने से अपना घर स्वच्छ नहीं हो जाता

उमा भारती का कांग्रेस पर वारSonia Gandhi (cropped).jpg

Uma Bharti Defends Smriti Irani, Asks, 'What is Sonia Gandhi's Qualification'? 



नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने इस बार शासन सत्ता संभाली किन्तु जहाँ सत्ता है वहां विवाद भी हैं और विवाद आरम्भ हो गए .मानव संसाधन विकास मंत्रालय का प्रभार स्मृति ईरानी को सौंपा जाना इस विवाद का जन्मदाता है .विपक्षी दल कॉंग्रेस के अजय माकन कहते  है कि शिक्षा मंत्री ग्रेजुएट तक नहीं है तो भाजपा बिफर पड़ती है और सबसे ज्यादा बिफरती हैं उमा भारती जिन्हें हर बात के लिए सोनिया गांधी को घेरना होता है किन्तु हर बार की तरह इस बार भी वे सोनिया गांधी से मात खायेंगी क्योंकि सोनिया गांधी ऐसे विवादास्पद और कुतुर्क करने वाले मुद्दों को कभी भी तरजीह नहीं देती और 'एक चुप सौ को हरावे '' की नीति पर ही चलती हैं किन्तु उमा भारती को तो ये जानना ही होगा भले ही सोनिया जवाब दें या न दें कि वे यूपीए की चेयरपर्सन रही हैं न कि केंद्र सरकार के किसी विभाग की मंत्री और आज तक इस तरह के गठबंधनों के लिए कोई योग्यता निर्धारित नहीं की गयी है यदि की जाती तब की बात अलग होती और तब शायद एक बार फिर उमा भारती को गंजे होने की धमकी देकर सोनिया गांधी को रोकना होता और सोनिया जी द्वारा उनके बालों को बचाने के लिए ये पद भी छोड़ने का एक बहाना मिल जाता प्रधानमंत्री पद को छोड़ने की तरह ..
       आज सभी जानते हैं कि एक स्कूल का प्रबंधक तो अनपढ़ भी हो सकता है किन्तु स्कूल में पढ़ाने वाले के लिए अच्छी शिक्षा या यूँ कहें कि उच्च शिक्षा ग्रहण करना ज़रूरी है और ऐसे में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया जाना विवाद तो पैदा करेगा ही साथ ही उनकी धोखाधड़ी की नियत भी .२००९ के चुनाव में वे स्वयं को शपथ लेकर बी.ए.बताती हैं और २०१४ में शपथ लेकर बी.कॉम.हालाँकि यहाँ मुद्दा केवल ये है कि वे उच्च शिक्षित नहीं हैं और उन्हें शिक्षा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद देना भाजपा की मजबूरी क्यूँ बन गयी ?जबकि हमारे देश में आज उच्च शिक्षा के लिए उपयुक्त माहौल है और भाजपा में मुरली मनोहर जोशी जी जैसे  काबिल व् हर पद के योग्य नेता बगैर पोर्टफोलियो के मौजूद हैं तब स्मृति ईरानी जैसे कम शिक्षित को शिक्षा मंत्री क्यूँ बनाया गया ?अगर उन्हें कोई और विभाग दिया जाता तो संभव था कि कोई विवाद न होता किन्तु शिक्षा विभाग में मंत्री ही कम शिक्षित -यह तो विवाद का विषय सारी जनता में है इसके लिए सोनिया गांधी की शिक्षा पर ही क्यूँ सवाल उठाती हैं उमा भारती ?सारी जनता की ही शिक्षा को विवादों के घेरे में क्यूँ नहीं ले आती हैं उमा भारती ?
       यूँ बात बात में सोनिया गांधी जी को घसीटकर वे अपने गलत कार्यों को और कुतर्कों को सही साबित नहीं कर सकते क्योंकि राहुल सोनिया का विरोध व् अपमान उन्हें सत्ता दिला सकता है ,स्मृति को मंत्री पद दिला सकता है किन्तु जनता के मन में उठते सवाल को नहीं दबा सकता ,योग्यता को नकारकर अयोग्यता को सिर पर चढाने की इज़ाज़त नहीं दे सकता .ये तो उन्हें समझना ही होगा कि पराये घर को गन्दा कहने से अपना घर साफ नहीं हो जाता बल्कि उसके लिए अपना घर ही साफ़ करना पड़ता है .अब यहाँ तो स्मृति ईरानी की कम शिक्षा की बात को दबाने के लिए सोनिया गांधी की शिक्षा की बात उठाना तो क़तील 'शिफ़ाई 'के शब्दों में उमा भारती के मन की व्यथा को कुछ यूँ व्यक्त कर रहा है -
 ''यूँ तसल्ली दे रहा हूँ मैं दिल-बीमार को ,
  जिस तरह थामे कोई गिरती दीवार को .''

शालिनी कौशिक 
  [कौशल ]
      

5 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (29-05-2014) को चर्चा-1627 पर भी है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद प्रसाद ने कहा…

उमा भारती की बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है वह तो सह धर्मिता निभा रही है !शिक्षा का क्या है ,वो तो कभी भी हांशील किया जा सकता है...डिग्री पहले आती है ..ज्ञान उसके पीछे पीछे ...
new post ग्रीष्म ऋतू !

Anita ने कहा…

सही कहा है...

Neetu Singhal ने कहा…

"तुम अपने गिरेबाँ में झांकों तुम अपने में"ये छब्बीस जनवरी की झांकियां वर्त्तमान /निवर्तमान सत्ताधारी दल स्वयं ही देखे । जनता आपको कर देती है, अपनी धरती देती है, अपने जंगल है, खेत देती है, नदी-पर्वत देती है, आपको उत्तर देना होगा .....

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

इस देश में नेताओं के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं रही है। पढ़े से गुना (गुणवान )अच्छा होता है। कामराज दसवीं पास तथा स्वयं उमा भारती पांचवीं पास हैं लेकिन विदूषी हैं वेदपाठी हैं। धारा प्रवाह संस्कृत बोलतीं हैं। आपकी प्रिय दर्शनी इंदिराजी ग्यारहवीं पास थीं।

बताते चले इंदिरा की विरासत कांग्रेस की प्रियदर्शनी का शैक्षणिक स्टेटस :

Indira was mostly taught at home by tutors, and intermittently attended school until matriculation in 1934.[nb 1] She went on to study at the Viswa Bharati University in Shantiniketan.[12] A year later, however, she had to leave university to attend to her ailing mother inEurope.[13] While there, it was decided that Indira would continue her education at the University of Oxford.[14] After her mother died, she briefly attended the Badminton School before enrolling at Somerville College in 1937 to study history.[15] Indira had to take the entrance examination twice; having failed at her first attempt, with a poor performance in Latin.[15] At Oxford, she did well in history, political science and economics, but her grades in Latin—a compulsory subject—remained poor.[16][17]

Best Answer

Nacho answered 8 years ago
Indira Gandhi attended prominent Indian, European and British schools like Santiniketan and Oxford, but her weak academic performance prevented her from obtaining a degree. In her years in continental Europe and the U.K., she met Feroze Gandhi, a young Parsee Congress activist, whom she married in 1942, just before the beginning of the Quit India Movement - the final, all-out national revolt launched by Mahatma Gandhi and the Congress Party. The couple were arrested and detained for several months for their involvement in the movement. In 1944, Gandhi gave birth to Rajiv Gandhi, followed by Sanjay Gandhi two years later .


she failed thrice in Oxford entrance examination for 12 th class so she was 11th failure

वो कहते हैं न रस्सी जल गई बल

नहीं गए अभी भी कांग्रेस का अहंकार कभी अजय माकन के रूप में मुखरित हो रहा है कभी मणिशंकर अइयर

बनके।

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