बुधवार, 6 मई 2015

इसीलिए है माँ बेटी की दुश्मन



बेटी पैदा होने पर चार साल से सह रही पति की प्रताड़ना
बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग जितने भी लोग बेटी के जन्म पर उपस्थित होते हैं सभी के चेहरे पर मुर्दनी सी ही छा जाती है.सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि बेटी का जन्म सुनकर उसे जन्म देने वाली माँ भी ख़ुशी के पल से दूर नज़र आती है और मर्दों के इस समाज द्वारा यह ठीकरा माता उर्फ़ नारी के सिर पर ही फोड़ दिया जाता है कि माँ स्वयं नारी होकर भी बेटी अर्थात नारी का जन्म नहीं चाहती इसी से यह साबित होता है कि नारी ही नारी की सबसे बड़ी दुश्मन है अब नारी नारी की दुश्मन कैसे है यह मुद्दा तो बहुत लम्बे विचार-विमर्श का है किन्तु माँ स्वयं नारी होकर बेटी अर्थात नारी का जन्म क्यों नहीं चाहती यह मुद्दा अभी की ही एक घटना प्रत्यक्ष रूप में साबित करने हेतु पर्याप्त है -
[शर्मनाक: बेटी पैदा हुई तो पत्नी को निर्वस्त्र कर छत पर घुमाया-अमर उजाला से साभार ]
एक तरफ केंद्र सरकार देश में बेटी बचाओ अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ एक मां के लिए बेटी पैदा करना अभिशाप बन गया। इसके लिए वह पिछले चार साल से पति की प्रताड़ना सह रही है।
हद तब हो गई जब पति ने महिला को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। यही नहीं, महिला को पति ने छत पर धूप में निर्वस्त्र घूमाया। इससे महिला बेहोश हो गई। होश में आने पर किसी तरह से उसने अपनी बहन को फोन किया और आपबीती बताई।
इसके बाद महिला की बहन लक्ष्मी ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि महिला सेल में भी शिकायत दर्ज नहीं की गई। सुनवाई नहीं होने पर महिला की बहन ने एसएसपी से शिकायत की। इसके बाद बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
[पति की प्रताड़ना से उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी--महिला को उपचार के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल सुमन कुमारी बिश्नाह के पल्ली मोड़ की रहने वाली है। उसने बताया कि उसका पति राकेश कई सालों से मारपीट रहा है। उनकी चार साल की बेटी है।
इसके लिए ही उसे पिछले चार साल से प्रताडि़त किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पति का अत्याचार बढ़ गया। उसके सिर पर पत्थर से मारा और लहूलुहान कर दिया। पति जुआ खेलता है और शराब पीकर तंग करता है। उसने बैंक का कर्ज चुकाने के लिए मारना शुरू कर दिया है।
महिला की बहन लक्ष्मी ने बताया कि वह शिकायत लेकर बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस स्टेशन और महिला सेल जम्मू में गई थी, लेकिन कहीं पर मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद एसएसपी से गुहार लगाने पहुंची, तब जाकर मामला दर्ज किया गया।
घायल महिला ने यह भी बताया कि पति की प्रताड़ना से उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी है। अब वह दूसरी बच्ची को भी मारना चाहता है। एसएचओ बाड़ी ब्राह्मणा भरत शर्मा का कहना है कि आरोपी पति के खिलाफ 498 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी अभी गिरफ्त से बाहर है।]
बेटी का जन्म और इस तरह के अत्याचार माँ अपने पर तो सहकर भी बर्दाश्त कर सकती है किन्तु वह जानती है कि यह अत्याचार मात्र यहीं तक रुकने वाला नहीं है इसका सामना उसकी बेटी को पहले अपने पिता के घर में और फिर अपनी ससुराल में उसी की तरह करना पड़ेगा इसलिए वह नहीं चाहती कि उसकी कोख से कोई भी बेटी जन्म ले और उसी की तरह दुःख सहे.अब यह निश्चित करना हम सभी का काम है कि क्या वास्तव में माँ अपनी बेटी की उसी तरह दुश्मन है जैसे नारी नारी की या फिर उसे इस पुरुष सत्तात्मक समाज ने ऐसा बनने को मजबूर कर दिया है ?
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

Mohan Sethi 'इंतज़ार' ने कहा…

ऐसे किस्से पढ़ कर आँखे नम हो जाती हैं ना जाने पुरुष और समाज को अकल कब आयेगी .....

निर्मला कपिला ने कहा…

उसकी ये सोच भी कहीं तक तो सही है समाज मां की व्यथा को समझ ही नही सका और मर्द इसके लिये तैयार नही1 कोई राह नजर नही आती1

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
---------------

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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satya sheel Agrawal ने कहा…

यह समझ नहीं आता देश में नारी के पक्ष में इतने कानून मौजूद हैं फिर भी कोई महिला वर्षों तक अपने पति से प्रताड़ित क्यों होती रहती है?और समाज भी क्यों अनदेखा करता रहता है या ऐसी महिलाएं किसी जंगल में रह रही हैं?आखिर नारी क्यों सह रही है इतना सब कुछ?महिला को शिक्षित होना होगा और यदि संभव हो तो आत्म निर्भर होना होगा.अधिकार मांगना पड़ता है.

dj ने कहा…

घिनौना कृत्य है। और ये हमारे देश का नितांत शर्मनाक यथार्थ कि आज भी महिलाओं को
ऐसे अत्याचारों से दो चार होना पड़ता है।

Neeraj Kumar Neer ने कहा…

शर्मनाक ॥

Kavita Rawat ने कहा…

लड़का लड़की के मानसिकता से जब तक समाज ऊपर नहीं उठ सकेगा ऐसे घिनोने कृत्यों को रोकना मुमकिन नहीं ...

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

विचारणीय

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...