बुधवार, 13 मई 2015

''सड़क दुर्घटनाएं -लाइसेंस कुशल चालक को ''


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सड़क दुर्घटनाएं  रोज सैकड़ों ज़िंदगियाँ लील रही हैं कारण खोजे जा रहे  हैं .कहीं वाहनों की अधिकता ,कहीं ट्रेफिक नियमों का पालन न किया जाना आदि कारण बताये जा रहे हैं किन्तु एक कारण जो इस मामले में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है उसे कोई वरीयता नहीं दी जा रही और वह कारण है वाहन चलाने की कुशलता का न होना .आज लगभग  50% वाहन चालक ऐसे हैं जिन्हें वाहन को न तो नियमों के आधार पर मोड़ना आता है और न पार्किंग के लिए खड़ा करना फिर वाहन चलाना तो बहुत दूर की कौड़ी है .कितने ही वाहन चालक ऐसे दिखाई देते हैं जो पीछे की तरफ से आते हुए वाहन को न देखते हुए अपना वाहन बैक करना आरम्भ करते हैं और उसे उससे भिड़ा देते हैं .स्पीड के कितने ही नियम बनाये जाएँ ये उनका पालन नहीं करते ,रोज़ इनके चालान कटते हैं किन्तु ये बार बार उसी गतिविधि को अंजाम देते रहते हैं और इस सबके लिए दोषी कौन है ?दोषी है वाहन चलाने का लाइसेंस देने वाला विभाग आर.टी.ओ. ,जो हर किसी को ये लाइसेंस दे रहा है और सड़कों पर निरंतर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ाने में सहयोग .लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए इन सड़क दुर्घटनाओं पर त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता है और ऐसे में प्रथम दायित्व आर.टी.ओ. का बनता है कि वह लोगों को यह लाइसेंस उनकी कुशलता की भली-भांति परख करने के बाद ही दे .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

3 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (15.05.2015) को "दिल खोलकर हँसिए"(चर्चा अंक-1976) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

dj ने कहा…

आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। आर टी ओ को लाइसेंस देने के पहले चालक की हर पैमाने पर जाँच पड़ताल करनी ही चाहिए।
और आपका लेख पढ़ने के बाद एक बात और जहन में आई अक्सर महिलाओं को ड्राइविंग करते देख पुरुषों के मुह से निकला जुमला आम है "नियम कुछ मालूम नहीं चलाना आता नहीं और लो देखो उत्तर गई सड़क पे गाड़ी लेकर "
जबकि आँकड़े भी कहते हैं कि ट्रैफिक नियम तोड़ने में पुरुषों का प्रतिशत ज्यादा है।
ऐसे लोगो के लिए ये लेख मिसाल है जहाँ आप (एक महिला) सबको नियमो से अवगत कराने उनका सख्ती से पालन करने हेतु सफल प्रयास करती दिखाई दे रही हैं।

Dharmesh Purohit ने कहा…

आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। आर टी ओ को लाइसेंस देने के पहले चालक की हर पैमाने पर जाँच पड़ताल करनी ही चाहिए।
एवं नियमो में स्पष्टता होनी चाहिए.
जैसे कि शार्ट ब्रेक वाला नियम बहुत ही कन्फुस्यन वाला है. एक दिशा में दो वाहन जा रहे हो और उस परिश्थिति में पीछे वाला वाहन, आगे वाले वाहन के पिछवाड़े में दे मारे तो उस स्थिति में सीधे सीधे पीछे वाला वाहन का ही जिम्मेवारी होना चाहिए।
इस प्रकार के नियम से लोग अपनी गति मर्यादा पर भी ध्यान रखने लगेंगे और दो वाहनो के बीच की दुरी भी बनाये रखेंगे
तीन रस्ते या चौराहे पर कौन सा वाहन पहले निकलेगा और कौन सा बाद में, इसकी कही पर भी व्याख्या नहीं है.
कई ड्राइवर को सर्कल में कैसे गाडी चलनी है उसका बिलकुल ही ज्ञान नहीं होता है
डिम लाइट - फूल लाइट भी एक बड़ी समस्या है
लोग उल्टा इंडिकेटर देते रहते है, साइड दे रहे है या ले रहे हो पता चलता। …………।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि ड्राइवर को जब लाइसेंस इशू होता है तो उसकी इन विषयो में बारे में कोई टेस्ट नहीं ली जाती है.

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