मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

एक दिल्ली तो संभलती नहीं कहते देश संभालेंगे भाजपाई

एक दिल्ली तो संभलती नहीं कहते देश संभालेंगे भाजपाई
Delhi state assembly election, 2013
India
2008 ←4 December 2013 

ALL 70 SEATS IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY OF DELHI
36 SEATS NEEDED FOR A MAJORITY
Opinion polls
 Sheila Dikshit (cropped).jpg ArvindKejriwal2.jpg
LEADERSheila DikshitHarsh VardhanArvind Kejriwal
PARTYCongressBJPAAP
LEADER'S SEATNew DelhiKrishna NagarNew Delhi
LAST ELECTION43 seats, 40.31%23 seats, 36.34%Not formed
CURRENT SEATS4323-
SEATS NEEDED-71336


Incumbent Chief Minister

ये है इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव की राजनीतिक स्थिति और जहाँ तक दिल्ली विधानसभा की बात है तो आज दूरदर्शन पर देखा और सुना कि भाजपा वहाँ कितनी मजबूत स्थिति में है वही भाजपा जो १९९३ में दिल्ली में विधानसभा बनने पर पहली बार में ही सत्ता संभालती है और मदन लाल खुराना के हाथों में मुख्यमंत्री की बागडोर सौंपती है और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ओर से बिगुल बजाने वाली ये पार्टी अपना अतीत कितनी जल्दी भूल जाती है ये कोई आश्चर्य की बात नहीं ऐसा वह एक बार नहीं बार बार करती है .मध्य प्रदेश में सत्ता में आती है उमा भारती के दम पर और उनके कानूनी फेर में फंसने पर सत्ता उनसे छीनती है फिर देती नहीं अपने को ईमानदार दिखने के लिए और अब चुनावी फायदा देख उन्हें फिर जोड़ लेती है .दिल्ली में इनके मदन लाल खुराना ,हवाला में फंसे और सत्ता से बाहर हुए शायद हवाला ईमानदारी का काम था और उन्हें सत्ता में अपने को ईमानदार दिखाने पर अपने राजनीतिक भविषय पर खतरा मंडराता दिखा था इसलिए वे हट गए और उनकी जगह आ गए साहिब सिंह वर्मा फिर दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज ,५ साल का कार्यकाल भी भाजपा वहाँ टिककर नहीं कर पायी और देश को स्थिरता देने की बात करती है और इनकी सुषमा स्वराज ईमानदारी के झंडे गाड़ती फिरती हैं और शीतल पेयों को अपने छोटे से कार्यकाल में भारत के साथ भेदभाव की अनुमति देती हैं अर्थात एक ऐसी अनुमति जिससे भारत में रासायनिक तत्वों की अधिकता का विदेशी कम्पनी का फैसला सही मान लिया जाता है जबकि वही कम्पनी अमेरिका में कम मात्र रखती है और ये वही सुषमा स्वराज हैं जो सोनिया गांधी को जीतने से रोकने के लिए कभी चुनाव लड़ने को तैयार होती हैं उनके सामने तो कभी गंजी होने का फैसला करती हैं क्यूँ अपने हाथ में शक्ति होने पर नहीं देती ये सही मोड़ इन कम्पनी के गलत इरादों को नेस्तनाबूद करके और यदि नहीं कर सकती ऐसा तो क्यूँ भ्रष्टाचार के लिए मात्र कांग्रेस को दोषी ठहराती हैं जबकि इस मामले में ये भाजपा को उसके समकक्ष ही खड़ा कर देती हैं .
आज दिल्ली में चुनाव हैं और जो भी दल इसमें खड़ा है वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कमर को कस कर दिखा रहा है जबकि अभी तो इसमें ''आप पार्टी ''ही साफ है क्योंकि उसका कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है और ये साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि यदि उसके हाथ में भी सत्ता आएगी तो वह भी इसमें हाथ डुबोने के सिवाय कुछ नहीं करेगी क्योंकि सभी कहते हैं कि यहाँ आने का मतलब ही समुन्द्र में आना है और समुन्द्र में आकर मगरमच्छ से बैर नहीं किया जाता अफ़सोस बस इतना है कि जनभावनाओं से खिलवाड़ का जो गन्दा खेल यहाँ खेला जाता है वह बर्दाश्त के बाहर है और भाजपा ने वही किया है सत्ता में रहने का अवसर उसे कम मिला है किन्तु जितना भी मिला है उतने में भी वह अपने को इस दलदल में डूबा हुआ ही दिखा पायी है और यही कहती नज़र आयी है -
''हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे .''.
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

आपसे सहमत हूँ ....!
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shikhakaushik06 ने कहा…

i am agree with you .bjp can never give stable govt.because it's leaders have a lot of hunger for power

बेटी की...... मां ?

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