सोमवार, 9 दिसंबर 2013

त्रिशंकु विधानसभा नहीं दिल्ली की जनता

त्रिशंकु विधानसभा नहीं दिल्ली की जनता
दिल्ली विधानसभा चुनाव २०१३ के जो परिणाम आये हैं वे न केवल कॉंग्रेस के लिए बल्कि स्वयं वहाँ की जनता के लिए भी निराशाजनक हैं .कॉंग्रेस के लिए तो मात्र इतनी ही निराशा है कि वह वहाँ की सत्ता से बेदखल हो रही है किन्तु जनता के लिए बहुत ज्यादा क्योंकि जिन दलों को उसने कॉंग्रेस के मुकाबले वरीयता दी है उनमे यह हिम्मत ही नही कि वे सरकार बनायें ,ये हिम्मत भी कॉंग्रेस में ही है .कॉंग्रेस के ही पी.वी.नरसिंह राव ने ५ वर्ष तक १९९१ से १९९६ तक अल्पमत सरकार चलाकर दिखाई थी और विपक्ष देखता रह गया था और इस बार की भी यु.पी.ए.सरकार के लिए भाजपा के ही मुख़्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि ''ये सरकार तो आरम्भ से ही अस्थिर रही है .''और कितनी बड़ी असफलता कही जायेगी विपक्ष की जिसकी भाजपा सिरमौर बनी फिरती है कि वह इसे गिरा नहीं पायी केवल अपने अनर्गल प्रलाप से ही अपने और बहुत से विपक्षियों के मन को खुश करती रही जबकि वह विपक्ष की भूमिका भी सफलतापूर्वक नहीं निभा पायी जिसका मुख्य कर्त्तव्य था कि वह देश को उसकी नापसंदगी की सरकार से अतिशीघ्र मुक्ति दिलाये .
और अब भाजपा व् आप दोनों ही ऐसी स्थिति में हैं कि दिल्ली में सरकार बनायें किन्तु दोनों ही हिचक रहे हैं कारण साफ है कि वे जानते हैं कि यदि हैम ऐसी स्थिति में सरकार बनाते हैं तो हम इस कार्य को सफलतापूर्वक नहीं कर पाएंगे और हमारी यह विफलता लोकसभा चुनाव २०१४ में हमारी दावेदारी को ही खतरे में डाल देगी किन्तु जनता का हित देखने वाले ये भ्रमित हितेषी स्वयं नहीं देख रहे कि वे अपने हालिया आचरण से ये कार्य पहले ही कर चुके हैं .जनता के धन का जो इस्तेमाल चुनाव में होना था वह हो चूका है जनता अपनी पसंद जाहिर कर चुकी है और भाजपा को एकमात्र बड़ी पार्टी के रूप में चुन चुकी है साथ ही उसके बाद अपनी पसंद के रूप में आप को स्थान दे चुकी है और दोनों ही पार्टियां न तो सरकार बना रही हैं न ही किसी का समर्थन कर रही हैं इससे जनता के धन व् समय की तो हानि हो ही रही है जनता की महत्वाकांक्षाओं पर भी कुठाराघात हो रहा है इसलिए अब इनका दायित्व बनता है कि ये जनता के प्रति अपने दायित्व की पूर्ति का मार्ग तलाशें न कि दायित्व से भागने का .
किन्तु इन दोनों दलों की कार्यप्रणाली से ऐसा होता नहीं दिखता क्योंकि इनमे शासन की वह योग्यता ही नज़र नहीं आती जो कॉंग्रेस में है और इसलिए ये बस बाते ही बनाते दिखते हैं काम के नाम पर स्वयं को विपक्ष में बैठने का बहाना बनाते नज़र आते हैं और यही कारण है कि कॉंग्रेस देश में सर्वाधिक आलोचना का शिकार होकर भी बार बार सत्ता में छा जाती है और इन दलों द्वारा हमेशा अपनी सीट विपक्ष के लिए ही सुरक्षित रखी जाती है .विपक्षी दलों की इसी अयोग्यता के कारण कॉंग्रेस ऐसी बड़ी बड़ी हार होने के बावजूद बार बार सत्ता में आती है और आती रहेगी क्योंकि -
''गिरते हैं शह सवार ही मैदान-ए-जंग में ,
वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चले .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।
आज 11-12-13 का सुखद संयोंग है।
सुप्रभात...।
आपका बुधवार मंगलकारी हो।

हस्ती ....... जिसके कदम पर ज़माना पड़ा.

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