शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

हँसे जा रहा है हँसे जा रहा है .

मृत्यु
का आलिंगन
मनुष्य के लिए
स्वयं करना
है कायरता
जीवन
व्यतीत करना
भले बने मनुज के लिए
एक विवशता
फिर भी
कायर न कहलाये
खून के घूँट पीता
जीये जा रहा है
और ईश्वर
देख अपनी माया की
सफलता
मोह की ज़ंज़ीरों में
उसे बंधा समझ
पालन के कर्त्तव्य में
होकर विफल भी
हँसे जा रहा है
हँसे जा रहा है .

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

जीवन एक विवशता नहीं जीवन तो एक उपहार है...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन भी जी लेगा एक दिन।

तुम राम बनके दिल यूँ ही दुखाते रहोगे .

अवसर दिया श्रीराम ने पुरुषों को हर कदम , अग्नि-परीक्षा नारी की तुम लेते रहोगे , करती रहेगी सीता सदा मर्यादा का पालन पर ठेकेदार मर्यादा...