रविवार, 23 फ़रवरी 2014

मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,



मोदी का हमला, 'भ्रष्टाचार की एबीसीडी है कांग्रेस'
चले पहनकर सिर पर टोपी .अचकन और पजामी ,
मियां शराफत ने हाथों में ले ली बेंत बदामी .
.......................................................
इत्र लगाया बांह पर अपनी ,मूंछ को किया रंगीन ,
जूती पहनी पाकिस्तानी ,पैर न छुए ज़मीन .
..............................................................
मिले अकड़कर गले दोस्त के ,बोले भाई सलाम ,
तुमसे मिलने हम हैं आये ,छोड़ के काम तमाम .
..................................................
अबकी बार खड़ा हूँ तेरे ,शहर विधायक पद पर ,
जिम्मेदारी मुझे जिताने की ,तेरे काँधे पर .
..............................................................
हम दोनों की जात एक है ,काम भी एक है प्यारे ,
मेरा साथ अगर तू दे दे ,होंगे वारे न्यारे .
............................................................
मैं बेचूं हूँ रोज़ तरक्की ,तुझको ख्वाब दिखाकर ,
तू बेचे है आटा चावल ,कंकड़ धूल मिलाकर .
......................................................
मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,
तेरे घर से दूध में पानी ,आता दूध से ज्यादा .
...................................................
मैंने भला कहा क्या सबको ,तू झूठा मक्कार ,
अब मेरे साथ में मेरे जैसा ,करना मेरे यार .
.....................................................
जैसे तेरी चलवाई है ,मेरी तू चलवाना ,
अबकी बार मुझी को अपनी ,सारी वोट दिलाना .
................................................
नेताओं के भेदभाव को ,दोस्त न तू अपनाना ,
तेरे आगे हाथ मैं जोडूं ,मुझे न भूल जाना .
.............................................
हाथ मिलकर गले लगाकर ,चले मियां जी आगे ,
पकड़के माथा दोस्त सोचता ,क्या देखा जब जागे .
................
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (25-02-2014) को "मुझे जाने दो" (चर्चा मंच-1534) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत खूब ...निशाना ठीक लगा !
New post चुनाव चक्रम !
New post शब्द और ईश्वर !!!

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

कविता में इस्लाम है चित्र में दिखें सरदार ,

अच्छी खासी रचना के साथ असंगत चित्र लगाया है।

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

कविता में इस्लाम है चित्र में दिखें सरदार ,

अच्छी खासी रचना के साथ असंगत चित्र लगाया है:

रविवार, 23 फ़रवरी 2014
मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,


मोदी का हमला, 'भ्रष्टाचार की एबीसीडी है कांग्रेस'
चले पहनकर सिर पर टोपी .अचकन और पजामी ,
मियां शराफत ने हाथों में ले ली बेंत बदामी .
.......................................................
इत्र लगाया बांह पर अपनी ,मूंछ को किया रंगीन ,
जूती पहनी पाकिस्तानी ,पैर न छुए ज़मीन .
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मिले अकड़कर गले दोस्त के ,बोले भाई सलाम ,
तुमसे मिलने हम हैं आये ,छोड़ के काम तमाम .
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अबकी बार खड़ा हूँ तेरे ,शहर विधायक पद पर ,
जिम्मेदारी मुझे जिताने की ,तेरे काँधे पर .
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हम दोनों की जात एक है ,काम भी एक है प्यारे ,
मेरा साथ अगर तू दे दे ,होंगे वारे न्यारे .
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मैं बेचूं हूँ रोज़ तरक्की ,तुझको ख्वाब दिखाकर ,
तू बेचे है आटा चावल ,कंकड़ धूल मिलाकर .
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मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,
तेरे घर से दूध में पानी ,आता दूध से ज्यादा .
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मैंने भला कहा क्या सबको ,तू झूठा मक्कार ,
अब मेरे साथ में मेरे जैसा ,करना मेरे यार .
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जैसे तेरी चलवाई है ,मेरी तू चलवाना ,
अबकी बार मुझी को अपनी ,सारी वोट दिलाना .
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नेताओं के भेदभाव को ,दोस्त न तू अपनाना ,
तेरे आगे हाथ मैं जोडूं ,मुझे न भूल जाना .
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हाथ मिलकर गले लगाकर ,चले मियां जी आगे ,
पकड़के माथा दोस्त सोचता ,क्या देखा जब जागे .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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