शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,


Bharatiya Janata PartyNarendra Modi
सरज़मीन नीलाम करा रहे हैं ये ,
सरफ़रोश बन दिखा रहे हैं ये ,
सरसब्ज़ मुल्क के बनने को सरबराह
सरगोशी खुलेआम किये जा रहे हैं ये .
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मैकश हैं गफलती में जिए जा रहे हैं ये,
तसल्ली तमाशाइयों से पा रहे हैं ये ,
अवाम के जज़्बात की मजहब से नज़दीकी
जरिया सियासी राह का बना रहे हैं ये .
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ईमान में लेकर फरेब आ रहे हैं ये ,
मजहब को सियासत में रँगे जा रहे हैं ये ,
वक़्त इंतखाब का अब आ रहा करीब
वोटें बनाने हमको चले आ रहे हैं ये .
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बेइंतहां आज़ादी यहाँ पा रहे हैं ये ,
इज़हारे-ख्यालात किये जा रहे हैं ये ,
ज़मीन अपने पैरों के नीचे खिसक रही
फिकरे मुख़ालिफ़ों पे कसे जा रहे हैं ये .
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फिरकापरस्त ताकतें उकसा रहे हैं ये ,
फिरंगी दुश्मनों से मिले जा रहे हैं ये ,
कुर्बानियां जो दे रहे हैं मुल्क की खातिर
उन्हीं को दाग-ए-मुल्क कहे जा रहे हैं ये .
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इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,
तहज़ीब तार-तार किये जा रहे हैं ये ,
खौफ का जरिया बनी हैं इनकी खिदमतें
मर्दानगी कत्लेआम से दिखा रहे हैं ये .
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मज़रूह ज़म्हूरियत किये जा रहे हैं ये ,
मखौल मजहबों का किये जा रहे हैं ये ,
मज़म्मत करे ''शालिनी'' अब इनकी खुलेआम
बेख़ौफ़ सबका खून पिए जा रहे हैं ये .
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शब्दार्थ-सरबराह-प्रबंधक ,फिकरे-छलभरी बात ,तहम्मुल-सहनशीलता .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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