सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

खिले कमल है कीचड में ही -हाथ से नाल जुडी है .


आधी बांह का कुरता पहने ,उलटे हाथ घडी है ,
सिर पर पगड़ी पहन सुनहरी ,त्यौरी चढ़ी पड़ी है .
...................................................................
अपने घर को छोड़ के भागे ,बाप का माल हड़पने ,
काम पड़े पर कहे तुनककर ,मेरी नहीं अड़ी है .
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खुद के काम के ढोल बजाये ,और में कमी निकाले ,
अपनी बात की तारीफों की आदत इसे बड़ी है .
....................................
शीशे के घर में रहकर ये ,मारे कंकड़ पत्थर ,
भूल गया खुद उसकी मूरत ,लाठी लिए खड़ी है .
.........................
अपने दम आगे बढ़ने की ,हिम्मत नहीं है जिसमे ,
हाथ बांधकर वह हस्ती ही ,करने नक़ल बढ़ी है .
.........................................
जिस ताकत ने किया मुल्क का ,नाम जहाँ में ऊँचा ,
उसे मिटाने की सौगंध ले ,थामी हाथ छड़ी है .
........................................
ख़तम अगर करने की कुव्वत ,ख़तम करो मक्कारी ,
जो सत्ता की दहलीजों में,दीमक लगी कड़ी है .
.................................................................
खिले कमल है कीचड में ही ,सबने यहाँ है देखा ,
प्रभ चरण छूने को ''शालिनी'' हाथ से नाल जुडी है .
..........

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

10 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रोचक व सामयिक रचना

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

लाजबाब,बेहतरीन प्रस्तुति...!शालिनी जी ...

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06shikhakaushik ने कहा…

nice

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और उत्कृष्ट प्रस्तुति, धन्यबाद .

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-02-2014) को "गाँडीव पड़ा लाचार " (चर्चा मंच-1521) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-02-2014) को "गाँडीव पड़ा लाचार " (चर्चा मंच-1521) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मन के - मनके ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

मन के - मनके ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

मन के - मनके ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

मन के - मनके ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

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