रविवार, 1 जून 2014

प्रथम पाठशाला -प्रथम शिक्षक !

सोच
कारण निर्माण की
कारण विध्वंस की
सकारात्मक है
निर्माण करेगी ,
नकारात्मक है
करेगी विध्वंस ,
सोच का
बनना
संस्कार पर निर्भर ,
संस्कार मिलें
परिवार से ,
परिवार के संस्कार
बोये
माँ का प्यार
कहते हैं सभी
जानें हैं सभी
इसीलिए
परिवार प्रथम पाठशाला
माँ प्रथम शिक्षक !
.................................
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

11 टिप्‍पणियां:

Digamber Naswa ने कहा…

सहमत ...माँ ही प्रथम गुरु ... जो हाथ पकड़ कर सब कुछ सिखाती है ... निस्वार्थ भाव से ..

Anita ने कहा…

सही कहा है

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

ये छापें तो आजीवन साथ रहती हैं -माँ से मिले संस्कार ही आगे की नींव बनते हैं.

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

ये छापें तो आजीवन साथ रहती हैं -माँ से मिले संस्कार ही आगे की नींव बनते हैं.

Yashwant Yash ने कहा…

कल 05/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

vibha rani Shrivastava ने कहा…

सहमत हूँ
गज़ब की लेखनी
सादर

Smita Singh ने कहा…

सही कहा है

Smita Singh ने कहा…

very nice

Anusha Mishra ने कहा…

सही कहा है
बहुत सुंदर

Asha Joglekar ने कहा…

शिक्षक दिवस पर सुंदर रचना। माँ ही प्रथम गुरु है।

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

sahi bat .....shayad antim shikshak bhi ma hi hai ....

हस्ती ....... जिसके कदम पर ज़माना पड़ा.

कुर्सियां,मेज और मोटर साइकिल      नजर आती हैं हर तरफ और चलती फिरती जिंदगी      मात्र भागती हुई      जमानत के लिए      निषेधाज्ञा के...