सोमवार, 1 जून 2015

पर्यावरण दिवस पर धरती माँ की चेतावनी



दुश्मन न बनो अपने ,ये बात जान लो ,
कुदरत को खेल खुद से ,न बर्दाश्त जान लो .


चादर से बाहर अपने ,न पैर पसारो,
बिगड़ी जो इसकी सूरत ,देगी घात जान लो .


निशदिन ये पेड़ काट ,बनाते इमारते ,
सीमा सहन की तोड़ ,रौंदेगी गात जान लो .


शहंशाह बन पा रहे ,जो आज चांदनी ,
करके ख़तम हवस को ,देगी रात जान लो .


जो बोओगे काटोगे वही कहती ''शालिनी ''
कुदरत अगर ये बिगड़ी ,मिले मौत जान लो .


शालिनी कौशिक

3 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सही चेताया है
जागो अभी समय है!

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सही चेताया है
जागो अभी समय है!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति का सम्मान करना ही होगा।

हस्ती ....... जिसके कदम पर ज़माना पड़ा.

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