क्या करेगी जन्म ले बेटी .....


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क्या करेगी जन्म ले बेटी यहाँ
साँस लेने के काबिल फिजा नहीं ,
इस अँधेरे को जो दूर कर सके
ऐसा एक भी रोशन दिया नहीं !
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क्या करेगी तरक्की की सोचकर
तेरे लिए ये जहाँ बना नहीं ,
हौसलों को तेरे जो पर दे सके
ऐसा दिलचला कोई मिला नहीं !
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क्या करेगी सोच साथ देने की
तेरी नहीं कोई ज़रुरत यहाँ ,
कद्र जो तेरी मदद की कर सके
ऐसा कदरदान है हुआ नहीं  !
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क्या करेगी उनके ग़मों को बांटकर
तुझसे साझा उन्होंने किये नहीं ,
सह रही जो सदियों से तू आज तक
उनका साझीदार है यहाँ नहीं  !
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''शालिनी''ही क्या अनेकों बेटियां
बख्तरों में बंद हो आई यहाँ ,
मुजरिमों की जिंदगी क्यूं है मिली
इसका खुलासा कभी किया नहीं !
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शब्दार्थ -दिलचला-दिलेर ,साहसी .बख्तर-लोहे का कवच .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

टिप्पणियाँ

Arshiya Ali ने कहा…
सचमुच बहुत ज्वलंत प्रश्न। समाज को इसका उत्तर खोजना ही होगा।
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लज़ीज़ खाना: जी ललचाए, रहा न जाए!!
Dilbag Virk ने कहा…
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11 - 06 - 2015 को चर्चा मंच पर बरसों मेघा { चर्चा - 2003 } में दिया जाएगा
धन्यवाद
रश्मि शर्मा ने कहा…
बि‍ल्‍कुल सही लि‍खा है..;बेटि‍यों के लि‍ए अब भी खुला आसमान नहीं है।
Madan Mohan Saxena ने कहा…
भावपूर्ण प्रस्तुति.
dj ने कहा…
बहुत भावनात्मक एवं सार्थक प्रस्तुति

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