मंगलवार, 2 जून 2015

तो ये हैं मोदी जी के अच्छे दिन


मॉनसून देगा इस बार भी धोखा
'अच्छे दिन ' जाने वाले हैं ,मौसम विभाग ने दिए सूखे के संकेत ,17 साल पुराने केस में BJP विधायक समेत 15 दोषी,पी ओ के में पाक की 'चुनावी चाल' से भारत नाराज़ ,हद है! चलती रोडवेज बस में युवती से फिर गंदी हरकत [सभी अमर उजाला से साभार ]
रोपड़ व काठगढ़ के बीच युवक ने बदतमीजी शुरू कर दी
प्रधानमंत्री मोदी जी कहते हैं कि 'देश के अच्छे दिन आ गए ''.वे देश में अच्छे दिन लाने का वादा कर सत्ता में आये हैं और ये तो साफ है कि वे अपने वादे को पूरा करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं और इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी फ़ौज को लगा रखा है लेकिन सच्चाई को नकारना न तो उनके हित में है और न ही देश के .समाचार पत्र के जिस पेज पर उनकी अच्छे दिन आने की सूचना को मात्र एक छोटा कॉलम मिला है उसी पेज पर इस सच्चाई को पूरा पेज मिला है कि देश की वास्तविक स्थिति इस वक्त क्या है ?'' देवबंद के पी.एन.बी.में १०.६१ लाख रूपये की डकैती ,बी.एस.एन .एल .कर्मी ने दफ्तर में जहर खाकर दी जान ,तीसरी बार लीक हुआ यूपीटीयू का पेपर '' ये तो आज के समाचार हैं और समाचार तो अभी जानते ही हैं -पश्चिमी यु पी में बारिश से फसल बर्बाद ,किसानों द्वारा रोज आत्महत्याओं का बढ़ता आंकड़ा ,रोज बढ़ती जा रही रेप की घटनाएँ ,दंगों के कारण खाली होते वेस्ट यु पी के कसबे , पाकिस्तान की बढ़ती जा रही कारगुजारियां ,महंगाई के कारण आम आदमी से छिनती रोटी -दाल और न जाने क्या क्या रोज समाचार पत्रों में पढ़ रहे हैं और स्वयं अपने आस पास देख भी रहे हैं अगर ऐसे हालत को देखते हुए देश के अच्छे दिन कहे जा सकते हैं और एक विशाल बहुमत लेकर जननायक के तौर पर उभरने वाले मोदी जी को वे ' देश के अच्छे दिन ' लग सकते हैं तो शायद ऐसा ही होगा क्योंकि वे गलत कैसे हो सकते हैं उनके जैसा प्रधानमंत्री न पहले कभी देश को मिला है और न ही मिलेगा जो जनता के जलते दिल-उजड़ती ज़िंदगी को देश के अच्छे दिन कहेगा .इसलिए ऐसे में तो बस यही कहा जा सकता है -
''दुश्मन न करे दोस्त ने जो काम किया है ,
उम्र-भर का गम हमें ईनाम दिया है .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (04-06-2015) को "हम भारतीयों का डी एन ए - दिल का अजीब रिश्ता" (चर्चा अंक-1996) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Shalini Rastogi ने कहा…

एक तो यह बात समझ नहीं आ रही कि 60-65 सालों से सोये हुए लोगों की बेचैनी एक दम कैसे बढ़ गई... जो हालात दशकों में बिगड़े हैं उन्हें एक साल में कैसे संभला जा सकता है .. और तो और खराब मानसून हो.. या कोई अन्य प्राकृतइक आपदा... हर चीज़ के लिए मोदी जी ही ज़िम्मेदार हैं अब तो .... क्या यह उतावालापना .. यह मानसिकता उचित है?

abhishek shukla ने कहा…

उम्मीद..उम्मीद और बस उम्मीद।

मन के - मनके ने कहा…

शायद अखबार पहले ेभी इसी रंग में थे---कह नहीं सकते रंग बदला है या नहीं??
हां--मारा-मारी का रंग गहराया अवश्य है.
प्रार्थना ही हमारे बस की बात है.

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