शनिवार, 6 जून 2015

मैगी -ये भारत है भाई

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भारत में मैगी के आयात और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. फ़ूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने शुक्रवार को नेस्ले को मैगी के नौ उत्पादों को बाजार से हटाने को कहा है और फलस्वरूप समाचारपत्र और आम जनता में मैगी के लिए मौन व्रत और फेयरवेल पार्टी की चर्चाएं हो रही हैं और एक तरह से लगने लगा है कि वाकई अब मैगी का बाजार इंडिया से ख़त्म हो जायेगा किन्तु हम अगर अपने देश की इसी पार्टी के भूतपूर्व कार्यकाल पर नज़र डालें तो उसी के समय में कोक-पेप्सी पर एक गैर सरकारी संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट की ज्यादा पेस्टी-साइड्स की रिपोर्ट पर सुषमा स्वराज जी ,जो उस वक्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थी ,ने प्रतिबन्ध लगाया था और जाँच के आदेश दिए थे -

http://www.outlookindia.com/printarticle.aspx?221087
और आज स्थिति ये है कि ये दोनों ही उत्पाद भारत के विभिन्न राज्यों की गली मोहल्लों में धड़ाके से बिक रहे हैं और कहीं कोई रोक टोक नहीं है ऐसे में जो हमारे देश का चलन है ,आम माफ़ी का उसका फायदा इन दोनों उत्पादों को मिला है ,जो राजनीति है अपना पेट भरने के बाद जो अपनी आँखें बंद कर लेती है वही इस उत्पाद के विषय में भी निश्चित रूप में होगा और ये निश्चित है कि मैगी का भी कोक और पेप्सी के समान न तो फेयरवेल होगा और न भारत में उसके बाजार का समापन .ज़रुरत बस राजनीति का पेट भरने की है तब असुरक्षा सुरक्षा बन जाएगी और खतरनाक चीज जीवन रक्षक इसलिए देखिये और इंतज़ार कीजिये . Image result for pepsi and coke selling figures chart in india
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-06-2015) को "गंगा के लिए अब कोई भगीरथ नहीं" (चर्चा अंक-1999) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Onkar ने कहा…

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