मंगलवार, 30 जून 2015

आधुनिक महिलाएं और मासूम बच्चियों के प्रति यौन अपराध




''आंधी ने तिनका तिनका नशेमन का कर दिया ,
पलभर में एक परिंदे की मेहनत बिखर गयी .''
फखरुल आलम का यह शेर उजागर कर गया मेरे मन में उन हालातों को जिनमे गलत कुछ भी हो जिम्मेदार नारी को ठहराया जाता है जिसका सम्पूर्ण जीवन अपने परिवार के लिए त्याग और समर्पण पर आधारित रहता है .किसी भी सराहनीय काम का श्रेय लेने के नाम पर जब सम्पूर्ण समाज विशेष रूप से पुरुष वर्चस्ववादी समाज आगे बढ़ सीना तान कर खड़ा हो जाता है तो समाज में घटती अशोभनीय इन वारदातों का ठीकरा नारी के सिर क्यों फोड़ते हैं ?जबकि मासूम बच्चियां जिस यौन दुर्व्यवहार की शिकार हो रही हैं उसका कर्ता-धर्ता तो पुरुष ही है .
आधुनिक महिलाएं आज निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रही हैं और ये बात पुरुष सत्तात्मक समाज को फूटी आँख भी नहीं सुहाती और इसलिए सबसे अधिक उसकी वेशभूषा को ही निशाना बनाया जाता है .सबसे ज्यादा आलोचना उसके वस्त्र चयन को लेकर ही होती है .जैसे कि एक पुराने फ़िल्मी गाने में कहा गया-
''पहले तो था चोला बुरका,
फिर कट कट के वो हुआ कुरता ,
चोले की अब चोली है बनी
चोली के आगे क्या होगा ?
ये फैशन यूँ ही बढ़ता गया ,
और कपडा तन से घटता गया ,
तो फिर उसके बाद ......''

यौन दुर्व्यवहार के लिए कपड़ों को दोषी ठहराया जा रहा है .यह धारणा भी बलवती की जा रही है कि यदि दो लड़कियां साथ जा रही हैं और उनमे से एक पूरी तरह से ढकी-छिपी हो और दूसरी आधुनिक वस्त्रों में हो तो वह आधुनिक वस्त्रों वाली ही छेड़खानी का शिकार होती है और यदि इसी धारणा पर  विश्वास किया जाये तो दिल्ली गैंगरेप कांड तो होना ही नहीं चाहिए था  क्योंकि उसमे दामिनी के भाई के अनुसार वह लम्बे गर्म ओवरकोट में थी .
ऐसे में मासूम बच्चियों के साथ यौन दुर्व्यवहार के लिए महिलाओं के आधुनिक होने को यदि उत्तरदायी ठहराने की कोशिश की जाती है तो ये सरासर नाइंसाफी होगी समस्त नारी समुदाय के साथ, क्योंकि बच्चियों के मामले में पहले तो ये मासूम न तो कपड़ों के सम्बन्ध में कोई समझ रखती हैं और न ही यह जानती हैं कि जो व्यवहार उनके साथ किया जा रहा है वह एक गंभीर अपराध है .हम स्वयं देखते हैं कि बच्चे कैसे भी कहीं घूम फिर लेते हैं और खेलते रहते हैं वे अगर इन दुनियावी  बातों में फसेंगे तो बचपन शब्द के मायने ही क्या रह जायेंगे जो जिंदगी के औपचारिक अनौपचारिक तथ्यों से अंजान रहता है और एक शांत खुशहाल समय गुजारता है .
ऐसे में ये सोचना कि बच्चे ये देखेंगे या महसूस करेंगे कि उनकी वेशभूषा अश्लील है या उत्तेजनात्मक ,मात्र कोरी कल्पना है साथ ही उनके बारे में सोचते हुए उनकी माँ ये सोचेगी कि मेरा बच्चा इस तरह अभद्र लग रहा है और हर वक्त घर में भी उसके कपड़ों को देखती रहेगी तो असम्भव ही कहा जायगा क्योंकि जो बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं वे इतने छोटे हैं कि उनके बारे में उनके बड़े ये कल्पना भी नहीं कर सकते कि उनके साथ कोई ऐसा करने की सोच भी सकता है .इतनी छोटी बच्चियों के शरीर भले ही कपड़ों से ढके हो या न ढके हों कभी भी उनकी यौन प्रताड़ना का कारण नहीं होते ,उनकी यौन प्रताड़ना का एकमात्र कारण है ''उनकी मासूमियत ,जिसके कारण वे न तो उस व्यवहार को जान पाते हैं और न ही किसी को उसके बारे में बता पाने की स्थिति में होते हैं .जैसे कि मोबिन धीरज लिखते हैं -
''मुहं से निकले तो ज़माने को पता चलता है ,
घुट के रह जाये जो आवाज कोई क्या जाने .''
बिल्कुल यही कारण है कि वहशी दरिन्दे को अपनी हवस बुझाने के लिए इन बच्चियों के शरीर के रूप में एक महिला का शरीर मिलता है और उसका शिकार वह बच्ची न तो उसका प्रतिरोध ही कर सकती है और न ही उसका अपराध दुनिया के सामने उजागर .

इसके साथ ही आधुनिक महिलाओं पर यह जिम्मेदारी डाली जा रही है तो ये नितान्त अनुचित है क्योंकि यह कृत्य इन बच्चियों के साथ या तो घर के किसी सदस्य द्वारा ,या स्कूल के किसी कर्मचारी या शिक्षक द्वारा ,या किसी पडौसी द्वारा किया जाता है और ऐसे में ये कहना कि वह उसकी वेशभूषा देख उसके साथ ऐसा कर गया ,पूर्ण रूप से गलत है यहाँ महिलाओं की आधुनिकता का तनिक भी प्रभाव नहीं कहा जा सकता .
मासूम बच्चियों के प्रति यौन दुर्व्यवहार का पूर्ण रूप से जिम्मेदार हमारा समाज और उसकी सामंतवादी सोच है ,जिसमे पुरुषों के लिए किसी संस्कार की कोई आवश्यकता नहीं समझी जाती ,उनके लिए किसी नैतिक शिक्षा को ज़रूरी नहीं माना  जाता . यह सब इसी सोच का दुष्परिणाम है .ऐसे में समाज में जो थोड़ी बहुत नैतिकता बची है वह नारी समुदाय की शक्ति के फलस्वरूप है और यदि नारी को इसी तरह से दबाने की कोशिशें जारी रही तो वह भी नहीं बचेंगी और तब क्या हल होगा उनकी सहज कल्पना की जा सकती है .इसलिए नारी पर इस तरह से दोषारोपण करने वालो को ''नवाज़ देवबंदी''के इस शेर को ध्यान में रखना होगा -
''समंदर के किसी भी पार रहना ,
मगर तूफान से होशियार रहना ,
लगाओ तुम मेरी कीमत लगाओ
मगर बिकने को भी तैयार रहना .''


शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 28 जून 2015

दुष्कर्म - नारी नहीं है बेचारी


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दुष्कर्म आज ही नहीं सदियों से नारी जीवन के लिए त्रासदी रहा है .कभी इक्का-दुक्का ही सुनाई पड़ने वाली ये घटनाएँ आज सूचना-संचार क्रांति के कारण एक सुनामी की तरह नज़र आ रही हैं और नारी जीवन पर बरपाये कहर का वास्तविक परिदृश्य दिखा रही हैं .
भारतीय दंड सहिंता में दुष्कर्म ये है -
भारतीय दंड संहिता १८६० का अध्याय १६ का उप-अध्याय ''यौन अपराध ''से सम्बंधित है जिसमे धारा ३७५ कहती है-
Central Government Act
Section 375 in The Indian Penal Code, 1860
375. Rape.-- A man is said to commit" rape" who, except in the case hereinafter excepted, has sexual intercourse with a woman under circumstances falling under any of the six following descriptions:-
First.- Against her will.
Secondly.- Without her consent.
Thirdly.- With her consent, when her consent has been obtained by putting her or any person in whom she is interested in fear of death or of hurt.
Fourthly.- With her consent, when the man knows that he is not her husband, and that her consent is given because she believes that he is another man to whom she is or believes herself to be lawfully married.
Fifthly.- With her consent, when, at the time of giving such consent, by reason of unsoundness of mind or intoxication or the administration by him personally or through another of any stupefying or unwholesome substance, she is unable to understand the nature and consequences of that to which she gives consent.
Sixthly.- With or without her consent, when she is under sixteen years of age.
Explanation.- Penetration is sufficient to constitute the sexual intercourse necessary to the offence of rape.
Exception.- Sexual intercourse by a man with his own wife, the wife not being under fifteen years of age, is not rape.
ये आंकड़े इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि आज ये घटनाएँ किस कदर नारी जीवन को गहरे अंधकार में धकेल रही हैं -
अश्लीलता का असर -
राज्य                २०१२              २०१३
आंध्र प्रदेश          २८                  २३४
केरल                 १४७                १७७
उत्तर प्रदेश         २६                  १५९
महाराष्ट्र            ७६                  १२२
असम                ०                    १११
भारत               ५८९                  १२०३
-सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज मामले [पोर्नोग्राफी के चलते जहाँ महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा बढ़ रही है वहीं मासूम भी इसके दुष्प्रभाव से बचे हुए नहीं हैं .आंकड़े लोकसभा ]
और ये हैं कुछ गंभीर मामले -
१- दामिनी गैंगरेप केस -१६ दिसंबर २०१२
२-ग्वालियर में महिला जज द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप
३- विशाखापट्नम में नौसेना में महिला अफसर [सब लेफ्टिनेंट महिला अफसर ]द्वारा कमांडर रैंक के अफसर पर   यौन प्रताड़ना का आरोप
४- शामली जिले में ९० वर्षीय महिला से रिश्ते के पौत्र द्वारा रेप
५- बदायूं  में दो बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या
६- बंगलुरु में शहर के एक नामी गिरामी स्कूल में एक छह साल की बच्ची के साथ बलात्कार
७- बंगलुरु में आर्मी एविएशन कॉर्प्स में तैनात एक महिला अधिकारी की इज़्ज़त लूटने का प्रयास .
ये तो चंद घटनाएँ हैं मात्र उदाहरण उस अभिशाप का जो नारी जीवन को मर्मान्तक ,ह्रदय विदारक चोट देता है किन्तु ये समाज और ये पुरुष जाति इस घटना को मात्र संवाद सहानुभूति तक ही सीमित कर देती है .गावों में जहाँ दुष्कर्मी को कभी पांच जूते मारकर व् कभी गधे पर मुंह काला करके गावं में घुमाने तो कभी कुछ रुपयों का जुर्माने की सजा दी जाकर बरी कर दिया जाता है वहीँ इस तरह की घटना पर रक्षा मंत्री /वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी द्वारा 'एक छोटी सी घटना ''जैसी संवेदना हीन प्रतिक्रिया दी जाती है .
किन्तु जैसे कि सहानुभूति कुछ देर के लिए दर्द को भुला तो सकती है खत्म नहीं कर सकती वैसे ही ऐसे में यदि इस घटना पर नारी को सहानुभूति मिल भी जाये तो उसकी अंतहीन पीड़ा का खात्मा नहीं हो सकता उसे इस सम्बन्ध में स्वयं को मजबूत करना होगा और इस ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा होना ही होगा .

नारी नहीं है बेचारी
साक्षी नाम की १५ वर्षीय लड़की और उत्तर प्रदेश का सी.ओ.स्तर का अधिकारी अमरजीत शाही ,कोई सोच भी नहीं सकता था कि एक १५ वर्षीय नाजुक कोमल सी लड़की उसका मुकाबला कर पायेगी पर उसने किया और अपना नाम तक नहीं बदला क्योंकि उसका मानना है कि मुजरिम वह नहीं उसका उत्पीड़न करने वाला  है और उसी की हिम्मत का परिणाम है कि १४ अगस्त को शाही को अपहरण ,बलात्कार और आतंकित करने के जुर्म में दोषी पाया गया और तीन दिन बाद उसे १० साल की सख्त कारावास और ६५,००० रूपये का अर्थ दंड भरने की  सजा सुनाई गयी.
शामली में ९० वर्षीय वृद्धा ने कोर्ट में रेप की दास्तान बयान की और उसके दुष्कर्मी को १० साल का कारावास मिला .
बंगलुरु में महिला अधिकारी की इज़्ज़त लूटने के प्रयास में जवान बर्खास्त .
कंकरखेड़ा मेरठ की आशा कहती हैं कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ कानून से काम चलने वाला नहीं .कानून की कमी नहीं पर इसके लिए समाज को भूमिका निभानी होगी .लाडलो पर अंकुश लगाना होगा .
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में २०१३ में दर्ज किये गए रेप के मामले में प्रत्येक १०० मामलों में ९५ दोषी व्यक्ति पीड़िताओं के परिचित ही थे .अभी हाल ही में घटित लखनऊ निर्भया गैंगरेप में भी दोषी मृतका का परिचित ही था .इसलिए ऐसे में महिलाओं की जिम्मेदारी  बनती है कि वे सतर्क रहे और संबंधों को एक सीमा में ही रखें .
बच्चों की शिकायतों पर गौर करें और ज़रूरी कदम उठायें संबंधों को मात्र संबंध ही रहने  दें न कि अपने ऊपर बोझ बांयें  .
सामाजिक रूप से बच्चों की और अपनी दोस्ती को घर के बाहर ही निभाने पर जोर दें और बच्चों से उनके दोस्तों के बारे में जानकारी  लेती रहें .
यही  नहीं कानून ने भी इस संबंध में नारी का साथ निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है और भले ही यह अपराध उन्हें   तोड़ने की लाख कोशिश करे किन्तु वे टूटें नहीं बल्कि इसका डटकर मुकाबला करें .
आज यदि देखा जाये तो महिलाओं के लिए घर से बाहर जाकर काम करना ज़रूरी हो गया है और इसका एक परिणाम तो ये हुआ है कि स्त्री सशक्तिकरण के कार्य बढ़ गए है और स्त्री का आगे बढ़ने में भी तेज़ी आई है किन्तु इसके दुष्परिणाम भी कम नहीं हुए हैं जहाँ एक तरफ महिलाओं को कार्यस्थल के बाहर के लोगों से खतरा बना हुआ है वहीँ कार्यस्थल पर भी यौन शोषण को लेकर  उसे नित्य-प्रति नए खतरों का सामना करना पड़ता है .
कानून में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पहले भी काफी सतर्कता बरती गयी हैं किन्तु फिर भी इन घटनाओं पर अंकुश लगाया जाना संभव  नहीं हो पाया है.इस सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय का ''विशाखा बनाम राजस्थान राज्य ए.आई.आर.१९९७ एस.सी.सी.३०११ ''का निर्णय विशेष महत्व रखता है इस केस में सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने महिलाओं के प्रति काम के स्थान में होने वाले यौन उत्पीडन को रोकने के लिए विस्तृत मार्गदर्शक सिद्धांत विहित किये हैं .न्यायालय ने यह कहा ''कि देश की वर्तमान सिविल विधियाँ या अपराधिक विधियाँ काम के स्थान पर महिलाओं के यौन शोषण से बचाने के लिए पर्याप्त संरक्षण प्रदान नहीं करती हैं और इसके लिए विधि बनाने में काफी समय लगेगा ;अतः जब तक विधान मंडल समुचित विधि नहीं बनाता है न्यायालय द्वारा विहित मार्गदर्शक सिद्धांत को लागू किया जायेगा .
न्यायालय ने ये भी निर्णय दिया कि ''प्रत्येक नियोक्ता या अन्य व्यक्तियों का यह कि काम के स्थान या अन्य स्थानों में चाहे प्राईवेट हो या पब्लिक ,श्रमजीवी महिलाओं के यौन उत्पीडन को रोकने के लिए समुचित उपाय करे .इस मामले में महिलाओं के अनु.१४,१९ और २१ में प्रदत्त मूल अधिकारों को लागू करने के लिए विशाखा नाम की एक गैर सरकारी संस्था ने लोकहित वाद न्यायालय में फाईल किया था .याचिका फाईल करने का तत्कालीन कारण राजस्थान राज्य में एक सामाजिक महिला कार्यकर्ता के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना थी .न्यायालय ने अपने निर्णय में निम्नलिखित मार्गदर्शक सिद्धांत विहित किये-
[१] सभी नियोक्ता या अन्य व्यक्ति जो काम के स्थान के प्रभारी हैं उन्हें  चाहे वे प्राईवेट क्षेत्र में हों या पब्लिक क्षेत्र में ,अपने सामान्य दायित्वों के होते हुए महिलाओं के प्रति यौन उत्पीडन को रोकने के लिए समुचित कदम उठाना चाहिए.
[अ] यौन उत्पीडन पर अभिव्यक्त रोक लगाना जिसमे निम्न बातें शामिल हैं - सम्बन्ध और प्रस्ताव,उसके लिए आगे बढ़ना ,यौन सम्बन्ध के लिए मांग या प्रार्थना करना ,यौन सम्बन्धी छींटाकशी करना ,अश्लील साहित्य या कोई अन्य शारीरिक मौखिक या यौन सम्बन्धी मौन आचरण को दिखाना आदि.
[बी]सरकारी या सार्वजानिक क्षेत्र के निकायों के आचरण और अनुशासन सम्बन्धी नियम [१] सभी नियोक्ता या अन्य व्यक्ति जो काम के स्थान के प्रभारी हैं उन्हें  चाहे वे प्राईवेट क्षेत्र में हों या पब्लिक क्षेत्र में ,अपने सामान्य दायित्वों के होते हुए महिलाओं के प्रति यौन उत्पीडन को रोकने के लिए समुचित कदम उठाना चाहिए.
[अ] यौन उत्पीडन पर अभिव्यक्त रोक लगाना जिसमे निम्न बातें शामिल हैं -शारीरिक सम्बन्ध और प्रस्ताव,उसके लिए आगे बढ़ना ,यौन सम्बन्ध के लिए मांग या प्रार्थना करना ,यौन सम्बन्धी छींटाकशी करना ,अश्लील साहित्य या कोई अन्य शारीरिक मौखिक या यौन सम्बन्धी मौन आचरण को दिखाना आदि.
[बी]सरकारी या सार्वजानिक क्षेत्र के निकायों के आचरण और अनुशासन सम्बन्धी नियम या विनियमों में यौन उत्पीडन रोकने सम्बन्धी नियम शामिल किये जाने चाहिए और ऐसे नियमों में दोषी व्यक्तियों के लिए समुचित दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए .
[स] प्राईवेट क्षेत्र के नियोक्ताओं के सम्बन्ध में औद्योगिक नियोजन [standing order  ]अधिनियम १९४६ के अधीन ऐसे निषेधों को शामिल किया जाना चाहिए.
[द] महिलाओं को काम,आराम,स्वास्थ्य और स्वास्थ्य विज्ञानं के सम्बन्ध में समुचित परिस्थितियों का प्रावधान होना चाहिए और यह सुनिश्चित किया  जाना चाहिए  कि महिलाओं को काम के स्थान में कोई विद्वेष पूर्ण वातावरण न हो उनके मन में ऐसा विश्वास करने का कारण हो कि वे नियोजन आदि के मामले में अलाभकारी स्थिति में हैं .
[२] जहाँ ऐसा आचरण भारतीय दंड सहिंता या किसी अन्य विधि के अधीन विशिष्ट अपराध होता हो तो नियोक्ता को विधि के अनुसार उसके विरुद्ध समुचित प्राधिकारी को शिकायत करके समुचित कार्यवाही प्रारंभ करनी चाहिए .
[३]यौन उत्पीडन की शिकार महिला को अपना या उत्पीडनकर्ता  का स्थानांतरण करवाने का विकल्प होना चाहिए.
न्यायालय ने कहा कि ''किसी वृत्ति ,व्यापर या पेशा के चलाने के लिए सुरक्षित काम का वातावरण होना चाहिए .''प्राण के अधिकार का तात्पर्य मानव गरिमा से जीवन जीना है ऐसी सुरक्षा और गरिमा की सुरक्षा को समुचित कानून द्वारा सुनिश्चित कराने तथा लागू करने का प्रमुख दायित्व विधान मंडल और कार्यपालिका का है किन्तु जब कभी न्यायालय के समक्ष अनु.३२ के अधीन महिलाओं के यौन उत्पीडन का मामला लाया जाता है तो उनके मूल अधिकारों की संरक्षा के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत विहित करना ,जब तक कि  समुचित विधान नहीं बनाये जाते उच्चतम न्यायालय का संविधानिक कर्त्तव्य है.
- -इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने  दिल्ली डेमोक्रेटिक वर्किंग विमेंस फोरम बनाम भारत संघ [१९९५] एस.सी.१४ में पुलिस स्टेशन पर पीड़िता को विधिक सहायता की उपलब्धता की जानकारी दिया जाना ,पीड़ित व्यक्ति की पहचान गुप्त रखा जाना और आपराधिक क्षति प्रतिकर बोर्ड के गठन का प्रस्ताव रखा है .
-भारतीय दंड सहिंता की धारा ३७६ में विभिन्न प्रकार के बलात्कार के लिए कठोर कारावास जिसकी अवधि १० वर्ष से काम नहीं होगी किन्तु जो आजीवन तक हो सकेगी और जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है .
-महिलाओं की मदद के लिए विभिन्न तरह के और भी उपाय हैं -
-आज की  सबसे लोकप्रिय वेबसाइट फेसबुक पर महिलाओं की मदद के लिए पेज है -
helpnarishakti@yahoo.com
-राष्ट्रीय महिला आयोग से भी महिलाएं इस सम्बन्ध में संपर्क कर सकती हैं उसका नंबर है -
011-23237166,23236988
-राष्ट्रीय महिला आयोग को शिकायत इस नंबर पर की जा सकती है -
23219750
-दिल्ली निवासी महिलाएं दिल्ली राज्य महिला आयोग से इस नंबर पर संपर्क कर सकती हैं -
011 -23379150  ,23378044
-उत्तर प्रदेश की महिलाएं अपने राज्य के महिला आयोग से इस नंबर पर संपर्क कर सकती हैं -
0522 -2305870 और ईमेल आई डी है -up.mahilaayog@yahoo.com
आज सरकार भी नारी सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और उसकी यह प्रतिबद्धता दिखती है अब दुष्कर्म पीड़िताओं की मदद के लिए निर्भया केंद्र खुलेंगे जिसमे पीड़िताओं को २४ घंटे चिकित्सीय सहायता मिलेगी और जहाँ डाक्टर ,नर्स के आलावा वकील भी केन्द्रों पर मौजूद रहेंगे .यही नहीं अब सरकार गावों में खुले में शौच को भी इस समस्या से जोड़ रही है और मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस सम्बन्ध में त्वरित प्रबंध किये जाने के प्रति अपना दृढ संकल्प दिखाया है .
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने क्लिंटन फाउंडेशन के कार्यक्रम में कहा कि महिलाओं और लड़कियों में आर्थिक व् सामाजिक रूप से आगे बढ़ने की असीमित क्षमता है इसके लिए ज़रूरी है कि वे अपने निर्णय खुद लें और आज उन्हें दिखाना ही होगा कि ये कहर भी झेलकर वे आगे बढ़ती रहेंगी और इसका डटकर मुकाबला करती रहेंगी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शुक्रवार, 26 जून 2015

ललित मोदी तो मुझसे भी मिले थे तो क्या .....


प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा से मुलाकात का दावाप्रियंका गांधी
आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी का नया खुलासा कांग्रेस आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
पिछले कई दिनों से अपने बयानों से भाजपा और कांग्रेस नेताओं को परेशान कर रहे मोदी ने शुक्रवार को किए ट्वीट में कहा है कि लंदन में गांधी परिवार से मिलकर उन्हें खुशी होगी। लंदन के एक रेस्‍टोरेंट में प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा से मैं अलग-अलग मिल चुका हूं।
उधर प्रियंका का बयान ये है -
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका वाड्रा ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी से मुलाकात की बात से इनकार किया है। प्रियंका के दफ्तर ने शुक्रवार शाम को एक बयान जारी कर ललित मोदी के इस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह प्रियंका और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा से लंदन के एक रेस्तरां में मिले थे।
सवाल ये उठता है कि ललित मोदी एक भारतीय हैं और ललित कुमार मोदी, (जन्म नवंबर 29, 1963) इंडियन प्रीमियर लीग के अध्यक्ष और कमीशनर, चैंपियंस लीग के अध्यक्ष,BCCI के उपाध्यक्ष और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वह मोदी इंटरप्राइज़ेज़ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निर्देशक और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के कार्यकारी निर्देशक भी हैं।
जीवनी-
1963 में भारत में दिल्ली के एक मारवाड़ी परिवार में जन्में, ललित कुमार मोदी ने प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ कालेज, नैनीताल में अध्ययन किया। उन्होंने संयुक्त राज्य के ड्यूक विश्वविद्यालय में शिक्षा ली और 1986 में मार्केटिंग में स्नातक की डिग्री पायी.ललित मोदी एक अमीर बाप कृष्ण कुमार मोदी के बेटे हैं। कृष्ण कुमार ४००० करोड़ रुपयों की कीमत वाली मोदी समूह के अध्यक्ष हैं। ललित मोदी के दादा राज बहादुर गुजरमल मोदी ने मोदीनगर की स्थापना की थी।
पुरस्कार व मान्यताएं-
BCCI को वर्ष 2008 की भारत का सबसे अधिक उन्नतिशील कंपनी बनाने के लिए उन्हें "द बिज़नस स्टैण्डर्ड अवार्ड" से पुरस्कृत किया गया।
25 सितम्बर 2008 को उन्हें एशिया ब्रांड कांफ्रेंस द्वारा "ब्रांड बिल्डर ऑफ़ द इयर" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
26 सितम्बर 2008 को उन्हें CNBC आवाज़ द्वारा "द कनज्यूमर अवार्ड फॉर ट्रान्सफौर्मिंग क्रिकेट इन इंडिया" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
6 अक्टूबर 2008 को उन्हें NDTV प्रोफिट द्वारा "द मोस्ट इनोवेटिव बिज़नस लीडर इन इंडिया" के रूप में सम्मानित किया गया।
24 अक्टूबर 2008 को उन्हें फ्रोस्ट & सुलिवान ग्रोथ एक्सेलेंस अवार्ड्स फॉर "एक्सेलेन्स इन इनोवेशन" से सम्मानित किया गया।
8 नवम्बर 2008 को उन्हें "टीचर्स ऐचीवमेंट ऑफ़ द इयर अवार्ड" से सम्मानित किया गया।
12 नवम्बर 2008 को उन्हें "स्पोर्ट्स बिज़नस-रशमैन्स अवार्ड फॉर स्पोर्टस ईवेन्ट ईनोवेशन" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
22 जनवरी 2009 को उन्हें "CNBC बिज़नेस लीडर" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इंडिया टूडे पत्रिका के अनुसार वे भारत के 20 सबसे शक्तिशाली लोगों में सूचीबद्ध हैं। उन्हें इसलिए सम्मिलित किया गया क्योंकि 2005 में बोर्ड में उनके शामिल होने के बाद से BCCI के राजस्व में सात गुना वृद्धि हुई तथा इसलिए भी क्योंकि "क्रिकेट में कोई भी उनके खिलाफ नहीं जाना चाहता". वह एक क्रिकेट प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं![1] 2008 अगस्त अंक की प्रमुख खेल पत्रिका स्पोर्ट्स प्रो द्वारा वैश्विक आंकड़ों के खेल से जुड़े पावर लिस्ट में उनकी गणना 17 नंबर पर की गई। उन्हें बेस्ट रेन मेकर (पैसा निर्माता) के रूप में किसी भी खेल के क्षेत्र में विश्व भर के खेल के इतिहास में स्थान मिला. इतने कम समय में वह एक ऐसे खेल प्रशासक बने जिन्होंने अपने संगठन के लिए चार अरब अमरीकी डॉलर जुटाया है। इतना सब कुछ उन्होंने अवैतनिक क्षमता में रहते हुए किया। माइक एटथरटन ने द टेलीग्राफ में अपने लेख में उन्हें क्रिकेट के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में वर्णित किया है। टाइम मैगजिन्स जुलाई 2008, ने उन्हें 2008 के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खेल कार्यकारी अधिकारियों की सूची में 16 नंबर पर रखा है। अक्टूबर 2008 अंक के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पत्रिका बिज़नस वीक में ललित मोदी को पूरे विश्व में 25 सबसे शक्तिशाली खेल वैश्विक आंकड़ों की सूची में 19 नंबर पर स्थान मिला. ललित मोदी ने मोस्ट इनोवेटिव बिज़नस लीडर ऑफ़ इंडिया (भारत के सबसे नवप्रवर्तनशील व्यापारिक नेता) का NDTV पुरस्कार भी प्राप्त किया।
भारत की अग्रणी बिज़नस पत्रिका बिज़नस टूडे के नवंबर अंक ने अपने कवर पर मोदी को रखा और उसे भारत के सर्वश्रेष्ठ विपणक का नाम दिया. 31 दिसम्बर की वार्षिक स्पोर्ट्ज़पावर (SportzPower) सूची 2008 में वह 1 नंबर पर रहे और DNA अखबार ने भारत में 50 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में उन्हें 17 वें स्थान पर क्रमित किया। भारत से स्थानांतरित करने के लिए सिर्फ तीन सप्ताह की सूचना में उन्होंने बहुत सफलतापूर्वक दक्षिण अफ्रीका में 2009 में IPL-2 को आयोजित किया।
पारिवारिक खतरा और सुरक्षा
मार्च 2009 के अंत में मुंबई पुलिस ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील के गोली चलाने वाले आदमी रशीद मालाबारी को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ के दौरान उसने उजागर किया कि क्रिकेट के प्रमुख ललित मोदी, उनकी पत्नी मीनल और बेटे रूचिर की हत्या करने की योजना थी। इसी संदर्भ में सरकार की एक खुफिया एजेंसी ने छोटा शकील और उसके मालिक दाऊद इब्राहिम के बीच फोन पर हो रही बातचीत को सुना कि 4 हत्यारों को किराये पर लेकर मोदी और उनके परिवार की हत्या दक्षिण अफ्रीका या भारत में कर दी जाये. खुफिया ब्यूरो के इलेक्ट्रॉनिक निगरानी रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि छोटा शकील ने अपने निशानेबाजों से कहा कि मोदी को मुंबई या दक्षिण अफ्रीका में खत्म कर दो. "उसको खत्म कर दो इंडिया या साउथ अफ्रीका में " यही आदेश है। इस धमकी का कारण यह है कि मोदी ने IPL 2 में पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों के खेलने पर प्रतिबंध लगाया था। ललित मोदी को सशस्त्र पुलिस सुरक्षा प्रदान की गयी है जो उनके घर की पहरेदारी करती है भले ही वह घर पर हों या न हों, उन्हें एक गैर श्रेणी पुलिस सुरक्षा कवर भी दी गई है जो उनके साथ घर के दरवाजे से बाहर भी सुरक्षा प्रदान करती है जिनमें एकाधिक सशस्त्र पुलिस वाले शामिल हैं जो उन्हें 24 घंटे उनके घर और बाहर जाते ही, उनके कार को पहरा देते हैं। लेकिन उनकी पत्नी मिनल और बेटा रुचिर जब बाहर निकलते हैं तो केवल 1 सशस्त्र पुलिस वाला ही उनके साथ होता है। मोदी का अपना निजी सुरक्षा बल 24 घंटे उनके घर की रखवाली करता है और मोदी के निजी अंगरक्षक हर समय उनकी, उनकी पत्नी और बेटे की रखवाली करते हैं। यह भी कहते सुना गया है कि IPL की सुरक्षा एजेंसी ने मोदी के आसपास की सुरक्षा को और भी मजबूत बना दिया है।
निजी जीवन व परिवार-
IPL खेलों के दौरान मोदी को कई बार अपने बेटे रूचिर के साथ देखा जाता है, लेकिन उनकी पत्नी मीनल और बेटी आलिया शायद ही उनके साथ इस खेल में देखी जातीं हैं . उनके बच्चे रूचिर (14) और आलिया (16) वर्तमान में अमेरिकन स्कूल ऑफ़ बॉम्बे में अध्ययन कर रहे हैं। वह मुंबई, जुहू बीच के उपनगर में अपने घर में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक बहुत ही भव्य जीवन गुजार रहें हैं। मुंबई के वर्ली जैसे व्यापारिक क्षेत्र में भी उनका एक फ्लैट है।
अन्य सौदे-
जब से मोदी BCCI में शामिल हुए उन्होंने बहुत सफलतापूर्वक BCCI के लिए निम्नलिखित सौदों को संपन्न किया:
4 साल के लिए सहारा ग्रुप के साथ टीम भारत के लिए टीम स्पोंसरशिप डील - 103 मिलियन डॉलर (415 करोड़) 20.12.05 को
4 साल के लिए नाइक के साथ टीम भारत के लिए टीम परिधान के प्रायोजन का सौदा - 53 करोड़ डॉलर (215 करोड़) 24.12.05 को
4 साल के लिए निम्बस के साथ मीडिया अधिकार सौदा - 612 मिलियन डॉलर 18.2.06 को
4 साल के लिए ज़ी के साथ विदेशों में मैच के लिए मीडिया अधिकार - 219 मिलियन डॉलर 7.4.06 को
WSG के साथ BCCI के प्रायोजन का सौदा - 46 मिलियन डॉलर (173 करोड़) 27.8.07 को
सोनी के साथ IPL मीडिया अधिकार सौदा - 1.26 अरब डॉलर 15.1.08 को
विभिन्न दलों के साथ IPL टीम्स सेल - 723.6 मिलियन डॉलर 25.01.08 को
वेब मीडिया अधिकार, वर्तमान मीडिया के सीधे प्रसार के लिए - 50 मिलियन डॉलर 18.4.08 को
IPL टाइटल प्रायोजन और ग्राउंड प्रायोजकों को - 220 मिलियन डॉलर - मार्च, अप्रैल 2008
IPL मीडिया अधिकार के लिये सोनी WSG के साथ फिर से समझौता - 1.26 अरब डॉलर से 2 अरब डॉलर 25.3.2009 को[विकिपीडिया से साभार ]
ऐसे में एक ऐसे तबका जिससे ललित मोदी ताल्लुक रखते हैं निश्चित ही वह तबका है जिससे गांधी परिवार भी ताल्लुक रखता है ऐसे में वह उनसे निश्चित रूप में मिला ही होगा वैसे भी उन्हें भारत में अब तक घोषित अपराधी की संज्ञा तो मिली नहीं जो उनसे कोई मिलने के लिए नकाब का इस्तेमाल करे उन पर आईपीएल के प्रसारण के लिए 425 करोड़ का ठेका देने में गड़बड़झाले में १२५ करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप है और इस मामले में उनपर दो केस दर्ज हैं और आज ललित मोदी जिस कारण से चर्चा में हैं वह इसलिए हैं क्योंकि वर्तमान सरकार की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी ने उनकी वीज़ा लेने में मदद की थी मात्र मिलना यहाँ चर्चा का कारण नहीं है और प्रियंका गांधी जिस पार्टी के परिवार से ताल्लुक रखती हैं उस पार्टी के नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा मोदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था .
इसलिए यहाँ मोदी का यह बयान केवल यही दर्शित करता है कि वे ''खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे '' वाली प्रतिक्रिया अपना रहे हैं क्योंकि मोदी की मदद करने वालों के खिलाफ कांग्रेस ही झंडा उठाये है और प्रियंका गांधी उसी पार्टी की भविष्य की संभावित नेतृत्व करने वाली हैं .अब ऐसे में क्या किया जाये मुझे तो सोचकर भी डर लगता है कि कहीं कल मोदी मेरा नाम भी अपने से मिलने वालों में न लेने लगें क्योंकि मिली तो उनसे मैं भी थी भले ही सपने में .इसलिए ऐसे में कांग्रेस को और कांग्रेस के इन सितारों को भविष्य में अपना मिलने का दायरा यही सोचकर सीमित करना होगा -
''कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ,
ये नए मिज़ाज़ का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो .''

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 23 जून 2015

भाजपा में भी हैं राहुल गांधी मौजूद


ललित मुद्दे पर बोले भाजपा सांसद, भगोड़े की मदद करना है गलत

भगोड़े की मदद करना गलत
पूर्व गृह सचिव एवं मौजूदा भाजपा सांसद आर के सिंह ललित मोदी मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बचाने के भाजपा के प्रयासों पर पानी फेरते दिख रहे हैं। अपने हालिया बयान में उन्होंने कहा है कि एक भगोड़े की मदद करना गलत है।
आर के सिंह ने सरकार से अपील की है कि सरकार ललित मोदी को वापस भारत लाने के लिए हर संभव कदम उठाए ताकि वो कानून का सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी भगोड़े की मदद करता है तो वो गलत है।
अगर कोई भगोड़े से मिलता है तो ये बिल्कुल ही गलत है। जिसने भी मदद की है वो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि ललित मोदी नोटिस और कई समनों का सामना कर रहे हैं और एसे भगोड़े की मदद करना या उससे कोई मीटिंग करना गलत है।
[अमर उजाला से साभार ]
अपनी ही सरकार के कदम पर इस प्रकार ऊँगली उठाकर पूर्व गृह सचिव व् मौजूदा भाजपा सांसद आर के सिंह ने ये तो ज़ाहिर कर ही दिया है कि भाजपा भी केवल चापलूसों की पार्टी नहीं है बल्कि भाजपा में भी ऐसे बुद्धिजीवी व् साहसी कार्यकर्ता मौजूद हैं जो कॉंग्रेस के राहुल गांधी की तरह अपनी सरकार के गलत कामों को रोकने की क्षमता रखते हैं.स्मरणीय रहे कि राहुल गांधी अपनी ही सरकार के बिल को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नकार भी चुके हैं और फाड़ भी चुके हैं जिसके लिए उन्हें काफी आलोचना का भी शिकार होना पड़ा था और सियासत में पप्पू जैसी कुत्सित टिप्पणियों का सामना भी करना पड़ा था -

In a major embarrassment to the UPA government, Rahul Gandhi today denounced the controversial ordinanceto negate the Supreme Court verdict on convicted lawmakers as "complete nonsense" and said what "our government has done is wrong".
Making a surprise brief appearance at a meet-the-press programme of his party's general secretary Ajay Maken at the Press Club here, he said the ordinance should be "torn up and thrown away".[thanks to www.dnindia.com]
लेकिन ये सभी जानते हैं कि जिन्हे इस दुनिया में कुछ भी सही करना होता है वे कभी भी दूसरों के कहने या आलोचना की परवाह नहीं करते वे केवल वही करते हैं जो सही होता है और जिसकी उनका अंतर्मन इज़ाज़त देता है .और जिनके बारे में कहा भी गया है -
''लोग कहते हैं बदलता है ज़माना अक्सर ,
मर्द वे हैं जो ज़माने को बदल देते हैं .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

सोमवार, 22 जून 2015

शाईस्तगी को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं ....


तानेज़नी पुरजोर है सियासत  की  गलियों में यहाँ ,
ताना -रीरी कर रहे हैं  सियासतदां  बैठे यहाँ .

इख़्तियार मिला इन्हें राज़ करें मुल्क पर ,
ये सदन में बैठकर कर रहे सियाहत ही यहाँ .

तल्खियाँ इनके दिलों की तलफ्फुज में शामिल हो रही ,
तायफा बन गयी है देखो नेतागर्दी अब यहाँ .

बना रसूम ये शबाहत रब की करने चल दिए ,
इज़्तिराब फैला रहे ये बदजुबानी से यहाँ .

शाईस्तगी  को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं ,
रफ्ता-रफ्ता नीलाम हशमत मुल्क की करते यहाँ .

जिम्मेवारी ताक पर रख फिरकेबंदी में खेलते ,
इनकी फितरती ख़लिश से ज़ाया फ़राखी यहाँ .

देखकर ये रहनुमाई ताज्जुब करे ''शालिनी''
शास्त्री-गाँधी जी जैसे नेता थे कभी यहाँ .

शब्दार्थ :-तानेजनी -व्यंग्य ,ताना रीरी -साधारण गाना ,नौसीखिए का गाना
तलफ्फुज -उच्चारण ,सियाहत -पर्यटन ,तायफा -नाचने गाने आदि का व्यवसाय करने वाले लोगों का संघटित दल ,रसूम -कानून ,शबाहत -अनुरूपता  ,इज़्तिराब-बैचनी  ,व्याकुलता   ,शाईस्तगी-शिष्ट  तथा सभ्य होना ,हशमत -गौरव  ,ज़ाया -नष्ट  ,फ़राखी -खुशहाली
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 21 जून 2015

बसाने में एक बगिया ,कई जीवन लग जाते हैं .


सरकशी बढ़ गयी देखो, बगावत को बढ़ जाते हैं ,
हवाओं में नफरतों के गुबार सिर चढ़ जाते हैं .
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मुहब्बत मुरदार हो गयी,सियासी चालों में फंसकर ,
अब तो इंसान शतरंज की मोहरें नज़र आते हैं.
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मुरौवत ने है मोड़ा मुंह ,करे अब क़त्ल मानव को ,
सियासत में उलझते आज इसके कदम जाते हैं .
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हुई मशहूर ये नगरी ,आज जल्लाद के जैसे ,
मसनूई दिल्लगी से नेता, हमें फांसी चढाते हैं .
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कभी महफूज़ थे इन्सां,यहाँ जिस सरपरस्ती में ,
सरकते आज उसके ही ,हमें पांव दिख जाते हैं .
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सयानी आज की नस्लें ,नहीं मानें बुजुर्गों की ,
रहे जो साथ बचपन से ,वही दुश्मन बन जाते हैं .
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जलाते फिर रहे ये आशियाँ ,अपने गुलिस्तां में ,
बसाने में एक बगिया ,कई जीवन लग जाते हैं .
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उभारी नफरतें बढ़कर ,सियासत ने जिन हाथों से ,
उन्हीं को सिर पर रखकर ,हमें हिम्मत बंधाते हैं .
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लगे थे जिस जुगत में ''शालिनी''के ये सभी दुश्मन ,
फतह अपने इरादों में ,हमारे दम पर पाते हैं .
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शब्दार्थ-मुरदार -मरा हुआ ,बेजान ,
मसनूई -बनावटी ,दिल्लगी-प्रेम ,सरकशी-उद्दंडता ,सरपरस्ती -सहायता .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]
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