शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2012

माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .



    
मिलती है हमको माँ 
उसके रहमों-करम से  ;
मिलती है माँ की गोद उसके रहमों-करम से .

अहकाम में माँ के छिपी औलाद की नेकी ;
ममता की मिलती छाँव उसके रहमों-करम से .

तालीम दे जीने के वो काबिल है बनाती ;
माँ करती राहनुमाई उसके रहमों-करम से .

औलाद की ख्वाहिश को वो देती है तवज्जह ; 
माँ दिलकुशा मोहसिन उसके रहमों-करम से .

कुर्बानियां देती सदा औलाद की खातिर ;
माँ करती परवरिश है उसके रहमों-करम से .

तसव्वुर 'शालिनी' के अब भर रहे परवाज़ ;
माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .

                                           शालिनी कौशिक 
                                                     [कौशल ]
अहकाम -हुकुम ,राहनुमाई -पथप्रदर्शन ,दिलकुशा -बड़े दिलवाला ,मोहसिन -एहसान करने वाला ,तसव्वुर -कल्पना ,परवाज़ -उड़ान 

4 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Nihayat khoobsoorat rachana!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माँ है तो सब कुछ है।

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

कुर्बानियां देती सदा औलाद की खातिर ;
माँ करती परवरिश है उसके रहमों-करम से,,,,,

RECENT POST : ऐ माता तेरे बेटे हम .

Bhola-Krishna ने कहा…

बेटा , नवरात्रि में, माता पिता के विषय में आपकी ऐसी हृदयग्राही अभिव्यक्ति पढ़ कर ऐसा लगा जैसे आप हम दोनों की भवनाएँ ही उजागर कर रही हैं ! बेटाजी आपका आलेख पढ़ कर हम दोनों - [ एक ७७ वर्षीया मा और दूसरा ८३ वर्षीय पिता ] भाव विभोर हो गये ! काश विश्व के सभी बच्चे,आपकी तरह अपने अपने ,माता-पिता की महत्ता समझ सकते ! दोनों लेखों के लिए बधाई ,धन्यवाद और हार्दिक आभार - ! आशीर्वाद एवं शुभकामनायें - कृष्णा आंटी - भोला अंकल

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...