बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

सच्चाई आज की ;मेरी नज़रों में

सच्चाई आज की ;मेरी नज़रों में 


आज दशहरा है और आस पास के घरों में बाहर गए बेटे बहुओं की खिलखिलाहट सुनाई दे रही है आज ये आवाजें केवल किसी त्यौहार के अवसर पर ही सुनाई देती हैं और दिन सभी अपने अपने में व्यस्त रहते हैं कहा जाता है कि ये आज के समय की मांग है .हम भी देख रहे हैं कि आदमी उन्नति के लिए देश विदेश मारा मारा फिर रहा है और परिवार के नाम पर अब मात्र औपचारिकता ही रह गयी है .किन्तु इसके पीछे एक सच भी है कि आज अपने बड़े आज के युवाओं को ''अपने जीवन में एक बाधा ''के तौर पर ही दिखाई देते  हैं .वे स्वतंत्रता से जीना चाहते हैं और उनकी उपस्थिति उन्हें इसमें सबसे बड़ा रोड़ा दिखती है .और इसका ही परिणाम है कि आज जो बच्चे अपने बड़ों से अलग रह रहे हैं उनके बच्चे भी कहीं और उनसे अलग ही रह रहे हैं कहा भी तो गया है कि ''जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए ''और ऐसे में वे भी वही झेल रहे हैं जो उन्होंने अपने बड़ों के साथ किया है और ऐसा नहीं है कि संस्कार नाम की चीज जब उन्होंने अपने बच्चों में डाली ही नहीं है तो वे इसकी आशा कर भी नहीं सकते और इसलिए बुढ़ापा जिसमे अपने अपनों का साथ सभी को प्यारा होता है उसमे वे सभी एकांत की जिंदगी गुजरने को विवश हो रहे है .
और रही संयुक्त परिवारों के टूटने की बात तो इसके लिए आज की स्थितियां ही नहीं उनमे व्याप्त विषमता भी जिम्मेदार कही जाएगी क्योंकि अधिकांशतया यही देखा गया कि संयुक्त परिवारों में घर का एक शख्स तो काम की चक्की में पिस्ता रहता था और अन्य सभी इसे उसका फ़र्ज़ कहकर या फिर ये कहकर कि ''अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम,दास मलूका कह गए सबके दाता राम ''.
           क्या मेरे विचारों में आपको कुछ गलत लग रहा है यदि हाँ तो दिल खोल कर बताएं क्या पता आपके अनुभव कुछ और कहते हों .
                                              शालिनी कौशिक [कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

Manu Tyagi ने कहा…

सुंदर रचना

Manu Tyagi ने कहा…

आपको भी शुभकामनायें

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संयुक्त परिवार का समर्थन भी विशाल होता है..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
♥(¯*•๑۩۞۩~*~विजयदशमी (दशहरा) की हार्दिक बधाई~*~۩۞۩๑•*¯)♥
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
♥(¯*•๑۩۞۩~*~विजयदशमी (दशहरा) की हार्दिक बधाई~*~۩۞۩๑•*¯)♥
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

संयुक्त परिवार अच्छा होता है बशर्ते सभी परिवार की जिम्मेदारी का निर्वहन करे,,,,,

विजयादशमी की हादिक शुभकामनाये,,,
RECENT POST...: विजयादशमी,,,

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

शालिनी जी निश्चय ही यह एक सहज बदलाव नहीं है .यदि हम अपने दिवंगत माँ बाप का चित्र दीवार पर टांगेंगे तो संभावना है हमारे बच्चे भी ऐसा ही करें .बच्चे तो उत्पाद हैं .सहज अनुकरण की प्रवृत्ति होती है

उनकी .अलबत्ता परिवर्तन और केवल परिवर्तन ही स्थाई है सब कुछ बदल रहा है लैप टॉप और मोबाइल के स्वरूप की तरह तेज़ी से आदमी उसके साथ चल कहाँ पा रहा है,हिचकोले खा रहा है .एक अंतराल के बाद

आपको सुना पढ़ा .आवाजाही बनाए रखिये बेटे जी .

बहुत अच्छा लगा .दशहरा पर्व की बधाई .

Ankur jain ने कहा…

सही कहा...सहमत।।।

kshama ने कहा…

Vijayadashmee kee anek shubh kamnayen....deree ke liye kshama prarthee hun!

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