जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें ,

                              
झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में ,
ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं .
बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ ,
ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं .
शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे ,
मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं .
मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें ,
सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं .
कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर,
सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं .
जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें ,
अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं .
                शालिनी कौशिक 
                       [कौशल] 

टिप्पणियाँ

एक पिता को सब हैं प्यारे,
सब उसकी आँखों के तारे।
Manu Tyagi ने कहा…
सुंदर रचना , पिता के प्रति बढिया भाव
रविकर ने कहा…
शुभकामनायें-
bhola.krishna@gmail .com ने कहा…
माता-पिता - दोनों के प्रति आपकी मधुर
अभिव्यक्ति , दिल छू गयी ! आपका कथन अक्षरशः सत्य है , न केवल आपके और हमारे लिए वरन समग्र मानवता के लिए ! बेटा ,प्रभु ,नजर नवाजे [दृष्टि दान] दे उन्हें जो देख नहीं पाते हैं माता पिता का यह अनुपम मधुर स्वरूप ! बेटा ! आप आयना दिखा रहीं हैं उसके लिए हार्दिक धन्यवाद !आशीर्वाद !
भोला अंकल - कृष्णा आंटी [यू एस ए ]
kshama ने कहा…
Bahut khush qismat hain aap!

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