मंगलवार, 9 अक्तूबर 2012

लगेंगी सदियाँ पाने में .


लगेंगी सदियाँ पाने में ......
न खोना प्यार अपनों का लगेंगी सदियाँ पाने में ,
न खोना तू यकीं इनका लगेंगी सदियाँ पाने में .

नहीं समझेगा तू कीमत अभी बेहाल है मन में ,
अहमियत जब तू समझेगा लगेंगी सदियाँ पाने में .

नहीं बनता ये ऐसे ही कि चाहे जब बना ले तू ,
तू तोड़ेगा ये डूबेगा लगेंगी सदियाँ पाने में .

यकीं और प्यार का रिश्ता बनाया ऊपरवाले ने ,
हुनर पाना जो चाहे ये लगेंगी सदियाँ पाने में .

मिले जब प्यार अपनों का तो भर आती हैं ये आँखें ,
संभालेगा न गर इनको लगेंगी सदियाँ पाने में .

जो आये आँख में आंसू ''शालिनी ''पी जाना तू मन में ,
गिरा गर धरती पर आकर लगेंगी सदियाँ पाने में .
                   शालिनी कौशिक 

7 टिप्‍पणियां:

Aziz Jaunpuri ने कहा…

nice feelings

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

लफ्ज़ दो चार कोई वैसे कह जाए ज़माने में ,

गले से मत लगा लेना ,लगें सदियाँ भुलाने में .


मिले जब प्यार अपनों का तो भर आती हैं ये आँखें ,
संभालेगा न गर इनको लगेंगी सदियाँ पाने में .

बहुत बढ़िया अश आर हैं ,दिल पे सीधे करते वार हैं .

बनाके मत बिगाड़े तू ,लगें सदियाँ बनाने में ,

जो टूटा डाल से पत्ता लगें सदियाँ बनाने में .

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मिले जब प्यार अपनों का तो भर आती हैं ये आँखें ,
संभालेगा न गर इनको लगेंगी सदियाँ पाने में .
..यह शेर अच्छा अधिक अच्छा लगा।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत गहन भाव..प्रभावी कविता।

शारदा अरोरा ने कहा…

इन भावों को सलाम ...

Devendra Dutta Mishra ने कहा…

यकीं और प्यार का रिश्ता बनाया ऊपरवाले ने ,
हुनर पाना जो चाहे ये लगेंगी सदियाँ पाने में .
रिश्तों के अहमियत का अहसास दिलाती सुंदर नज्म।

Bhola-Krishna ने कहा…

शालिनी जी
" मिले जब प्यार अपनों का तो भर आती हैं ये आँखें! ,
संभालेगा न गर इनको लगेंगी सदियाँ पाने में !!".
सच कहा है आपने !धन्यवाद आभार !

काश ऐसी हो जाए भारतीय नारी

चली है लाठी डंडे लेकर भारतीय नारी , तोड़ेगी सारी बोतलें अब भारतीय नारी . ................................................ बहुत दिनों ...