कुपोषण और आमिर खान -बाँट रहे अधूरा ज्ञान


कुपोषण और आमिर खान -बाँट रहे अधूरा ज्ञान 

Aamir Khan to spread awareness against malnutrition 

Aamir to spread awareness against malnutrition   mwcd
''भोज्य तत्वों के गुण और परिमाण में अपर्याप्त तथा आवश्यकता से अधिक उपभोग द्वारा जो हानिकारक प्रभाव शरीर में उत्पन्न हो जाते हैं ,वे 'कुपोषण' ही हैं .''
   ''भोज्य तत्व ''गुण और परिमाण में शारीरिक आवश्यकतानुसार लेने चाहियें वर्ना इसके परिणाम बड़े भयानक निकलते हैं .
    इस प्रकार 
अपोषण +आवश्यकता से अधिक पोषण =कुपोषण 
    होता है और महान बालीवुड नायक आमिर खान कुपोषण के हटाने के लिए जिस मुहीम पर काम कर रहे हैं वे भारत में माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों को इसी राह पर आगे बढ़ा रहे हैं  .वे कह रहे हैं कि छह माह तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए और कुछ नहीं मतलब कि वे माँ और बच्चा दोनों के लिए न चाहते हुए भी कुपोषण की राह खोल रहे हैं .
     माँ का दूध बच्चे के लिए प्रकृति प्रदत्त पोषाहार प्रदान करता है जो बच्चे को सहज ग्राह्य होने के साथ साथ शुद्ध एवं बाहरी आक्रमण से मुक्त रखता है .विश्व स्वास्थ्य संगठन ,कृषि एवं खाद्य संगठन ,संयुक्त राष्ट्र बाल कोष जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की मान्यता है कि भारत वर्ष जैसे विकासशील देशों की माताएं अपने बच्चों को तब तक स्तन-पान कराएँ जब तक ऐसा करना उनके लिए संभव हो तथा इसका उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ता हो .साथ ही नवजात शिशु को पहले दिन का दूध अवश्य पिलाना चाहिए क्योंकि इस दूध में विद्यमान 'कोलेस्टम 'में विटामिन ए की बहुतायत मात्रा होती  है .उसकी आँतों में लाभकारी जीवाणु तथा पाचन संस्थान में एंजाइम उत्पन्न होते हैं .जो विशेष लाभदायक होते हैं .गाय का दूध पीने वाले बच्चों की आँतों में क्षारीय माध्यम उत्पन्न होता है ,जबकि माता का स्तनपान करने में अम्लीय माध्यम बनता है जो लाभकारी बैक्टीरिया  उत्पन्न करता है .
     मात्र इसी ओर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं आमिर खान जबकि एक पक्ष इसका और है और वह यह है -
     ''कि केवल माँ का दूध बच्चे की पोषण सम्बन्धी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति चार माह तक कर पाता है .इसके बाद  उसे बाहर से कुछ दिया जाना चाहिए नहीं तो बच्चे के विकास की गति धीमी हो जाती है .''
     माताओं की यह धारणा है कि जब तक बच्चा दूध पीता है उसे अन्य कोई आहार दिए जाने की आवश्यकता नहीं होती ,सही नहीं है. माँ के दूध में लोहा ,विटामिन सी और नायसिन आदि पोषक तत्त्व नहीं होते हैं .बच्चा जब अपनी माँ के गर्भ में पलता है तो उसके शरीर में इतना अतिरिक्त लोहा इकठ्ठा हो जाता है जो जन्म लेने के बाद केवल चार माह के लिए ही पूरा पड़ता है ऐसे में यदि उसके बाद कुछ ऊपरी  आहार न दिया जाये तो लोहे की कमी से रक्तहीनता उत्पन्न होती है ,विटामिन सी की कमी के कारण मसूड़े पुष्ट नहीं होते और उसके दांत ठीक से नहीं निकलते ,नायसिन की कमी के कारण ही स्तनपान करने वाले शिशुओं के मुहं में अक्सर छाले पड़ जाते हैं चार माह का हो जाने पर शिशु का आमाश्य ठोस पदार्थ पचाने लायक हो जाता है भले ही उसका एक भी दांत न निकला हो .बच्चों के पाचन संस्थान को अभ्यस्त बनाने के लिए भी अन्य आहार धीरे धीरे देना उचित होता है [साभार-आहार एवं पोषण विज्ञानं -विमला शर्मा ] 
    साथ ही एक दूध पिलाने वाली माँ का भोजन निम्नलिखित है -
भोज्य तत्व                          दूध पिलाती माँ 
कैलोरी                                 ३१०० 
प्रोटीन [ग्राम में ]                     ९८ 
कैल्शियम [ग्राम में ]                 १:३ 
लोहा [ग्राम में ]                        २० 
विटामिन ए अंतर्राष्ट्रीय इकाई    ८००० 
थायमिन [मिलीग्राम में ]           १.२ 
रायबोफ्लैमिन [''  '']                 १.९ 
एस्कोर्बिक [''  '']                      १०० 
विटामिन डी                            ४०० 
    और भारत जैसे देश में जहाँ इतनी जानकारी और सुविधाओं का अभाव है वहां एक माँ पर इस तरह का अतिरिक्त कार्य डालना जो कि उसके स्वयं इस विषम परिस्थिति से उभरने में बाधक हो सकता है और फिर जिस काम का दायित्व उस पर आमिर खान से प्रचार द्वारा डलवाया जा रहा है वह उसके शिशु के लिए लाभकारी न होकर उसके स्वास्थ्य के लिए भी घातक है ,ऐसे में अज्ञानता व् घोर गरीबी वाले इस देश में आमिर खान को अपने स्टारडम के प्रचार से उस जनता को ,जो स्टार के कहने पर कुछ भी गलत या सही करने के  लिए आगे बढ़ जाती है ,को भ्रम में डालने से बचना चाहिए और अपने इस कार्य से सही प्रचार के लिए देश की अनुभवी दाइयों व् बुजुर्ग उन महिलाओं से संपर्क करना चाहिए जिनके हाथों में पीला बढे हजारों लाखों नौनिहाल आज देश का नाम रोशन कर रहे हैं न कि उन शोध संस्थाओं से जिनके शोध कभी कुछ कहते हैं तो कभी कुछ  ,और देर सवेर जो स्वयं ही गलत साबित होते हैं .

                                 शालिनी कौशिक 
                                       [कौशल ]

टिप्पणियाँ

आमिर खान आदि तो केवल धन के पुजारी हैं उनका उद्देश्य येन-केन-प्रकारेंण धन बटोरना है और ऐसे लोग कारपोरेट उत्पादों के मार्केटिंग से ज़्यादा ज्ञान नहीं रखते हैं।
आमिर खान इस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं, वो वही बोलते हैं जो स्क्रिप्ट उन्हें थमाई जाती है। मुझे लगता है कि इसके लिए संबंधित महकमें की जिम्मेदारी ज्यादा है। हो सकता है कि आप मेरी बात से सहमत ना हों, फिर आमिर खान की पहल का स्वागत होना चाहिए।
vishvnath ने कहा…
आमिर खान ने भारत में इन समस्याओं का सिर्फ रोना रोया और पैसे बटोर के चलते बने .
आपके लेख ने ये भी साबित कर दिया की उनका अनुसंधान भी गलत था ! आपने इनकी पोल तकनिकी बिन्दुओ को ध्यान में रख कर खोली है जिसका ओर लोगो तक पहुच्ना जरूरी है .....क्या मैं इसे आपके नाम से फेसबुक पर शेयर कर सकता हूँ ..???

बहरहाल इस लेख के माध्यम से ऐसी जानकारी और देने के लिए धन्यवाद .

मैंने भी कुछ लिखा था इनके बारे में ....

http://vishvnathdobhal.blogspot.in/2012/11/blog-post_27.html

kshama ने कहा…
Neem hakeem bade khatarnaaq hote hain!
आमिर खान के लिए कुपोषण अथवा अपोषण से कोई फर्क नहीं पड़ता है बस उनको फर्क पड़ता है उनके कार्यक्रम की लोकप्रियता से ! लेकिन माँ और बच्चे के साथ इस तरह के खिलवाड से बचना चाहिए !!
सार्थक आलेख !!
बढ़िया जानकारी दी है ...
आभार आपका !
shyam Gupta ने कहा…
सही कहा विशेषज्ञों व चिकित्सक-वर्ग को यह दायित्व देना चाहिए न कि ऐरा-गैरा हीरो अदि को, जो सिर्फ आधुनिक नीम हकीम जैसे ही हो सकते हैं....
---- चिकित्सकीय मत के अनुसार चार नहीं अपितु छः माह की उम्र से ही बच्चे को ठोस आहार देना चाहिए जिसे ' वीनिंग' कहा जाता है ....तब तक माँ का दुग्ध सम्पूर्ण आहार है ...हाँ पानी व मधु आदि देना ओप्सनल है जो गर्मियों में, गर्म देशों में दिया जा सकता है साफ़-सफाई के साथ...

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