रविवार, 19 मई 2013

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26-मेरी प्रविष्टि दो दोहे


 

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26


दो दोहे-
व्याकुल मन माँ वसुंधरा ,करें करुण पुकार ,
पर्यावरण के शोषण का ,बंद कर दो व्यापार .

निसर्ग नियम पर ध्यान दे ,निसंशय मिले निस्तार ,
मेरा जीवन ही मनुज ,तेरा जग आधार .

      शालिनी कौशिक 

7 टिप्‍पणियां:

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (20-05-2013) के 'सरिता की गुज़ारिश':चर्चा मंच 1250 पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
सूचनार्थ |

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सार्थक दोहे,आभार.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर।

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

sundar prastuti .aabhar

Laxman Bishnoi ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति !
बहुत कुछ का अनुसरण कर बहुत कुछ देखें और पढें

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

पर्यावरण चेतना से अनुप्राणित दोहे .

kshama ने कहा…

Bahut khoob! Maine na jane itne maheenon me kya kya miss kar diya!

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