शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

अभिनेता प्राण को भावपूर्ण श्रृद्धांजलि -शालिनी कौशिक

Pran to be honoured with Dadasaheb Phalke Award



चले आज वे महज़ देह छोड़कर ,
नज़र सामने न कभी आयेंगे .
अगर देखें शीश उठाकर सभी ,
गगन में खड़े वे चमक जायेंगे .

                      शरीरों का साथ भी क्या साथ है ?
                       है चलती ही रहती मिलन व् जुदाई .
                       जो मिलते हैं अपनी आत्मा से हमें 
                      न मध्य में आती किसी से विदाई .

ये फ़िल्मी सितारे अज़र  हैं अमर हैं 
हमारे ख्वाबों में रोज़ आया करेंगे .
भले भूल जाएँ हमको हमारे ही अपने 
ये सबके दिलों पर छाये रहेंगे .

                      जो पैदा हुए हैं सभी वे मरेंगे ,
                       जो आये यहाँ पर सभी चल पड़ेंगे .
                       है इनकी कला का ये जादू सभी पर 
                       ये जिंदा थे ,जिंदा हैं और जिंदा रहेंगे .


अभिनेता प्राण को भावपूर्ण श्रृद्धांजलि 
                                   शालिनी  कौशिक 
                                           [कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

हर युग के नायक प्राण साहिब को श्रद्धांजलि...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (13-07-2013) को समय की कमी ने मार डाला में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

श्रद्धांजलि..

संजय भास्‍कर ने कहा…

अभिनेता प्राण को भावपूर्ण श्रृद्धांजलि !!!

parul chandra ने कहा…

बहुत खूब लिखा है...

Aditi Poonam ने कहा…

भावभीनी श्रध्हांजलि....

shorya Malik ने कहा…

निर्भीक , कर्मठ कलाकार को हमने खो दिया, ये तो दस्तूर है, जो आया है, उसे जाना भी होगा, भावपूर्ण श्रध्हांजलि...

Neeraj Kumar ने कहा…

जो पैदा हुए हैं सभी वे मरेंगे ,
जो आये यहाँ पर सभी चल पड़ेंगे .
है इनकी कला का ये जादू सभी पर
ये जिंदा थे ,जिंदा हैं और जिंदा रहेंगे .
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (15.07.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी. कृपया पधारें .

HARSHVARDHAN ने कहा…

जिस तरह एक ताज महल है, एक दिलीप कुमार है, एक लता मंगेशकर है!! ठीक उसी तरह एक प्राण है।। प्राण साहब को नम आँखों से भावभीनी श्रद्धांजलि।। प्राण साहब हमेशा हम सबकी यादों में रहेंगे। वो जहाँ भी रहे, सदा खुश रहे।

Madan Mohan saxena ने कहा…

भावपूर्ण श्रध्हांजलि.

कानून पर कामुकता हावी

१६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आंदोल...