शनिवार, 27 जुलाई 2013

बहन की असलियत

Women_talking : Muslim young woman on the phone, looking at camera. Stock PhotoSad_man : Young man thinking about a solution , isolated on black Stock Photo

''भैय्या ''भाभी का सुना ,बड़ा दुःख हुआ ,आप और दोनों बेटियां तो अब बिल्कुल अकेले ही रह गए और देखो कितने दुःख की बात है ये और मैं आ भी नहीं सकते बहुत बीमार हैं ना और इतनी उम्र में इतनी दूर आना जाना संभव भी तो नहीं है . कोई बात नहीं तुम्हारे आने से हो भी क्या जायेगा ,जो होना था सो हो गया अपना और प्रमोद जी का ध्यान रखो ,पत्नी की मृत्यु पर भाई को लखनऊ बैठी बहन उत्तरा के सांत्वना देने पर मुजफ्फरनगर बैठे भाई कुमार ने समझाते हुए कहा .
दो महीने बाद ............
''भैय्या''आप यहाँ नहीं आ रहे ?छोटे की बेटी की शादी है ,मैं और ये तो यहाँ आये हुए हैं और आपके पास भी आना चाहते हैं .आप घर पर ही मिलोगे न ?
अरे नहीं उत्तरा ,कोई ज़रुरत नहीं है .....सड़के बहुत ख़राब हैं ,बेकार में तुझे और प्रमोद जी को बहुत तकलीफ होगी और मैंने पहले ही कह दिया था ,जो होना था सो हो गया ,अब ये सब बेकार की बाते हैं .तुझे कोई ज़रुरत नहीं यहाँ आने की .तू आराम से मेरठ में गीता की शादी में शामिल हो ,''मौज कर ''दिखावटी अपनापन दिखाने वाली बहन को फिर टालते हुए कुमार जी ने कहा .
और उधर .....चलो भाई अब हमें कोई कुछ नहीं कह सकता ,आखिर हम तो आना चाहते थे ,भैया ने ही मना कर दिया ,उत्तरा सुस्ताते हुए बोली ......पर दीदी आपको नहीं लगा ,हमें तो लग गया कि जेठ जी आपकी असलियत को पहचान गए ,मुस्कुराती उत्तरा पर छोटे  की बहु अमला की इस बात से घड़ों पानी गिर गया और छोटे की बहु ......चुटकी लेते हुए नहाने चल दी .
                   शालिनी कौशिक 
                           [कौशल ]

8 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

खुराफात में लीन हैं, रिश्ते-नाते दोस्त |
सम्बन्धों पर चढ़ चुके, मोटी चमड़ी,गोश्त |
मोटी चमड़ी,गोश्त, भाँजना झूठ बोलना |
गायब मासूमियत, राज ले, पोल खोलना |
घर घर की लघु कथा, बड़ा दम दिखे बात में |
अपनी चिंता छोड़, लीन जग खुराफात में ||

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

shorya Malik ने कहा…

अर्थपूर्ण कहानी, अर्थहीन होते रिश्ते

Virendra Kumar Sharma ने कहा…


शालिनी जी संबंधों की आंच अब बुझ चुकी है इन्हें निभाना अब एक सुविधा है मजबूरी नहीं। ॐ शान्ति। बढ़िया प्रस्तुति।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

रिश्तों का सच आसानी से समझ आ जाता है ... सोचने वाली है कहानी ...

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर, चिंतन जरूरी

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

sundar

आशा जोगळेकर ने कहा…

रिश्ते नाते.........सब बातें हैं बातों का क्या ।

हस्ती ....... जिसके कदम पर ज़माना पड़ा.

कुर्सियां,मेज और मोटर साइकिल      नजर आती हैं हर तरफ और चलती फिरती जिंदगी      मात्र भागती हुई      जमानत के लिए      निषेधाज्ञा के...