सोमवार, 16 सितंबर 2013

क्या करेगी जन्म ले बेटी यहाँ




क्या करेगी जन्म ले बेटी यहाँ

साँस लेने के काबिल फिजा नहीं ,

इस अँधेरे को जो दूर कर सके

ऐसा एक भी रोशन दिया नहीं !

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क्या करेगी तरक्की की सोचकर

तेरे लिए ये जहाँ बना नहीं ,

हौसलों को तेरे जो पर दे सके

ऐसा दिलचला कोई मिला नहीं !

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क्या करेगी सोच साथ देने की

तेरी नहीं कोई ज़रुरत यहाँ ,

कद्र जो तेरी मदद की कर सके

ऐसा कदरदान है हुआ नहीं !

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क्या करेगी उनके ग़मों को बांटकर

तुझसे साझा उन्होंने किये नहीं ,

सह रही जो सदियों से तू आज तक

उनका साझीदार है यहाँ नहीं !

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''शालिनी''ही क्या अनेकों बेटियां

बख्तरों में बंद हो आई यहाँ ,

मुजरिमों की जिंदगी क्यूं है मिली

इसका खुलासा कभी किया नहीं !

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शब्दार्थ -दिलचला-दिलेर ,साहसी .बख्तर-लोहे का कवच .

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

11 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वातावरण सबके योग्य बनाना होगा, तभी जीवन अपना पूर्ण रूप ले जी पायेगा।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सुंदर सृजन !

RECENT POST : बिखरे स्वर.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सुंदर सृजन !

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धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सुंदर सृजन !

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Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बुधवार - 18/09/2013 को
अमर' अंकल पई की ८४ वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः19 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





राजीव कुमार झा ने कहा…

आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ऐसे माहोल में बदलाव लाने की जरूरत है .. बेटियों को सुरक्षा देने की उनके विकास में सहभागी बनने की जरूरत है ...

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बढ़िया रचना -निराशा में आशा को जीवित रखना है
latest post: क्षमा प्रार्थना (रुबैयाँ छन्द )
latest post कानून और दंड

Suresh Rai ने कहा…

बेटियों का जन्म, इस धरा पे, बेवजह नही है
ईश्वर का वरदान हैं, बेटियाँ सज़ा नही हैं
suresh rai.
kindly visit and bless me
http://mankamirror.blogspot.in/

Reena Maurya ने कहा…

सामायिक रचना.. बदलाव की जरुरत है..
स्थितियां बदलेगी तभी सब संभव है...

sunita agarwal ने कहा…

vartamaan parishthitiyo ko ujagar kati uttam rachna .. shubhkamnaye :)

तुम केवल वकील हो समझे ....

''जातियां ही चुनावी घडी हो गयी ,  उलझनें इसलिए खड़ी हो गयी ,  प्रजातंत्र ने दिया है ये सिला  कुर्सियां इस देश से भी बड़ी हो गयी ...