शनिवार, 21 सितंबर 2013

सज संवरके हाथ अपने बांध तब लीजिये ,


तस्वीर बनकर सामने जो हाथ बांधे हों खड़े ,

नुमाइंदगी की इनसे उम्मीद क्या कर लीजिये ,

थामने को अब मशाल क्रांति नई लाने को ,

संग इस रहनुमा के सेवक रख लीजिये .

...............................................................................

बढ़ चले यूँ हम अगर मूर्ति के साथ में ,

अपने साथ इसकी भी रखवाली आप कीजिये ,

करना पड़े ये काम भी गर ऐसे हालात में ,

इनको आगे चलने का ,फिर क्यूं मुक़द्दर दीजिये .

.........................................................................................

हालात ही ख़राब हैं मुल्क के इन दिनों ,

चाहता है देश अब ख्याल कुछ कीजिये ,

दिल को ज़ख़्मी होने से तो आप नहीं रोक सके ,

कम से कम ज़ख्म पर मरहम रख दीजिये .

................................................................................................

देखकर विवाद को आपसे है आसरा ,

समर्थ बन भाइयों के मिटा भेद दीजिये ,

गांठ जो धागे में है प्रेम के यूँ लग रही ,

अपने हाथ खोलकर उसे भी खोल दीजिये .

..................................................................................

बाँधने से हाथ को न कोई कुछ कर सके ,

जनता और दल को न यूँ निराश कीजिये ,

महज गरजने से नहीं मुश्किलों के हल मिलें ,

देखकर मुखालिफों को अब सुधर लीजिये .

..................................................................................................

सामने जो आपके चढ़ाये आस्तीन खड़े ,

मुश्किलों से लड़ने की उनसे सीख लीजिये ,

काम अभी देश में पड़े हैं अनकिये हुए ,

मुंह की जगह हाथ से ही काम अब लीजिये .

........................................................................................................

बुराईयाँ मुखालिफों की गिनाना आसान है ,

अपनी खासयितों को खुद की नज़र कीजिये ,

आज के हालात का जिम्मेवार कौन यहाँ ,

अपने गिरेबान में झांक देख लीजिये .

.......................................................................................

अहम् भरे भाव लिए जनता के सामने ,

सज संवरके हाथ अपने बांध तब लीजिये ,

झोंक दिया देश को मजहबी जिस आग में ,

उससे निकल पाने का उपाय कर दीजिये .



शालिनी कौशिक

[कौशल ]

7 टिप्‍पणियां:

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - सोमवार - 23/09/2013 को
जंगली बेल सी बढती है बेटियां , - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः22 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra





राकेश कौशिक ने कहा…

हालात ही ख़राब हैं मुल्क के इन दिनों ,
चाहता है देश अब ख्याल कुछ कीजिये ,

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

अच्छी रचना है भाव स्तर पर। आवाहन है इसमें मोदी का।

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

अच्छी रचना है भाव स्तर पर। आवाहन है इसमें मोदी का।

Kaushal Lal ने कहा…

अहम् भाव हर जगह व्याप्त है

विजय राज बली माथुर ने कहा…

जिनके निजी स्वार्थ आड़े आ रहे होंगे वे आपकी नेक सलाह कैसे मानेंगे?

कालीपद प्रसाद ने कहा…

सामने जो आपके चढ़ाये आस्तीन खड़े ,

मुश्किलों से लड़ने की उनसे सीख लीजिये ,

काम अभी देश में पड़े हैं अनकिये हुए ,

मुंह की जगह हाथ से ही काम अब लीजिये .
:-)
Latest post हे निराकार!
latest post कानून और दंड

बेटी की...... मां ?

बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग...