फेसबुक दीवार


फेसबुक दीवार 

दीवार 
मेरी 
आपकी 
पडोसी की 
हर किसी की .
......................
हिफाज़त करे 
मेरी 
आपकी 
पडोसी की 
हर किसी की .
............................
राहत की साँस 
मेरी 
आपकी 
पडोसी की 
हर किसी की .
...........................
श्रृंगार भीतरी ,शान बाहरी,
मेरी 
आपकी 
पडोसी की 
हर किसी की .
......................
अब बन गयी 
ज़रुरत 
दिलों की भड़ास की ,
उत्पाद प्रचार की ,
वोट की मांग की ,
किसी के अपमान की ,
किसी के सम्मान की .
..................................
भरा जो प्यार दिल में 
   दिखायेगा दीवार पर ,
भरा जो मैल मन में 
   उतार दीवार पर ,
बेचना है मॉल जो 
   प्रचार दीवार पर ,
झुकानी गर्दन तेरी 
   लिखें हैं दीवार पर ,
पधारी कौन शख्सियत 
    देख लो दीवार पर .
.........................................
मार्क जुकरबर्ग ने 
     संभाला एक मोर्चा ,
देखकर गतिविधि 
   बैठकर यही सोचा ,
दीवार सी ही स्थिति 
   मैं दूंगा अंतर्जाल पर ,
लाऊंगा नई क्रांति 
   फेसबुक उतारकर ,
हुआ कमाल जुट गए 
   करोड़ों उपयोक्ता ,
दीवार का ही काम अब 
   फेसबुक कर रहा ,
जो चाहे लिख लो यहाँ ,
  जो चाहे फोटो डाल लो ,
क्रांति या बबाल की 
    लहर यहाँ उफान लो ,
करे कोई ,भरे कोई ,
   नियंत्रण न कोई हद ,
जगायेगा कभी लगे 
   पर आज बन गया है दर्द .
..........................................
    शालिनी कौशिक 
          [कौशल ]






टिप्पणियाँ

shikha kaushik ने कहा…
well written .congr8s
Virendra Kumar Sharma ने कहा…
दीवार का ही काम अब
फेसबुक कर रहा ,
जो चाहे लिख लो यहाँ ,
जो चाहे फोटो डाल लो ,
क्रांति या बबाल की
लहर यहाँ उफान लो ,
करे कोई ,भरे कोई ,
नियंत्रण न कोई हद ,
जगायेगा कभी लगे
पर आज बन गया है दर्द .

बेहतरीन प्रस्तुति बड़ा कैनवास लिए।
मुख चिठ्ठा कितना है विशाल ,
तिलका करदे ताड़ ;
ताड़ का करदे रत्ती
पलक झपकते कर दे -
आशा को निराशा राम।

निर्बुद्धि को बुद्धि राम।
सद्भावना बनी रहे, साधनों का उपयोग जोड़ने में हो,,तोड़ने में नहीं।
Reena Pant ने कहा…
badiya rachnaye
ajay yadav ने कहा…
उम्दा रचना |सटीक परिवेश के अनुसार |

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