सोमवार, 30 सितंबर 2013

आगे बढ़कर हाथ मिला .

सन्दर्भ -समाचार सरहद पर अमन के बाद होगी बात .

पाकिस्तान हमेशा से भारत के शांति प्रयासों का मजाक उडाता आया है और अब भी वह इसी राह पर है कुछ यूँ -





आ रहे हैं तेरे दर पर ,आगे बढ़कर हाथ मिला .

दिल मिले भले न हमसे ,आगे बढ़कर हाथ मिला .



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घर तेरे आकर भले हम खून रिश्तों का करें ,

भूल जा तू ये नज़ारे ,आगे बढ़कर हाथ मिला .

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जाहिरा तुझसे गले मिल भीतर चलायें हम छुरियां ,

क्या करेगा देखकर ये,आगे बढ़कर हाथ मिला .

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हम सदा से ही निभाते दोस्त बनकर दुश्मनी ,

तू मगर है दोस्त अपना,आगे बढ़कर हाथ मिला .

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घर तेरा गिरने के दुःख में आंसू मगरमच्छी बहें,

पर दुखी न दिल हमारा,आगे बढ़कर हाथ मिला .

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आग की लपटों से घिरकर तेरे अरमां यूँ जलें ,

मिल गयी ठंडक हमें ,अब आगे बढ़कर हाथ मिला .



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जिंदगी में तेरी हमने क्या न किया ''शालिनी '',

भूल शहादत को अपनी, आगे बढ़कर हाथ मिला .



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शालिनी कौशिक

[कौशल ]

9 टिप्‍पणियां:

Rohitas ghorela ने कहा…

kash ki esa ho... uttam vichar..


(mere blog me main HINDI me type nhi kar pa rha hun... please help me aout Email- rohitasghorela@gmail.com)

Rohitas ghorela ने कहा…

kash ki esa ho... uttam vichar..


(mere blog me main HINDI me type nhi kar pa rha hun... please help me aout Email- rohitasghorela@gmail.com)

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

सटीक पंक्तियाँ |

मेरी नई रचना :- जख्मों का हिसाब (दर्द भरी हास्य कविता)

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

ब्लॉग"दीप" में 500 ब्लोग्स

sunita agarwal ने कहा…

वहह बढ़िया कटाक्ष ...शुभकामनाये
आग की लपटों से घिरकर तेरे अरमां यूँ जलें ,

मिल गयी ठंडक हमें ,अब आगे बढ़कर हाथ मिला .


बहुत खूब

दिल की आवाज़ ने कहा…

सुन्दर रचना शालिनी जी ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सामयिक सत्य बताती पंक्तियाँ

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

प्रासंगिक बात सनातन सत्य।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सावधान रहने की जरूरत है हमेशा पाकिस्तान से ...