विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी .

Mother And Daughter -mother and daughter baby girl brushing their teeth together...Father and daughter having fun -
नाजुक कोपल ,कोमल गुलाब की पंखुरी सी ,
बुलबुल ,चंचल ,कोयल की मीठी स्वर लहरी सी ,
हर बगिया की हरियाली है ,
हर चेहरे की वह लाली है ,
फूलों से लदी वह डाली है ,
खुशियों की मञ्जूषा ,मंजुल पुष्पों की मंजरी सी .
रखती है ध्यान सभी का वह ,
दिल से हर लेती सारा भय ,
कर देती जीवन आशा मय,
आशुकोपी ,आशुतोषी मन वीणा की वह मोहिनी सी .
अनमोल ये देन है कुदरत की ,
राहत के देती पल ये सखी ,
घर की रौनक है इससे ही ,
जीवन में भरती रंग-तरंग ऐसी अद्भुत अलबेली सी .
नटखट हिरनी सी चपल है ये ,
मासूम शिशु सी भोली ये ,
कभी शिवा कभी लक्ष्मी है ये ,
विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी .
पिता के कुल की शान है ,
ससुर के घर का मान है ,
माँ धरती की पहचान है ,
बाबुल के ज्ञान से संजोती ससुराल की नसल सुनीति सी .
बेटी ,बहना रूप में मांगे देखभाल और प्यार ,
पत्नी रूप में सहने को हर दुःख है ये तैयार,
माँ के रूप में साथ खड़ी बन रक्षा- दीवार ,
न रूकती कलम कवि की कभी लिखते इस पर ''शालिनी'' सी .
शब्दार्थ-मञ्जूषा -पिटारा ,मंजरी -लता ,शीरीनी -मिष्ठान ,नसल-वंश ,सुनीति-अच्छी नीति ,शालिनी-गृह स्वामिनी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

टिप्पणियाँ

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (11-01-2014) को "रोना-धोना ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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