शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी .

Mother And Daughter -mother and daughter baby girl brushing their teeth together...Father and daughter having fun -
नाजुक कोपल ,कोमल गुलाब की पंखुरी सी ,
बुलबुल ,चंचल ,कोयल की मीठी स्वर लहरी सी ,
हर बगिया की हरियाली है ,
हर चेहरे की वह लाली है ,
फूलों से लदी वह डाली है ,
खुशियों की मञ्जूषा ,मंजुल पुष्पों की मंजरी सी .
रखती है ध्यान सभी का वह ,
दिल से हर लेती सारा भय ,
कर देती जीवन आशा मय,
आशुकोपी ,आशुतोषी मन वीणा की वह मोहिनी सी .
अनमोल ये देन है कुदरत की ,
राहत के देती पल ये सखी ,
घर की रौनक है इससे ही ,
जीवन में भरती रंग-तरंग ऐसी अद्भुत अलबेली सी .
नटखट हिरनी सी चपल है ये ,
मासूम शिशु सी भोली ये ,
कभी शिवा कभी लक्ष्मी है ये ,
विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी .
पिता के कुल की शान है ,
ससुर के घर का मान है ,
माँ धरती की पहचान है ,
बाबुल के ज्ञान से संजोती ससुराल की नसल सुनीति सी .
बेटी ,बहना रूप में मांगे देखभाल और प्यार ,
पत्नी रूप में सहने को हर दुःख है ये तैयार,
माँ के रूप में साथ खड़ी बन रक्षा- दीवार ,
न रूकती कलम कवि की कभी लिखते इस पर ''शालिनी'' सी .
शब्दार्थ-मञ्जूषा -पिटारा ,मंजरी -लता ,शीरीनी -मिष्ठान ,नसल-वंश ,सुनीति-अच्छी नीति ,शालिनी-गृह स्वामिनी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (11-01-2014) को "रोना-धोना ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर!

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...