गुरुवार, 30 जनवरी 2014

धिक् पुरुष की गन्दी सोच

NCP woman leader nirbhaya was responsible for her rape
दामिनी गैंगरेप कांड और इसके पहले हुए बलात्कार और इसके बाद निरंतर हो रहे बलात्कारों ने देश में एक बहस सी छेड़ दी है और अधिकांशतया ये बहस एक ही कोण पर जाकर ठहर जाती है और वह कोण है नारी विरोध ,नारी से सम्बंधित जितने भी अपराध हैं उन सबमे एक ही परंपरा रही है नारी को ही जिम्मेदार ठहराने की .ये पहली और आखिरी पीड़ित होती है जो स्वयं ही अपराधी भी होती है .ऐसा नहीं है कि मात्र पुरुष ही नारी पर दोषरोपण करते हैं नारी भी स्वयं नारी पर ही दोष मढ़ती है और इसी कड़ी में एक नया नाम जुड़ा है महाराष्ट्र महिला आयोग की सदस्य और एन.सी.पी. नेता डॉ.आशा मिर्गी का ,जो कहती हैं कि नारी के साथ हो रहे इस अपराध के तीन ही कारण हैं -१-उसके अनुचित कपडे ,२-उसका अनुचित व्यवहार और ३- उसका अनुचित जगहों पर जाना ,बहुत गहराई से शोध किया गया है बलात्कार के कारणों का डॉ.आशा मिर्गी के कथन से तो यही लगता है और आश्चर्य है कि ऐसा वे तब कह रही हैं जब वे महाराष्ट्र जैसे राज्य की निवासी हैं जहाँ इस तरह के अपराधों की संख्या देश में सबसे ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि उनके हिसाब से अनुचित कपडे ,अनुचित व्यव्हार व् अनुचित जगहों पर जाना इस अपराध का मूल कारण है तो महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई ,मुम्बई में बॉलीवुड और बॉलीवुड की हीरोइन जो इन सभी कार्यों में लिप्त हैं तब तो बलात्कार की संख्या सर्वाधिक भारत में यहीं होनी चाहिए जबकि आंकड़े तो कुछ और ही कहते हैं -

[Maximum rapes in India recorded in this state

Maximum rapes in India recorded in this state
Madhya Pradesh reported the highest number of rape cases (3,406) accounting for 14.1 per cent of total such cases reported in the country.
Rape cases have been further categorised as incest rape and other. Incest rape cases have decreased by 7.3 per cent from 288 cases in 2010 to 267 cases in 2011 as compared to 9.2 per cent increase in overall rape cases.
Maharashtra (44 cases) has accounted for the highest (15.3 per cent) incest rape cases.][एन.डी.टी.वी .से साभार ]
उपरोक्त आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ये संख्या सर्वाधिक है महाराष्ट्र में नहीं ,फिर क्या डॉ.आशा मिर्गी ने उन्हें अपने शोध में सम्मिलित करते हुए ये विचार व्यक्त किये हैं या उन्हें भी यहाँ वैसे ही दरकिनार कर दिया है जैसे अपने सतही शोध में वास्तविक कारणों को .
बलात्कार आज हमारे देश ही क्या विश्व की समस्या बन चूका है ,न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व की नारी इस अपराध को झेल रही है .जब मिस वर्ल्ड की प्रतियोगिता में शामिल होने जा रही प्रतिभागी तक को ये झेलना पड़ता है तब इस अपराध के विश्वव्यापी होने को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता ,अंतर सिर्फ ये है कि वह प्रतिभागी तब भी उस प्रतियोगिता में भाग लेती है और विजयी होती है और भारत भारत में बलात्कार की शिकार नारी का तो मानो जीवन ही समाप्त हो जाता है क्योंकि भारत के बाहर यह एक अपराध है इसमें नारी का दोष नहीं ढूँढा जाता किन्तु भारत में ये अपराध होने पर सर्वप्रथम नारी को ही कलंकित करना शुरू कर दिया जाता है अपराधी बना दिया जाता है .
सभी ये मानते हैं कि लड़कियों को सही कपडे पहनने चाहियें ,सही व्यवहार रखना चाहिए ,सही जगहों पर जाना चाहिए किन्तु क्या कोई भी यह कह सकता है कि आज बलात्कार हर तरह से गलत लड़की के साथ हो रहे हैं यदि ऐसा है तो बॉलीवुड की कोई हेरोइन ,डैली सोप की अभिनेत्री ,मॉडल आदि तो इस अपराध से बच ही नहीं सकती क्योंकि वे तो हर तरह से गलत कपडे पहनती हैं ,गलत व्यवहार के रूप में हर तरह के गलत हाव-भाव का प्रयोग करती हैं और ऐसी गलत जगहों पर जाती हैं जहाँ यौन शोषण एक आम बात है ,जब दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय चैनल पर खुलेआम नगनता, उत्तेजक दृश्यों व् अश्लील व्यवहार सबके सामने हो रहा है -

आलोचना -सामाजिक -दूरदर्शन पर खुलेआम महिला शोषण [contest]

तब अन्य चैनल्स की स्थिति तो सोची भी नहीं जा सकती ऐसे में इस अपराध के मूल कारणों से ध्यान हटाकर नारी पर ही इसका दोषारोपण किया जाना निंदनीय है .
इस अपराध का करने वाला पुरुष है और मात्र एक शरीर नहीं वरन उसकी सोच भी इस अपराध का मूल कारण है .न केवल नारी शरीर से पुरुष अपनी हवस मिटाता है वरन वह मिटाता है इससे सम्बंधित नारी के पिता ,भाई, पति से अपनी रंजिश की प्यास ,वह लेता है बदला उस नारी से अपनी उपेक्षा का ,वह सिखाता है उसे सबक कि उसे नहीं अधिकार पुरुष के एकतरफा प्यार को ठुकराने का और वह दिखाता है उसे उसकी वास्तविक स्थिति कि उसमे नहीं दम इस समाज में अपना प्रतिष्ठापूर्ण स्थान बनाने का और यदि ऐसा नहीं है तो गाँव में चारा काटने गयी ,खेत में पति के लिए भोजन लेकर गयी ,शहरों -कस्बों में स्कूल में पढने-पढ़ाने गयी ,बस में सफ़र कर रही कपड़ों से ढकी छिपी डरी डरी सी लड़कियां क्यूँ खुलेआम बलात्कार का शिकार हो रही अं ?क्यूँ शिकार हो रही हैं वे ज़रा सी बच्चियां जिन्होंने अभी चलना -फिरना बाते करना सीखा ही है ?क्यूँ इनके साथ हो रहे हैं गैंगरेप ?क्या एक लड़की के अनुचित कपडे ,अनुचित व्यवहार ,अनुचित जगह पर जाने मात्र से ५ से ७ लोगों की हवस की भावना या कहूँ वासना इस कदर उबल सकती है कि वे ऐसी घटना को अंजाम दे दें ?
क्यूँ नहीं ऐसे विषयों पर बोलते वक़्त ये हमारे देश समाज के कर्णधार गहराई से अवलोकन करते हैं इन तथ्यों का जो चीख-चीखकर कहते हैं कि ये सब पुरुषों के द्वारा पूर्व नियोजित होता है .यह अचानक से नहीं होता और नारी केवल इसी करना इसका शिकार होती है क्योंकि नारी को प्रकृति ने कमज़ोर बनाया है और उसे इस अपराध से उत्पन्न बीज को ढोने का श्राप दिया है[जो कार्य समाज की मर्यादाओं के अनुसार होने पर नारी के लिए वरदान कहा जाता है वही कार्य ऐसी परिस्थितियों में नारी के लिए श्राप बन जाता है क्योंकि ये साबित करना कि ये बच्चा धर्म युक्त है या धर्म विरुद्ध नारी की ही जिम्मेदारी होती है और ये कार्य उसके लिए ऐसी परिस्थितियों में मुश्किल नहीं तो कठिन अवश्य होता है और उसकी इसी मजबूरी का लाभ पुरुष वर्ग द्वारा एक खेल की तरह उठाया जाता है .]
और बाकी सब ऐसी सोच रखने वाले लोग कर रहे हैं जो पुरुषों की गन्दी सोच का कारण भी नारी को ही बना रहे हैं जबकि इस अपराध का केवल और केवल एक ही कारण है ''पुरुष की गन्दी सोच'' और ये ही वजह भी है बहुत सी जगह नारी के अनुचित कपड़ों,अनुचित व्यवहार व् अनुचित जगहों पर जाने की क्योंकि वह इसी सोच का फायदा उठाने को कभी मजबूरी वश तो कभी तरक्की की चाह में ऐसा करने को आगे बढ़ जाती है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (31-01-2014) को "कैसे नवअंकुर उपजाऊँ..?" (चर्चा मंच-1508) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सभ्य समाज के सशक्त मानक स्थापित करने होंगे।

SATYA SHEEL AGRAWAL ने कहा…

शालिनी जी .बहुत ही तर्कसंगत और और सार्थक विश्लेषण किया है आपने .पुरुष की घिनौनी सोच काफी हद तक इन दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है नारी को दोयम दर्जे का स्थान दिया जाना, उनकी कुत्सित मानसिकता का पोषण करता है.

06shikhakaushik ने कहा…

sateek likha hai aapne .aabhar

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