गुरुवार, 16 जनवरी 2014

सही है राहुल चिड़िया-मोदी शेर

 मेनका गांधी ''people with animal ''संस्था चलाती हैं स्वाभाविक है कि वे जानवरों के /प्राणियों के विषय में बहुत अच्छी तरह से जानती ही होंगी इसलिए विश्वास किया जा सकता है कि राहुल गांधी चिड़िया व् नरेंद्र मोदी शेर हैं और उनके अनुसार माना भी जा सकता है कि राहुल गांधी का नरेंद्र मोदी से कोई मुकाबला नहीं .सही कहा मेनका जी ने भला शेर व् चिड़िया का क्या मुकाबला .मेनका गांधी भाजपा की सदस्य हैं किन्तु हैं तो कॉंग्रेस से भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी जी की पुत्र वधु और कॉंग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जी की चाची अर्थात मातृ सदृश ,तो कहना तो उन्हें उनके पक्ष में ही था .
अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को शेर कह एक बार फिर उन्होंने भारतीय जनता में डर कायम कर दिया है .शेर आदमखोर होता है सभी जानते हैं और आजकल तो उत्तर प्रदेश व् उत्तराखंड के एक बड़े क्षेत्र में लोग वैसे भी एक आदमखोर बाघिन के हमलों से आक्रांत हैं लोग सोच रहे हैं कि वह हमले कर आदमियों व् औरतों को मार रही है किन्तु वन विभाग के निदेशक का कहना है कि हमले शेर ने किये हैं ऐसे में बार बार नरेंद्र मोदी को शेर कहना उन्हें खतरा साबित करना नहीं है तो क्या है और अगर खतरा नहीं है तो कुत्तों को अपने बिस्तर पर सुलाने वाले मेनका जी स्वयं किसी शेर को अपने बिस्तर पर सुलाकर देखें शायद ऐसा सम्भव नहीं है तो फिर क्यूँ अपने उम्मीदवार की खिलाफत को ये गिरा हुआ हथियार इस्तेमाल कर रही हैं ?
रिश्ते में राहुल गांधी के चाची जी मेनका अपना पुत्र प्रेम नहीं रोक पायी और उन्हें चिड़िया कह गयी जानती हैं कि इस वक्त देश में उसी पार्टी का महत्व है जो धर्मनिरपेक्ष है और ऐसे में वे राहुल गांधी को चिड़िया कहती हैं क्योंकि जानती हैं कि चिड़िया एक परिंदा है और सभी जानते हैं-
''परिंदों में कभी फिरकापरस्ती नहीं होती ,
कभी मंदिर पे जा बैठे ,कभी मस्ज़िद पे जा बैठे .''
सर्व धर्म सम्भाव वाला यह देश आज स्वयं अपने योग्य प्रधानमंत्री का चयन कर सकता है ,जिसके विरोधी भी चाहे अनचाहे जिसकी खूबियां बता रहे हैं उसके बारे में अन्य किसी प्रमाण की ज़रुरत ही क्या रह जाती है और एक घोषित उम्मीदवार होते हुए नरेंद्र मोदी को स्वयं अपने पार्टी सदस्यों द्वारा देश के लिए खतरा बताया जाता है ऐसे में देश के प्रधानमंत्री के सम्बन्ध में कोई संशय रह ही नहीं जाता क्योंकि सब जनते है कि शेर जंगल का राजा होता है और भारत कोई जंगल नहीं बल्कि विभिन्न धर्मों के संगम व् सम्भाव की स्थली है जहाँ एक चिड़िया फिरकापरस्त ताकतों को ठेंगा दिखाती है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-01-2014) को "सत्य कहना-सत्य मानना" (चर्चा मंच-1496) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Neeraj Kumar ने कहा…

यद्यपि विचारों से मेरी सहमती नहीं है .. आपका आलेख , सन्दर्भ , प्रस्तुतीकरण सुन्दर है .. आभार आपका