शनिवार, 25 जनवरी 2014

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,
फतह की ये है निशानी ,फ़लक पर आज फहराए .
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रहे महफूज़ अपना देश ,साये में सदा इसके ,
मुस्तकिल पाए बुलंदी फ़लक पर आज फहराए .
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मिली जो आज़ादी हमको ,शरीक़ उसमे है ये भी,
शाकिर हम सभी इसके फ़लक पर आज फहराए .
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क़सम खाई तले इसके ,भगा देंगे फिरंगी को ,
इरादों को दी मज़बूती फ़लक पर आज फहराए .
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शाहिद ये गुलामी का ,शाहिद ये फ़राखी का ,
हमसफ़र फिल हकीक़त में ,फ़लक पर आज फहराए .
..................................
वज़ूद मुल्क का अपने ,हशमत है ये हम सबका ,
पायतख्त की ये लताफत फ़लक पर आज फहराए .
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दुनिया सिर झुकाती है रसूख देख कर इसका ,
ख्वाहिश ''शालिनी''की ये फ़लक पर आज फहराए .
............................शालिनी कौशिक
[कौशल]

7 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (26-01-2014) को "गणतन्त्र दिवस विशेष" (चर्चा मंच-1504) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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६५वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

संजय भास्‍कर ने कहा…

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सुन्दर प्रस्तुति...!

राजेंद्र कुमार ने कहा…

६५वें गणतंत्र दिवस कि हार्दिक शुभकामनायें !

रविकर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति-
शुभकामनायें गणतंत्र दिवस की-
सादर

रविकर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति-
शुभकामनायें गणतंत्र दिवस की-
सादर

Anita ने कहा…

तिरंगे को नमन...सुंदर कविता !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

... पता ही नहीं चला.

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