शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

मोदी सरकार मतलब तानाशाही सरकार

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भाजपा का २०१४ के लोकसभा चुनाव के लिए जारी होने वाला घोषणा पत्र अभी टल गया. अब ७ अप्रैल को घोषित किया जायेगा .कारण '' मोदी '' के हस्ताक्षर नहीं हुए .मोदी कौन ? भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ,जहाँ तक उनकी सोच को इसमें स्थान मिलने की बात है वहाँ तक उनकी आँखों के नीचे से इसका गुज़रना सही कहा जायेगा किन्तु मोदी के हस्ताक्षर ज़रूरी क्यूँ जबकि ये घोषणापत्र भाजपा का है और उनकी स्थिति मात्र भाजपा के एक सिपाही की है या फिर ज्यादा से ज्यादा सेनानायक की और युद्ध की घोषणा और उसके बाद किये जाने वाले कार्यक्रमों की घोषणा राजा द्वारा की जाती है और भाजपा के राजा इस वक़्त जहाँ तक हम सभी जानते हैं राजनाथ सिंह जी हैं और वे स्वयं को लोकतान्त्रिक कहने वाली पार्टी में लोकतान्त्रिक तरीके से ही चुने गए हैं और जब वे उपस्थित है तो ये अधिकार उनका है और यदि ऐसे में यह अधिकार कोई और प्रयोग कर रहा है तो साफ है कि भाजपा की लोकतान्त्रिक राजशाही खतरे में है .सारे में अच्छे दिन आने की बाते कही जा रही हैं और अच्छे दिन लाने वाली पार्टी के लगता है बुरे दिन आ गए हैं .''मैं नहीं हम'' का दावा करने वाले मोदी के बारे में चारों ओर यही चर्चा है कि उन्होंने भाजपा को हाइजेक कर लिया है और इसमें कुछ भी असत्य नहीं लगता क्योंकि वोट देने की बात तो भाजपा सरकार को कही जा रही है और सरकार मोदी की बनेगी ये दिखाया जा रहा है क्या समझ में आता है इससे ,यही कि भाजपा और कमल का फूल मात्र नाम व् चिन्ह रह गए हैं और झंडा हो या डंडा सब कुछ मोदी ही हो गए हैं .मुरली मनोहर ,हरेन पंड्या ,लाल कृष्ण सभी की बोलती बंद हो चुकी है अब बस एक की ही टूटी बोलती है मोदी की जिसे वे चाहेंगे वह चुनाव लड़ेगा ,जब वे साइन करेंगे तब घोषणा पत्र ज़ारी होगा ,सरकार उनकी बनेगी ,विज्ञापन उन्हीं के होंगे दूरदर्शन पर आने वाले सभी विज्ञापन जिसमे ''जनता माफ़ नहीं करेगी ''कहते कहते जनता को अभिनेता /अभिनेत्रियां भावुक कर भाजपा को वोट देने को तैयार कर रहे थे वे सब अब साफ हो गए हैं और अब आ गए हैं नए विज्ञापन जिनमे मोदी जी खुद अपनी सरकार का विज्ञापन कर रहे हैं मतलब हम कहते कहते मैं पर लौट रहे हैं मोदी ,कोई मेरी बात का बुरा माने या भला किन्तु यदि दिमाग से सोचेगा तो निश्चित रूप में उसे मोदी तानाशाही की ओर बढ़ते हुए ही दिखाई देंगे जहाँ अन्य किसी के लिए कोई स्थान नहीं ,अन्य किसी का कोई भरोसा नहीं अन्य किसी पर निर्भरता नहीं .अब वे ही सब कुछ हो चुके हैं क्या मतलब निकलता है इसका
''मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए कारवां बनता गया ''
तो बिलकुल नहीं ,अब मोदी साफ साफ तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं और एक ऐसी सरकार जिसका सब कुछ मात्र एक ही व्यक्ति हो वह तानाशाही की सरकार कही जाती है और वह सबसे मात्र यही कहती है -
'' मेरी मर्ज़ी ,मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी .''
अब हमें लोकतंत्र में रहना है या तानशाही में ये हम सभी पर ही निर्भर है .एक बार सोचियेगा ज़रूर .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (06-04-2014) को "खामोशियों की सतह पर" (चर्चा मंच-1574) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'